Mumbai : पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला टैक्स (Excise Duty) अभी कम किया जाना संभव नहीं है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज यह बात साफ कर दी. वित्त मंत्री मुंबई में SIDBI के 37वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोल रही थी.
VIDEO | At Sidbi event in Mumbai, Finance Minister Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) says, "Challenges due to external factors, India's domestic economy continues to be positive and resilient even today; section of Indians wanting to decry our own achievements amid the challenges… pic.twitter.com/YFVgBExd9Y
— Press Trust of India (@PTI_News) May 25, 2026
उन्होंने कहा कि अगर सरकार पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करती है, तो उसे लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा. वित्त मंत्री ने यह बयान तब सामने आया है जब तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. पिछले 10 दिनों में तेल की कीमतों में चौथी बार बढ़ोतरी की गयी है.
आज सोमवार की बात करें तो आज पेट्रोल के दाम प्रति लीटर 2.61 रुपये और डीजल के दाम प्रति लीटर 2.71 रुपये बढ़ाये गये हैं. अपनी बात रखते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि टैक्स में कटौती करना सुनने में तो अच्छा लगता है,
लेकिन इससे सरकारी खजाने को 1 लाख करोड़ रुपये का झटका लग जायेगा, उसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा. कहा कि देश के विकास और जरूरी योजनाएं चलाने के लिए रेवेन्यू का बने रहना बेहद जरूरी है.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने समझाया कि कच्चे तेल, फर्टिलाइजर और सोने की बढ़ती कीमतों की वजह से भारत पर फॉरेन एक्सचेंज का दबाव बढ़ रहा है. हालांकि कहा कि वैश्विक संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय आत्मविश्वास बनाए रखने की अपील की .
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार इस समय तीन F Fuel (ईंधन), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फॉरेन एक्सचेंज पर खास ध्यान दे रही है. पश्चिम एशिया संकट की वजह , अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव है. उर्वरक और सोने की कीमतों में भी तेजी बनी हुई है.
निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री मोदी की ईंधन बचाने की अपील का समर्थन करते हुए कहा, मौजूदा हालात में यह सिर्फ सलाह नहीं बल्कि हमारी आर्थिक जरूरत है. पश्चिम एशिया संकट के कारण शिपिंग और सप्लाई चेन की लागत बढ़ रही है. इसका असर ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्रीज और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है.
अगर कच्चा तेल महंगा बना रहता है तो पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगाई दोनों बढ़ सकते हैं. वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति कई देशों से बेहतर है. उन्होंने जीएसटी कलेक्शन, वाहनों की बिक्री, ट्रैक्टरों की बिक्री और बीमा क्षेत्र के पॉजिटिव आंकड़ों का जिक्र किया.
यह भी बताया कि कॉमर्शियल सेक्टर के बैंकों का खराब कर्ज (NPA) घटकर 1.93 प्रतिशत पर आ गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि डर फैलाने के बजाय लोगों में भरोसा पैदा करने की जरूरत है. सरकार ईंधन बचत, विदेशी मुद्रा प्रबंधनऔर आर्थिक स्थिरता पर लगातार काम कर रही है ताकि देश की विकास रफ्तार बनी रहे.
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