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पुलिस नहीं बन पाया, तो पहन ली वर्दी और हाथ में थाम लिया डंडा
बचपन से उसे पुलिस विभाग में जाने का शौक था. लेकिन वह पुलिसवाला नहीं बन पाया. इससे वह हताश जरूर हुआ, लेकिन निराश नहीं. कहीं से पुलिस की पुरानी वर्दी जुगाड़ की और साथ में डंडा भी. उसके बाद से वह ट्रैफिक संभालने लगा. विभाग में वैसे भी ट्रैफिक पुलिस का अभाव है. शहर के एक बड़े और सर्वाधिक व्यस्ततम चौक पर वह बिना ट्रेनिंग के भलीभांति वाहनों को राह दिखाता है. ऐसे में पुलिस विभाग ने भी उसकी ओर से आंखें मूंद लीं. चूंकि विभाग का काम निर्मल भलीभांति संभाल लेता है. निर्मल यह सेवा नि:शुल्क देता है. बदले में वह विभाग से कुछ नहीं लेता है. निर्मल अपने आप में मग्न रहता है और उसे यह काम कर शुकून मिलता है कि पुलिस की तरह वह भी वर्दी और लाठी के सहारे सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर रहा है. फिर वह पुलिस से कम कहां है.मर्जी से कर रहा जनसेवा, विभाग को है राहत : इंस्पेक्टर
पूछे जाने पर ट्रैफिक इंस्पेक्टर केके साह कहते हैं कि निर्मल अपनी मर्जी से जनसेवा करता है. विभाग को उससे राहत है. ट्रैफिक पुलिस से जुड़े जवान उसे स्वेच्छा से आर्थिक मदद कर देते हैं. विभाग से उसे कोई ट्रेनिंग और न ही अथोरिटी दी गई है. इसे भी पढ़ें : रांची:">https://lagatar.in/ranchi-part-of-rus-central-library-building-collapsed-one-student-died/">रांची:RU के सेंट्रल लाइब्रेरी के भवन का हिस्सा टूटकर गिरा, एक छात्र की मौत [wpse_comments_template]
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