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जान बचाने वाले डॉक्टर के परिवार को ही न्याय नहीं, चतरा विमान हादसे पर सिस्टम की चुप्पी उजागर

कोविड काल में हजारों लोगों की जान बचाने वाले डॉक्टर विकास गुप्ता के परिवार की हालत आज बहुत खराब है. उनके पिता बजरंगी गुप्ता ने आज प्रेस वार्ता कर अपनी पीड़ा बताई. उन्होंने कहा कि उनका बेटा लोगों की जान बचाता था, लेकिन आज उसके परिवार को ही न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है.
 
संवाददाता सम्मेलान में डॉ विकास गुप्ता के पिता बजरंगी गुप्ता व डॉ पार्थ पारितोष.

Ranchi : चतरा में हुई विमान दुर्घटना यानी एयर एम्बुलेंस क्रैश को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो सही जांच शुरू हुई है और न ही पीड़ित परिवार को कोई ठोस मदद मिली है. इस घटना ने सिस्टम की लापरवाही और सरकार के वादों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

 

कोविड काल में हजारों लोगों की जान बचाने वाले डॉक्टर विकास गुप्ता के परिवार की हालत आज बहुत खराब है. उनके पिता बजरंगी गुप्ता ने आज प्रेस वार्ता कर अपनी पीड़ा बताई. उन्होंने कहा कि उनका बेटा लोगों की जान बचाता था, लेकिन आज उसके परिवार को ही न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है.

 

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डॉ विकास गुप्ता की फाइल फोटो.

प्रेस वार्ता में आजसू डॉक्टर एसोसिएशन के रांची जिला उपाध्यक्ष डॉक्टर पार्थ पारितोष भी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि हादसे के महीनों बीत जाने के बाद भी अभी तक कोई आधिकारिक जांच शुरू नहीं हुई है. न कोई जांच टीम बनी है और न ही किसी दोषी पर कार्रवाई की गई है.

 

उन्होंने यह भी बताया कि जिस विमान से यह एयर एम्बुलेंस सेवा दी जा रही थी, वह करीब 40 साल पुराना था. सबसे बड़ी बात यह है कि उस विमान में ब्लैक बॉक्स तक नहीं था. ऐसे में सवाल उठता है कि इतने पुराने और असुरक्षित विमान का इस्तेमाल क्यों किया गया. यह भी कहा गया कि इसी तरह के विमानों से मंत्रियों को भी एयरलिफ्ट किया जाता है, फिर सुरक्षा के नियमों की अनदेखी कैसे हुई.

 

डॉक्टर विकास गुप्ता के पिता बजरंगी गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने शोक सभा में बड़े वादे किए थे. उन्होंने कहा था कि वह परिवार के साथ खड़े रहेंगे. लेकिन आज तक न तो मंत्री ने कोई फोन किया और न ही कोई आर्थिक मदद दी गई. परिवार का कहना है कि सरकार ने उन्हें पूरी तरह से अकेला छोड़ दिया है.

 

प्रेस वार्ता में परिवार और डॉक्टरों की तरफ से कई मांगें रखी गईं. उन्होंने कहा कि डॉक्टर विकास गुप्ता के परिवार को कम से कम 5 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए. उनके 8 साल के बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार उठाए. जिस मरीज को एयरलिफ्ट करने के लिए 8 लाख रुपये लिए गए थे, वह पैसा वापस किया जाए और उसके परिवार को भी मुआवजा मिले.

 

साथ ही यह मांग की गई कि विमान की फिटनेस और उसे उड़ान की अनुमति देने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो और जो भी दोषी हों, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए. परिवार और डॉक्टरों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल संतोष गंगवार से भी मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपा. राज्यपाल ने मामले को गंभीर बताते हुए कार्रवाई का भरोसा दिया है.

 

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं और जांच शुरू नहीं हुई, तो वे आंदोलन करेंगे.

 

डॉक्टर विकास गुप्ता ने लखनऊ से लेकर रांची तक हजारों लोगों की जान बचाई थी. लेकिन आज उनके परिवार को ही न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जिससे सिस्टम और सरकार दोनों पर सवाल उठ रहे हैं.

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