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पटना : NMCH के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल, कोरोना मरीजों की बढ़ी परेशानी

 

Patna :  पटना NMCH में जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गये है. डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट और तोड़फोड़ के विरोध में कार्य बहिष्कार का फैसला लिया है. कोरोना महामारी के बीच डॉक्टरों का हड़ताल पर जाने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बता दें कि पिछले 7 दिनों में जूनियर डॉक्टरों ने  3 बार कार्य बहिष्कार किया है. जिसका हरजाना कोविड मरीजों को चुकाना पड़ रहा है.

काम पर वापस लौटने के लिए डॉक्टरों ने रखी शर्त

बिहार में बेकाबू हो रहे कोरोना मामलों के बीच डॉक्टरों का हड़ताल पर जाना सरकार के लिए परेशानी का सबक बना हुआ है. कोरोना मरीजों के परिजनों के द्वारा लगातार मारपीट और तोड़फोड़ की घटना से परेशान डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार का फैसला लिया है. जूनियर डॉक्टरों ने काम पर वापस लौटने के लिए सरकार और विभाग के सामने कई शर्तें रखी है. डॉक्टरों ने कहा है कि जबतक उनकी शर्त नहीं मानी जायेगा. वो अपने काम पर वापस नहीं लौटेंगे.

संसाधनों और मैन पावर की कमी की वजह से इलाज में दिक्कत आती है

इस संबंध में एनएमसीएच के जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के मेंबर डॉक्टर रामचंद्र ने बताया कि मांग पूरी होने तक जूनियर डॉक्टर काम का बहिष्कार करेंगे. डॉक्टर रामचंद्र ने बताया कि " संसाधनों और मैन पावर की कमी की वजह से इलाज में दिक्कत आती है, मरीजों की मौत होती है, जिसके बाद मृतक के परिजन डॉक्टरों के साथ बदसलूकी करते हैं. ऐसे में जब तक कमियों को पूरा नहीं किया जाएगा, ऐसी घटनाएं होती रहेंगी. मैन पावर की कमी और डॉक्टरों में तेजी फैल रहे संक्रमण की स्थिति में हम 150 से अधिक बेड संभालने की क्षमता नहीं रखते हैं."

इन पांच बिंदुओं पर रखी मांग 

  • एमबीबीएस एग्जाम पोस्टपोन होने की वजह से 150 इन्टर्नस नहीं आए हैं, जिससे मैनपावर की कमी हो गई है, ऐसे में 150 नॉन एकेडमिक जेआर को एनएमसीएच में तैनात किया जाए. पीएमसीएच के सीनियर रेजिडेंट और अस्सिटेंट प्रोफेसर, मेडिसिन और एनेस्थीसिया एक्सपर्ट्स की भी प्रतिनियुक्त किया जाए.
  • दूसरे सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए बेड बढ़ाई जाए. जिसे अस्पताल में मरीजों की संख्या में थोड़ी कमी आ सके.
  • वार्ड के अंदर मरीजों के अटेंडेंट्स की एंट्री पर रोक लगाया जाये. वार्ड बॉय भी नियुक्त हो जिसे मरीजों का अच्छी तरह से ख्याल रखा जा सके. नर्स भी बढ़ाया जाये.
  • अस्पताल परिसर के अंदर पैरामिलिट्री फ़ोर्स की प्रतिनियुक्त की जाये.
  • जिन लोगों ने डॉक्टरों के साथ बदसलूकी की उनके खिलाफ कार्रवाई की जाये.
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