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नोवामुंडी: अनिल खिरवाल की लौह अयस्क स्टॉकिंग यार्ड में माइनिंग विभाग का छापा, अधिक खनन और भंडारण का आरोप

Sukesh Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत नोवामुंडी डीवीसी निकट बांधबुरु स्थित बालाजी आयरन ओर माइंस संचालक अनिल खिरवाल के दो अलग-अलग लौह अयस्क भंडारण के ठिकाने पर आज मंगलवार को छापामारी की गई. आरोप है कि लीज खत्म होने के बाद भी माइनिंग कर अनुमति से ज्‍यादा स्टॉक किया गया है. लीज की अवधि 30 अप्रैल को ही खत्‍म हो गई थी. एक वर्ष में लगभग 75000 मीट्रिक टन लौह अयस्क खनन करने की अनुमति मिली थी. खदान प्रबंधन को प्रत्येक महीने मात्र 6.6 मीट्रिक टन लौह अयस्क खनन करना था. लेकिन विगत तीन चार महीनों में ही लाखों टन खनन कर दो तीन जगहों पर स्टॉक किया गया है. इसमें कई अधिकारी और स्थानीय दबंग लोगों की भी मिलीभगत बताई जा रही है. इसे भी पढ़ें: शेख">https://lagatar.in/sheikh-kudrat-alis-land-grab-case-fir-lodged-after-17-days-complaint-to-dgp-ig/">शेख

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दो जगहों पर की गई जांच, पूरी पड़ताल के बाद सौंपेंगे रिपोर्ट

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alt="" width="600" height="327" /> जिले के खनन विभाग से पहुंचे माइनिंग इंस्पेक्टर राजेश हांसदा व खदान कर्मचारी प्रशांत प्रधान की दो सदस्यीय अधिकारियों की टीम ने सबसे पहले नोवामुंडी बस्ती पिनाकल ट्रेडर्स के लौह अयस्क भंडारण स्थल का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान लौह अयस्क व लंप का जायजा लिया. माइनिंग विभाग से पहुंचे खदान प्रबंधक प्रशांत प्रधान ने खदान से लौह अयस्क उठाव, डिस्पैच और स्टॉक रजिस्टर देखे. विभागीय अधिकारियों ने लैब में जांच कर ग्रेडिंग के लिये पॉलिथिन में लौह अयस्क लेकर चले गए. अधिकारियों ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर बांधबुरु स्थित आयरन ओर माइंस से उठाए गए लौह अयस्क भंडारण स्थल की जांच के लिये पहुंचे हैं. फिलहाल यहां से बोकना स्थित लौह अयस्क भंडारण स्थल का जांच की जाएगी. जांच की सारी रिपोर्ट जिला कार्यालय में जमा की जाएगी. चाईबासा से पहुंची टीम ने जांच करने के पश्चात ही मामले का खुलासा करने की बात कही है.

75 हजार मीट्रिक टन लौह अयस्क ढुलाई की स्वीकृति की लीज 30 अप्रैल को खत्‍म हो गई थी

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alt="" width="600" height="307" /> ज्ञात हो कि पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा के अनिल ख़िरवाल का लौह अयस्क खदान नोवामुंडी प्रखंड के डीबीसी निकट स्थित बांधबुरु में बालाजी आयरन ओर माइंस के नाम से चलता है. खदान से लौह पत्थर खनन से लेकर इसकी ढुलाई के लिये 30 अप्रैल तक लीज मिली थी. इसके पहले इन्हें प्रत्येक वर्ष में करीब 75 हजार मीट्रिक टन लौह अयस्क ढुलाई की स्वीकृति मिली थी. इन पर खनन लीज अवधि खत्म होने के पहले पिनकल ट्रेडर्स स्टॉकिंग यार्ड जो चारदीवारी के भीतर और बाहर में स्वीकृति की मात्रा से अधिक लौह अयस्क भंडारण का आरोप है. बोकना स्थित राजश्री मिनरल स्टॉकिंग यार्ड में भी खदान से अधिक खनन कर स्टॉक करने की शिकायत है. खनन स्थल के लावा दूसरे जगह से भी फाईंस उठाव का आरोप है. इसे भी पढ़ें: झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-combined-exam-postponed-hc-seeks-answer-from-government-and-board/">झारखंड

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