Oslo : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास स्टोर की संयुक्त प्रेस कॉंफ्रेस के बाद नॉर्वे की पत्रकार हेला लिंग के एक पोस्ट पर बवाल मचा हुआ है. बाद में भारतीय दूतावास की प्रेस ब्रीफिंग में भारत के वरिष्ठ राजयनिक सिबी जॉर्ज की इस पत्रकार के साथ भी हेला लिंग की नोकझोंक होने की खबर सुर्खियों में है.
जानकारी के अनुसार विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने पत्रकार को लोकतंत्र, मानवाधिकार, प्रेस की आजादी पर सीख दी.
People 'misunderstand' India by reading reports by "ignorant NGOs": MEA highlights vast media landscape over question concerning human rights
— ANI Digital (@ani_digital) May 19, 2026
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मामला यह है कि इससे पूर्व पत्रकार ने हेला लिंग ने उस समय पीएम मोदी से भारत में मानवाधिकार संबंधी पूछने की कोशिश की थी, जब वे नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास स्टोर के साथ साझा बयान जारी कर रहे थे.
हेला लिंग ने नॉर्वे में प्रेस की कथित आजादी का ढिंढोरा पीटा और कहा कि नॉर्वे प्रेस की आजादी में नंबर वन है, आप(पीएम मोदी) दुनिया की आजादी में नंबर वन रहने वाले देश के पत्रकार से सवाल क्यों नहीं ले रहे हैं. इसके बाद हेला लिंग ने अपने सवाल को अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया.
I never thought I would have to write this, but I am not a foreign spy of any sort, sent out by any foreign government.
— Helle Lyng (@HelleLyngSvends) May 18, 2026
My work is journalism, primarily in Norway now.
इसके बाद भारतीय दूतावास का पोस्ट सामने आया, डियर मिस हेला लिंग दूतावास शाम 9:30 बजे होटल रैडिसन ब्लू प्लाजा में प्रधानमंत्री की यात्रा पर प्रेस ब्रीफिंग आयोजित कर रहा है. आपक वहां आकर अपने प्रश्न पूछें हार्दिक स्वागत है. इस प्रेस ब्रीफिंग में हेला लिंग सवाल पूछने पहुंची.
उन्होंने भारत के विदेश मंत्रालय से पूछा, हम अपनी(दोनों देश) साझेदार आगे बढ़ा रहे हैं. पूछा कि हम आप पर भरोसा क्यों करें, क्या आप वादा कर सकते हैं कि आपके देश में जो मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है उसे आप रोकने की कोशिश करेंगे.
इसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि उन्होंने सवाल सुन-समझ लिया है, वह इसका उत्तर देंगे. इस पर पत्रकार ने कहा, इसका जवाब फ़ौरन चाहिए. हेला लिंग की इस हठधर्मी पर भारत के सीनियर राजनयिक सिबी जॉर्ज ने भारत के इतिहास, भूगोल, दर्शन की एक लंबी जानकारी देते हुए पत्रकार को खूब सुनाया.
राजनयिक सिबी जॉर्ज जब हेला लिंग को जवाब दे रहे थे तो वह एक बार प्रेस ब्रीफिंग को छोड़कर बाहर निकल गयी., लेकिन फिर लौट कर वापस आयी. सीनियर राजनियक सिबी जॉर्ज ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि भारत की 5000 साल पुरानी सभ्यता ने दुनिया को शून्य, योग और शतरंज जैसी चीजें दी हैं.
भारत ने कोविड के समय दुनिया को वैक्सीन उपलब्ध कराई. G20 जैसे मंच का नेतृत्व किया. सिबी जॉर्ज भारत के संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि यह मौलिक अधिकारों की पूरी गारंटी देता है. कहा कि चुनाव के जरिए सरकार बदलने का अधिकार सबसे बड़ा मानवाधिकार है.
सिबी जॉर्ज ने हेला लिंग पर तंज कसते हुए कहा, कुछ लोग ignorant NGO की एक-दो रिपोर्टों के आधार पर सवाल पूछने आ जाते हैं, लेकिन भारत के विशाल पैमाने और विविधता को समझने की कोशिश नहीं करते. सिबी जॉर्ज द्वारा जवाब दिये जाने के दौरान नॉर्वे की पत्रकार टोकाटोकी करती रही.
इस पर बरसते हुए सिबी जॉर्ज ने कहा, यह मेरी प्रेस कॉन्फ़्रेंस है. आपने सवाल किया है. अब आपमें मेरा जवाब सुनने का धैर्य होना चाहिए. जॉर्ज ने कहा कि भारत का चुनावी लोकतंत्र ही समानता और मानवाधिकारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का सबसे अहम सबूत है.
पूछा कि मानवाधिकारों का सबसे अच्छा उदाहरण क्या है? इसका जवाब देते हुए कहा कि सरकार बदलने का अधिकार, वोट देने के अधिकार से बड़ा मानवाधिकार और क्या हो सकता है.भारत में यही हो रहा है.हमें इस बात पर बहुत गर्व है.
सिबी जॉर्ज ने कहा, “हम समानता में विश्वास करते हैं, हम मानवाधिकारों में विश्वास करते हैं. अगर किसी के अधिकारों का उल्लंघन होता है तो उसे अदालत जाने का अधिकार है. हमें अपने लोकतंत्र पर गर्व है.
बाद में हेला लिंग ने एक्स पर अपना बचाव करते हुए पोस्ट तिया. पत्रकारिता कभी-कभी टकराव वाली होती है. हम जवाब चाहते हैं. अगर कोई इंटरव्यू देने वाला, खासकर जिसके पास सत्ता हो, मेरे पूछे गये सवालों का जवाब नहीं देता, तो मैं बीच में टोककर ज़्यादा सटीक जवाब पाने की कोशिश करूंगी.
यही मेरा काम और फर्ज है. मुझे जवाब चाहिए, सिर्फ बातें नहीं. उन्होंने कहा कि वह किसी विदेशी सरकार की जासूस नहीं हैं.उन्हें कभी नहीं लगा था कि उन्हें इस तरह की सफाई देनी पड़ेगी. पत्रकार ने कहा कि वह नॉर्वे में पत्रकारिता का काम करती हैं और उन्होंने केवल अपने पेशे के तहत सवाल पूछे थे.
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