: सरायकेला-खरसावां जिले में भाजपा चलाएगी जनसंपर्क अभियान
गंभीर स्थिति में मरीजों को जमशेदपुर या राउरकेला जाना पड़ता है
सारंडा में सेल की किरीबुरु-मेघाहातुबुरु (लगभग एक सौ बेड क्षमता), गुवा (लगभग 50-60 बेड) एंव चिड़िया अस्पताल के अलावे टाटा स्टील की नोवामुंडी अस्पताल को छोड़ एक भी ऐसा अस्पताल नहीं है जहां चौबीस घंटे मरीजों को इलाज उपलब्ध हो सके. मुफ्त चिकित्सा सुविधा का सारा भार सेल की अस्पतालें उठाई हुई है. लेकिन यहां जांच व विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है. छोटानागरा में पच्चीस बेड का सरकारी अस्पताल बनकर तैयार है लेकिन चिकित्सकों व संसाधनों की यहां भारी कमी है. इससे यह भी लगभग मृत स्थिति में है. गंभीर स्थिति में मरीजों को जमशेदपुर या राउरकेला जाना पड़ता है लेकिन गरीब मरीज ऐसे अस्पतालों का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है. केन्द्र सरकार ने कुछ गरीबों को आयुष्मान कार्ड अवश्य दिया है लेकिन इस कार्ड के माध्यम से इलाज कराने के लिए बेहतर अस्पताल का भी क्षेत्र में होना जरूरी है. इसे भी पढ़ें :कमजोर">https://lagatar.in/due-to-weak-leadership-the-condition-of-electricity-in-the-state-is-pathetic-sudesh/">कमजोरनेतृत्व के कारण राज्य में बिजली की दयनीय स्थिति- सुदेश [wpse_comments_template]

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