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धर्म नहीं, आदिवासी के नाम पर ही सभी एकजुट हो सकते हैं : डॉ सुनिल

राष्ट्रीय आदिवासी समिट में शामिल हुए 12 राज्यों के आदिवासी बुद्धिजीवी
 हमारी पहचान इंडिया से है और इंडिया इंडीजिनस से बना है
पूरे देश में 34042 आदिवासियों के साथ अत्याचार की घटनाएं हुईं
पढ़े- लिखे आदिवासी समाज व गांव को छोड़ रहे हैं
Ranchi : सरना प्रार्थना सभा व जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के बैनर तले कटहल मोड़ स्थित ललगुटवा रिसोर्ट में दो दिवसीय राष्ट्रीय आदिवासी समिट का आयोजन किया गया. पहले दिन इसमें 12 राज्यों के आदिवासी बुद्धिजीवी और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया. इस मौके पर राजस्थान के आदिवासी एकता परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुसुम रावत ने कहा कि लोगों को आदिवासी समाज की जड़ तक जाकर समाधान करने की जरूरत है. पढ़े- लिखे आदिवासी समाज व गांव को छोड़ रहे हैं. जिससे रुढ़ीवादी प्रथा, परंपरा, संस्कृति, वेश-भूषा बदल रही है. इसे बचाने के लिए नौकरी पेशा लोगों को गांव में जाने की जरूरत है. पूर्वजों द्वारा बनाई गई देसी दवाओं के प्रयोग की जरूरत है. सम्मेलन में झारखंड, असम, गुजरात, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और ओड़िशा के आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए.

धर्म कॉलम के बारे में सोचने की जरूरत

महाराष्ट्र के डॉ सुनिल पराहड ने कहा कि धर्म के नाम पर आदिवासी कभी एकजुट नहीं हो सकता है. इसलिए आदिवासियों को एकजुट करने के लिए आदिवासी नाम जोड़ना होगा. तभी देश के 720 आदिवासी समाज एकजुट होंगे. पूर्वजों ने जल, जंगल और जमीन को लड़ कर लिया है. इसके लिए हजारों आदिवासियों ने शहादत दी. देश के नाम पर भी हमारी पहचान है. जो इंडिया का मतलब इंडीजिनस है. यह प्रचीन शब्द है और मूलवासी शब्द है. जिसे आज बदलने का प्रयास किया जा रहा है. देश में 720 आदिवासी समाज रहते हैं. भारत में 14 करोड़ आदिवासी हैं. सभी को एकजुट होकर धर्म कॉलम के बारे में सोचने की जरूरत है.मणिपुर में हुई घटना से आदिवासियों को सबक लेने की जरूरत है. आदिवासी के नाम पर ही सभी आदिवासी एकजुट हो सकते हैं.

एकजुट होकर आंदोलन करने की जरूरत

गुजरात के डॉ प्रदीप गरसिया ने कहा कि देश में 8 प्रतिशत आदिवासी आबादी है. सभी आदिवासी आज अलग- अलग रह रहे हैं. आदिवासियों को एकजुट होकर आंदोलन करने की जरूरत है. देश में 34042 आदिवासियों के साथ अत्याचार की घटना घटी है. देश में सांसद और विधायक आदिवासी मामलों में आवाज नहीं उठाते हैं. जिसके कारण आज आदिवासियों की स्थिति खराब हो रही है.

शोषण करने वाले लोगों से लड़ाई लड़ने की जरूरत

संथाल के विशिष्ट अतिथि कुमार चंद्रमार्डी ने कहा कि हम संपूर्ण तरीके से बंटे हुए हैं. अब आदिवासियों का शोषण करने वाले लोगों से लड़ाई लड़ने की जरूरत है. उनका विरोध करना होगा. खनिज संपदा, जल, जंगल और जमीन आदिवासियों के पास है. इसे लूटने के लिए देश में यूसीसी लागू करने का प्रयास किया जा रहा है.
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