Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

न दर्शक, न शोर ज्योति याराजी ने खाली  स्टेडियम में भारत को दिलाया गोल्ड

दक्षिण कोरिया के गुमी में 29 मई 2025 को आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत की स्टार एथलीट ज्योति याराजी ने महिला 100 मीटर बाधा दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया
Advertisement
Advertisement

Lagatar desk : दक्षिण कोरिया के गुमी में 29 मई 2025 को आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत की स्टार एथलीट ज्योति याराजी ने महिला 100 मीटर बाधा दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया. इस जीत के साथ उन्होंने अपना खिताब भी सफलतापूर्वक बचाया.

 

लगातार बारिश के कारण यह मुकाबला खाली स्टेडियम में आयोजित किया गया. चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच ज्योति ने 12.96 सेकेंड का शानदार समय निकालते हुए नया चैंपियनशिप रिकॉर्ड स्थापित किया.

 

रेस की शुरुआत में जापान की युमी तनाका और चीन की यानि वू आगे चल रही थीं, लेकिन अंतिम हर्डल्स के बाद ज्योति की जबरदस्त फिनिश ने दोनों को पीछे छोड़ दिया. इस ऐतिहासिक दौड़ का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग भावुक होकर ज्योति की जमकर सराहना कर रहे हैं.

 

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बिना दर्शकों वाले स्टेडियम में पदक समारोह के दौरान राष्ट्रगान बजते समय ज्योति याराजी की आंखें नम हो गईं. यह भावुक पल सोशल मीडिया यूजर्स को खूब छू रहा है और वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.

 

 

कौन हैं ज्योति याराजी?

 

ज्योति याराजी आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम की रहने वाली हैं. उनका जन्म 28 अगस्त 1999 को हुआ था. सीमित संसाधनों में पली-बढ़ी ज्योति के पिता सूर्यनारायण एक निजी सुरक्षा गार्ड हैं, जबकि उनकी मां कुमारी घरेलू सहायिका के रूप में काम करती हैं.

 

साल 2015 में आंध्र प्रदेश इंटर-डिस्ट्रिक्ट मीट में स्वर्ण पदक जीतकर ज्योति पहली बार सुर्खियों में आई. इसके बाद 2016 में उन्होंने ओलंपियन और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच एन. रमेश के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने के लिए हैदराबाद स्थित साई सेंटर का रुख किया.

 

2025 में बनाया नया रिकॉर्ड

 

साल 2025 में ज्योति ने पहली बार 13 सेकेंड से कम समय में 100 मीटर बाधा दौड़ पूरी की. पेरिस ओलंपिक में अपनाई गई जोखिम भरी सात-स्ट्राइड तकनीक को छोड़कर उन्होंने दोबारा आठ-स्ट्राइड तकनीक अपनाई, जिससे चोट का खतरा कम हुआ और उनकी रेस की लय बेहतर हुई. उनके कोच जेम्स हिलियर ने ज्योति को “क्लास एक्ट” बताते हुए कहा कि उन्होंने रेस प्लान को बिल्कुल सटीक तरीके से लागू किया.

 

संघर्ष से शिखर तक का सफर

ज्योति का सफर गांव के कच्चे ट्रैक से शुरू होकर एशिया के शीर्ष मंच तक पहुंचा है. 2017 में लॉन्ग जंप छोड़कर हर्डल्स को अपनाने वाली ज्योति ने 2023 में अपना पहला एशियन गोल्ड मेडल जीता. 2024 में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने के बावजूद ओलंपिक में निराशा हाथ लगी, लेकिन 2025 में दमदार वापसी कर उन्होंने खुद को और मजबूत साबित किया.अब ज्योति का अगला लक्ष्य 2026 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई करना है, जिसके लिए उन्हें 12.73 सेकेंड का क्वालिफाइंग मानक पार करना होगा.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही