Saurav Singh Ranchi : लेवी नहीं तो विकास नहीं, अपराधियों उग्रवादियों और नक्सलियों का यह कथन समय-समय पर झारखंड में चरितार्थ होता रहा है. दो दशक से अपराधी उग्रवादी और नक्सली संगठन चलने वाली विकास योजनाओं में हिस्सेदारी की मांग करते रहे हैं. लेवी नहीं मिलने पर हत्या और आगजनी की घटनाओं को लगातार">https://lagatar.in/">लगातार
अंजाम देते रहे हैं. हर बार पुलिस घटना के अनुसंधान करने और विकास योजना को पूरा कराने के लिए संवेदकों को भरोसा दिलाती रही है. कभी-कभी निर्माण स्थल पर पुलिस कैंप भी करती रही है. लेकिन मौका पाकर अपराधी और उग्रवादी सड़क निर्माण में लगे मुंशी और मजदूरों की जान से खेलते रहे हैं. मुंशी और मजदूर की हत्या के पीछे संवेदक पर दबाव बनाना और दहशत का माहौल पैदा कर ग्रामीणों को विकास योजनाओं से दूर करना रहा है.
उग्रवादी योजना की राशि के अनुरूप एक हिस्सा मांगते हैं. निर्माण कार्य में लगे कई ठेकेदार नक्सलियों से सांठगांठ कर सफलतापूर्वक काम कराकर बाहर निकल जाते हैं. लेकिन कुछ संवेदक उग्रवादियों को रंगदारी देने से इंकार कर देते हैं. जिसका अक्सर रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए नक्सलियों द्वारा वाहनों को आग के हवाले कर दिया जाता है. इस तरह की घटनाओं से निर्माण कार्य में लगी कंपनियों को करोड़ों का नुकसान होता है.
अंजाम देते रहे हैं. हर बार पुलिस घटना के अनुसंधान करने और विकास योजना को पूरा कराने के लिए संवेदकों को भरोसा दिलाती रही है. कभी-कभी निर्माण स्थल पर पुलिस कैंप भी करती रही है. लेकिन मौका पाकर अपराधी और उग्रवादी सड़क निर्माण में लगे मुंशी और मजदूरों की जान से खेलते रहे हैं. मुंशी और मजदूर की हत्या के पीछे संवेदक पर दबाव बनाना और दहशत का माहौल पैदा कर ग्रामीणों को विकास योजनाओं से दूर करना रहा है.
लेवी के लिए फैलायी जा रही दहशत
विकास योजनाओं को पूरा करने में लगी कंपनियों के बीच आपराधिक, उग्रवादी और नक्सलियों के द्वारा दहशत पैदा की जाती है. कभी काम में लगे वाहनों को जलाकर, तो कभी कंपनी के मुंशी और मजदूरों की हत्या करके दबाव बनाया जाता है और दहशत का माहौल पैदा किया जा रहा है. बीती रात चतरा के पिपरवार में उग्रवादियों ने तीन वाहनों को आग के हवाले कर दिया. इसके अलावा बीते महीने 24 जनवरी को बोकारो के गोमिया प्रखंड अंतर्गत तुलबुल पंचायत में नक्सलियों ने जमकर उत्पात मचाया था. इलाके के लुगू की तलहटी पिंडरा गांव के पास टूटी झरना के समीप नक्सलियों ने सड़क निर्माण में लगी कंपनी की एक जेसीबी और ट्रैक्टर को आग के हवाले कर दिया था. जबकि पिंडरा निवासी मुंशी रमेश मांझी को गोली मार दी थी. मुंशी की हत्या के पीछे भी लेवी की ही कहानी है.वाहनों में की जा रही है आगजनी
पुलिस मुख्यालय भी इस सच्चाई से वाकिफ है कि उग्रवादी संगठन सरकार की ओर से गांव के विकास के लिए दी जा रही योजनाओं से ही फल-फूल रहे हैं. सुदूरवर्ती ग्रामीण और जंगली इलाके में सड़क, पुल-पुलिया निर्माण, ग्रामीण विद्युतीकरण और सिंचाई योजनाओं को पूरा करने और लौह अयस्क, कोयला के अलावा बॉक्साइड खनन कार्य में लगी निर्माण कंपनियों से लगातार">https://lagatar.in/">लगातारउग्रवादी योजना की राशि के अनुरूप एक हिस्सा मांगते हैं. निर्माण कार्य में लगे कई ठेकेदार नक्सलियों से सांठगांठ कर सफलतापूर्वक काम कराकर बाहर निकल जाते हैं. लेकिन कुछ संवेदक उग्रवादियों को रंगदारी देने से इंकार कर देते हैं. जिसका अक्सर रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए नक्सलियों द्वारा वाहनों को आग के हवाले कर दिया जाता है. इस तरह की घटनाओं से निर्माण कार्य में लगी कंपनियों को करोड़ों का नुकसान होता है.
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