आंसू ही नहीं, आदेश भी ”पी” गए अफसर
- मूसाटोली के 22 परिवारों को अन्यत्र बसाने का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिया था आदेश - - मुख्यमंत्री के आदेश के 5 माह बाद भी 22 आदिवासी परिवारों को जमीन नहीं दे सका प्रशासन - 5 महीने में आदिवासी परिवारों को दिखाई गई सिर्फ एक ही जगह जमीन - सीओ ने कहा- तीन जगह जमीन चिन्हित हुआ है, लेकिन नाम भूल गये Ranchi: पांच माह पूर्व धुर्वा स्थित मूसाटोली के 22 आदिवासी परिवारों के आशियाने स्मार्ट सिटी की राह में रोड़ा बने थे. इनमें से दो मकानों को विभाग ने 2 सितंबर 2022 को ध्वस्त भी कर दिया था. 20 अन्य मकान भी ध्वस्त किए जाने थे. लेकिन मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दरबार में पहुंच गया था. पांच सितंबर को मुख्यमंत्री ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाते हुए पहले सभी परिवारों को अन्यत्र शिफ्ट करने का आदेश दिया था. इस आदेश को अब पांच माह का समय हो चुका है लेकिन विभागीय अधिकारी अब तक इन परिवारों के लिए जमीन तक फाइनल नहीं कर सके हैं. जिन दो परिवारों के आशियाने ध्वस्त किए गए थे, उनके रहने के लिए भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था प्रशासन की ओर से नहीं की गई है. उनके आंसू भी अधिकारियों के कलेजे को नहीं पिघला सके और न ही मुख्यमंत्री के आदेश ही पीड़ितों को आशियाना दिला सके. अधिकारियों की लापरवाही से स्मार्ट सिटी की वह सड़क पांच माह से लटकी है जो इन परिवारों को शिफ्ट करने के बाद उनके आशियानों को तोड़कर बनाई जानी थी. बहरहाल, अधिकारियों की यह लापरवाही स्मार्ट सिटी पर भी ग्रहण लगा रही है.

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