Ranchi : आदिवासी नेता निशा भगत का अंतिम संस्कार शनिवार को गुमला स्थित उनके पैतृक गांव उरू बारडीह में सरना रीति-रिवाज के अनुसार किया गया. इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग ने निशा भगत के आत्महत्या के मामले में स्वंतः संज्ञान लिया है. आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष, विस्तृत एवं समयबद्ध जांच के साथ निशा के फेसबुक लाइव, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण को सुनिश्चित करने को कहा है.
इसके साथ ही आयोग ने पुलिसकर्मियों की ओर से किसी भी प्रकार की लापरवाही या कर्तव्य में चूक पाए जाने पर जवाबदेही तय करने तथा दिवंगत के परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने को भी कहा है. आयोग ने कहा है कि इस मामले में पुलिस की कार्रवाई की समीक्षा, पूर्व में दर्ज कराई गई शिकायतों पर जांच के बारे में जानकारी दी जाए. आयोग ने पुलिसकर्मियों की ओर से किसी भी प्रकार की लापरवाही या कर्तव्य में चूक पाए जाने पर जवाबदेही तय करने तथा दिवंगत के परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने को भी कहा है. आयोग ने 7 दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) भी मांगी है.
राष्ट्रीय महिला आयोग ने झारखंड के रांची में आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री निशा भगत की 6 नवंबर 2026 को हुई मृत्यु से संबंधित मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक लाइव के दौरान उन्होंने ऑनलाइन ट्रोलिंग, उत्पीड़न तथा स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस से जुड़ी शिकायतों को लेकर अपनी व्यथा व्यक्त की थी। उन्होंने लाइव के दौरान पिठोरिया थाना प्रभारी से भी संपर्क कर अपनी परेशानी और जीवन समाप्त करने के विचार के बारे में बताया था। आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर ने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष, विस्तृत एवं समयबद्ध जांच, पुलिस की प्रतिक्रिया एवं कार्रवाई की समीक्षा, पूर्व में दर्ज कराई गई शिकायतों पर की गई कार्रवाई की जांच तथा फेसबुक लाइव, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण को सुनिश्चित करने को कहा है। आयोग ने पुलिसकर्मियों की ओर से किसी भी प्रकार की लापरवाही या कर्तव्य में चूक पाए जाने पर जवाबदेही तय करने तथा दिवंगत के परिजनों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने को भी कहा है। आयोग ने 7 दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगी है। किसी भी महिला की पीड़ा और मदद की पुकार अनसुनी नहीं होनी चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए संवेदनशीलता, समयबद्ध कार्रवाई और जवाबदेही अनिवार्य है। #suomotu #ncw #jharkhand
— NCW (@NCWIndia) November 7, 2026
इससे पहले शुक्रवार की रात उनके परिजन निशा का शव लेकर गुमला पहुंचे थे. शहर में डीएसपी रोड स्थित उनके आवास पर पार्थिव शरीर को रखा गया था, जहां कई नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सरना समाज के लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी.
शनिवार को ही सरना समाज के लोगों ने शहर के टावर चौक पर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान और इस घटना की सीबीआई जांच की मांग के साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे. न्याय मार्च में महिलाएं भी शामिल थीं. सभी ने इस घटना के खिलाफ नारेबाजी की. इससे पूर्व आदिवासी समाज के सदस्यों ने पालकोट रोड स्थित सरना स्थल पर आत्महत्या मामले को लेकर बैठक की और आगे के आंदोलन की रणनीति बनायी.
दिन में डीएसपी रोड स्थित आवास से शव यात्रा निकाली गयी, जिसमें आदिवासी समाज के प्रतिनिधि और गांव के लोग शामिल हुए. निशा भगत के आत्महत्या और इससे जुड़ा उनका लाइव वीडियो सामने आने के बाद कई परिजन भी दुख प्रकट करने गुमला पहुंचे थे.
सत्ता-विपक्ष के कई नेता पहुंचे, पिता ने न्याय की मांग की
निशा भगत का शव गुमला पहुंचने पर शनिवार को सत्ता पक्ष व विपक्ष के कई नेताओं का गुमला शहर के डीएसपी रोड स्थित उनके आवास पर आना- जाना लगा रहा. पूर्व मुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री मधुकोडा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, गुमला विधायक भूषण तिर्की, जिप अध्यक्ष किरण माला बाड़ा, नप अध्यक्ष शकुंतला उरांव, पूर्व विधायक कमलेश उरांव सहित कई नेताओं ने निशा भगत के घर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और परिवार के शोक संतप्त लोगों से मिलकर ढांढस बंधाया.
इस मौके पर बाबूलाल मरांडी ने गंभीर आरोप हुए कहा कि निशा भगत की मौत कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि जमीन को लेकर लंबे समय से चल रहे संघर्ष और दबाव का परिणाम है. निशा भगत ने आदिवासियों की जमीन बचाने के लिए लगातार संघर्ष किया. चार महीने पहले उन्होंने थाने में अपने मामले को लेकर शिकायत भी दी थी, लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की. उन्होंने कहा कि निशा भगत का आखिरी वीडियो देखा है. जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा और दबाव के बारे में बताया है. उन्होंने कहा कि इस वीडियो के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. मरांडी ने मांग की कि पिठोरिया थाना प्रभारी व अजय तिर्की को गिरफ्तार किया जाए. साथ ही पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराई जाए.

मधु कोड़ा ने मांग की कि निशा भगत ने लाइव वीडियो के माध्यम से जिन लोगों का भी नाम लिया है, उन सभी लोगों की गिरफ्तार किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि निशा भगत का न्याय के लिए संघर्ष कभी रुकेगा नहीं, कभी झुकेगा नहीं. यह संघर्ष आगे भी चलता रहेगा. जब तक निशा भगत को न्याय नहीं मिल जाता, जब तक इस घटना के दोषियों को सजा नहीं मिल जाती, तब तक यह आंदोलन चलता रहेगा.
गहराई से जांच होनी चाहिए: भूषण तिर्की
गुमला विधायक भूषण तिर्की ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर कहा है कि यह घटना पूरे आदिवासी समाज को हिला देने वाली है. झारखंड की आदिवासी बेटी के साथ इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि अगर किसी पर आरोप लग रहा है, तो इसकी जांच होनी चाहिए. और गहराई से जांच होनी चाहिए. खूंटी से जेएमएम के विधायक रामसूर्य मुंडा ने भी निशा के परिजनों से मुलाकात की. मुंडा ने निशा की मौत को दुखद बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.
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