80 के दशक तक यहां नाटकों का मंचन होता रहा
इस मंडली में बेचू साव, रामनंदन साव, युगल साव, किरानी सिंह,अक्षेवट साव, रामदास साव, प्रयाग साव, रामेश्वर दास, लखन दास, सूरज प्रसाद, धनेश्वर प्रसाद, रविश्वर साव, भोला शरण, रामजनम सिंह, लल्लु सिंह, भुनेश्वर साहु, नथुनी ठाकुर व मोहन दास आदि शामिल थे. इन कलाकारों के द्वारा राजा हरिशचंद्र, सुल्ताना डाकू, रामायण, महाभारत, अंधेर नगरी चौपट राजा आदि नाटकों का मंचन किया गया, जो आज भी उस दौर के लोगों के जेहन में जिंदा है. साहु ने बताया कि 80 के दशक तक यहां नाटकों का मंचन किया जाता रहा. इसके बाद सिनेमा का दौर आया.खुले मैदान में परदे पर सिनेमा दिखाया जाने लगा
बताया कि पूजा समितियों के द्वारा खुले मैदान में परदे पर सिनेमा दिखाया जाने लगा. इसमें काफी भीड़ जुटती थी. बाद में सिनेमा का स्थान आरकेस्ट्रा ने ले लिया. कोलकाता, वाराणसी, पटना, आसनसोल एवं अन्य जगहों के आरकेस्ट्रा ग्रुप यहां कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया. इन आरकेस्ट्रा में नतर्कियां आकर्षण का प्रमुख केंद्र होती है. आज भी क्षेत्र में आरकेस्ट्रा की यहां काफी डिमांड है. कई समितियों के द्वारा भगवती जागरण आदि का भी आयोजन किया जाता है. हालांकि पिछले कई सालों से श्रीरामचरित मानस नवाह्य परायण महायज्ञ समिति के द्वारा उत्तर प्रदेश के रामलीला व रासलीला मंडली को अवश्य बुलाया जा रहा है. इसे भी पढ़ें - रतन">https://lagatar.in/politics-industry-sports-and-bollywood-world-mourn-the-demise-of-ratan-tata-paid-tribute/">रतनटाटा के निधन पर राजनीति, उद्योग, खेल और बॉलीवुड जगत में शोक की लहर…दी श्रद्धांजलि [wpse_comments_template]
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