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रिम्स नर्सिंग कॉलेज व हॉस्टल में पानी तक नहीं, परेशान विद्यार्थियों ने निदेशक से लगाई गुहार

Ranchi : रिम्स नर्सिंग कॉलेज में पढ़ाई कर रहे बीएससी नर्सिंग के स्टूडेंट कॉलेज और हॉस्टल में व्याप्त समस्याओं को लेकर लंबे समय से परेशान हैं. यहां पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है. परेशानी जब कम नहीं हुई तो विद्यार्थियों ने एकजुटता दिखाई और रिम्स प्रशासनिक भवन पहुंचे. छात्रों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि समस्या की जानकारी वार्डन और नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल को देने के बाद भी व्यवस्था ठीक नहीं हुई है.

जब कॉलेज के फैकल्टी ने नहीं सुनी बात, तो निदेशक से लगायी गुहार

छात्र और छात्राओं ने कहा कि जब हमारे कॉलेज के लोगों ने हमारी समस्याओं को अनदेखा किया, तब हमें रिम्स निदेशक का दरवाजा खटखटाना पड़ा. पढ़ाई के लिए क्लास रूम की संख्या बहुत कम है और उसकी स्थिति भी ठीक नहीं है. ना ही पंखा चलता है और ना लाइट की व्यवस्था है. ऐसी हालत में पढ़ाई कैसे होगी? इसे पढ़ें- शाम">https://lagatar.in/evening-news-diary-20-jan-2023-jharkhand-news-updates/">शाम

की न्यूज डायरी।।20 JAN।।219 युवाओं को नियुक्ति पत्र।।सरयू के निशाने पर फिर बन्ना गुप्ता।।एनोस को हाईकोर्ट से राहत नहीं।।WFI चीफ की बढ़ी मुश्किलें।।कॉलेजियम पर तकरार जारी।।समेत कई खबरें और वीडियो।।

पीने के पानी तक की नहीं है व्यवस्था 

हॉस्टल में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है. मात्र एक वाटर प्यूरीफायर लगाया गया है. वह भी ठीक ढंग से काम नहीं करता है. हॉस्टल का कमरा भी काफी छोटा है और एक कमरे में तीन छात्र को रखा जाता है. ना टेबल है और ना ही कुर्सी. कॉलेज में कैंटीन तक की व्यवस्था नहीं है. बरसात में क्लास रूम की छत से पानी टपकता है. हॉस्टल परिसर में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं है. अंधेरे में सांप का डर रहता है.

छुट्टी मांगने पर किया जाता है बुरा बर्ताव

रिम्स प्रशासनिक भवन पहुंची छात्राओं ने कहा कि अक्सर हॉस्टल की वार्डन गाली -गलौज करती हैं. गाली की हद पार करते हुए परिवार तक पहुंच जाती हैं. क्लिनिकल का सामान (किडनी ट्रे, थंब फोर्सेप, आर्टरी फोर्सेप) खुद से खरीदना पड़ता है. बाहर भी निकलने नहीं दिया जाता है और छुट्टी मांगने पर भी बुरा बर्ताव किया जाता है.

इंटर्नशिप के दौरान मात्र 1500 रुपए का भुगतान

वहीं, एक अन्य छात्रा ने कहा कि हमें इंटर्नशिप के दौरान स्टाइपेंड में मात्र 1500 रुपये दिया जाता है. इतने कम पैसे में हमलोग फॉर्म भी नहीं भर पाते हैं. कॉलेज में किसी तरह का कोई फंड नहीं है. सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य आयोजन होने पर हमें अपने पॉकेट से पैसा देने का दबाव दिया जाता है. अभिभावक जब हॉस्टल आते हैं, तो उनके बैठने के लिए कमरा तक नहीं है. इसे भी पढ़ें – पारसनाथ">https://lagatar.in/if-parasnath-is-not-handed-over-to-tribals-indefinite-blockade-from-february-salkhan-murmu/">पारसनाथ

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क्या कहते हैं रिम्स के अधिकारी

वहीं रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ हिरेंद्र बिरुआ ने निदेशक कार्यालय के समक्ष जमे बीएससी नर्सिंग के छात्राओं को आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी समस्याओं को ठीक किया जाएगा. [wpse_comments_template]

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