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नोवामुंडी : बोनोस्ते डाकिला गोजो गीत से रोजो संक्रांति की हुई शुरुआत

 
Noamundi (Sandip Prasad) : ओड़िया समुदाय द्वारा साल का पहला पर्व रोजो संक्रांति पर्व हर्षोल्लास से मनाई गई. गुवा के विभिन्न कॉलोनियों में झूलों को फूलों से सुसज्जित कर रोजो गीत बोनोस्ते डाकिला गोजो, बोरोसोके थोरे आसीछी रोजो गीत गाकर बच्चों को झूला झूलते देखा गया. इस दौरान चावल के पाउडर से तैयार पकवानों का लुत्फ उठाते महिलाएं व बच्चे नजर आए. नारी शक्ति को समर्पित इस पर्व में तीन दिनों तक महिलाएं घर का सारा काम छोड़कर आनंद चित्त में झूला झूलने की प्रथा रही है. इस दिन धरती मां के मासिक धर्म पालन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इसे भी पढ़ें : ललित">https://lagatar.in/the-queen-who-patronized-lalit-modi-is-teaching-the-lesson-of-corruption-in-the-heroic-land-of-santhal-supriyo/">ललित

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धरती के रजस्व संपन्न होने को लेकर कृषि से संबंधित सभी कार्य तीन दिनों तक बंद रहती है. पर्व के चौथे दिन बसूमति स्नान कराया जाता है. महिलाएं एक-दूसरे को रोजो पान खिला कर हमेशा मैत्रीपूर्ण संबंध बरकरार रखने का प्रण लेती हैं. गुवा में नानक नगर, सेवा नगर, बिरसा नगर, कैलाश नगर, हिरजी हाटिंग समेत विभिन्न स्थानों पर रोजो झूला देखने को मिला. [wpse_comments_template]
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