जमशेदपुर :
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- मानगो नगर निगम क्षेत्र में बड़े एवं छोटे नालों की सफाई शुरू
- स्वर्णरेखा नदी में गिरने वाले नालों में जाली लगाने का काम प्रगति पर है
- मुख्य एवं अंदर की सड़कों की मरम्मत के लिए टीम गठित
- सफाई अभियान के नोडल पदाधिकारी सिटी मैनेजर जितेन्द्र कुमार हैं.
मानगो निगम क्षेत्र में होने लगी सफाई
alt="" width="1152" height="864" /> बरसात को देखते हुए मानगो नगर निगम क्षेत्र में युद्ध स्तर पर नाली सफाई का कार्य किया जा रहा है. पिछले दिनों हुई हल्की बारिश ने निगम की सफाई अभियान की पोल खोल कर रख दी थी. इसको देखते हुए नगर निगम द्वारा सभी बड़े एवं छोटे नालों की सफाई के लिए टीम गठित की गई है. टीम के सदस्यों को मॉनसून आने से पहले सभी नालों की सफाई कर कार्यपालक पदाधिकारी को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है. इस क्रम में जवाहर नगर रोड नंबर 13 एवं रोड नंबर 14, देशबंधु लेन, उलीडीह रोड नंबर 6, हिल व्यू कॉलोनी, कल्याण विहार, पारडीह, शंकोसाई, कृष्णा नगर, मून सिटी, आजाद बस्ती, पोस्टऑफिस रोड आदि क्षेत्रों में नाली सफाई अभियान चलाया जा रहा है. वहीं कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव द्वारा नालों का निरीक्षण कर संबंधित पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिया जा रहा है व सफाईकर्मियों को लगाया जा रहा है.
चक्रधरपुर :
जलजमाव रोकने के लिए नालियों की सफाई शुरू, नालों पर बने स्लैब तोड़े गए
alt="" width="1200" height="800" /> प्रत्येक वर्ष मॉनसून के महीने में चक्रधरपुर शहर के विभिन्न गली-मोहल्लों में नालियों का पानी सड़क पर बहने लगता है. इसे देखते हुए इस वर्ष मॉनसून से पूर्व पोड़ाहाट अनुमंडल पदाधिकारी सह नगर परिषद की कार्यपालक पदाधिकारी रीना हांसदा ने तैयारियां शुरू कर दी है. इसे लेकर चक्रधरपुर शहर के विभिन्न गली-मोहल्ले में नालियों के ऊपर अतिक्रमण कर बनाये गये स्लैबों को भी तोड़ दिया गया है. नालियों के ऊपर कई लोगों ने अवैध तरीके से पक्का स्लैब का निर्माण कर नालियों को ढंक दिया था. इससे नालियों को साफ करने में नगर परिषद के कर्मचारियों को दिक्कतें होती थीं. सफाईकर्मियों द्वारा इस बारे में एसडीओ रीना हांसदा को अवगत कराये जाने के बाद यह कार्रवाई की गई. अब प्रत्येक मोहल्ले में नालियों की साफ-सफाई प्रारंभ करायी गई है. वहीं कई मोहल्ले में अब भी जेसीबी के जरिये नालियों से स्लैब हटाने का काम किया जा रहा है. बरसात के मौसम में चक्रधरपुर के थाना रोड स्थित सिस्टर निवेदिता महिला इंटर कॉलेज जाने वाले रास्ते, तम्बाकू पट्टी रोड, झुमका मोहल्ला, गुदड़ी बाजार, पवन चौक, बाटा रोड, रिटायर्ड कॉलोनी, सरफराज क्वार्टर रोड इत्यादि क्षेत्र में सबसे ज्यादा परेशानी होती है. इन रास्तों पर घुटने पर नालियों का पानी सड़क पर आ जाता है. इससे कई रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते हैं. वहीं आवाजाही में भी परेशानी होती है. इसे देखते हुए इन इलाकों में विशेषकर साफ-सफाई करायी जा रही है.
किरीबुरु :
वर्षा से पूर्व बड़ाजामदा में नाले की सफाई नहीं हुई तो फिर बाढ़ जैसी समस्या होगी
alt="" width="1200" height="800" /> बड़ाजामदा शहर की मुख्य नालियों की साफ-सफाई वर्षा से पूर्व नहीं होने की वजह से बारिश में फिर बाढ़ का खतरा बढ़ने की संभावना है. सारंडा की ऊंची पहाड़ियों से वर्षा का पानी उतर कर निचले भागों में जाता है तो अचानक सभी नदी-नाले उफान मारने लगते हैं. शहर की नालियां जाम होने की वजह से पानी नहीं निकल पाता है. इससे शहर में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है. बड़ाजामदा के लोग प्रतिवर्ष बाढ़ जैसी स्थिति का सामना करते हैं. उनके घरों में लगभग 6 से 8 फीट पानी घुस जाता है. लाखों रुपये का सामान बर्बाद होता है. बड़ाजामदा शहर के बीच से एक मुख्य कच्चा बड़ा नाला गुजरता है. इस नाले को आरसीसी नाला बनाने के लिए कई बार लोगों ने सांसद, विधायक, जिला परिषद, प्रमुख को पत्र लिखा, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला. काम आज तक नहीं हुआ. यह नाला प्रतिवर्ष जलकुम्भी, लौह चूर्ण, कचरा आदि से भरकर जाम हो जाता है. इससे पानी की निकासी नहीं हो पाती है.
बड़ाजामदा की आबादी 30 हजार से अधिक
alt="" width="717" height="779" /> बड़ाजामदा की आबादी लगभग 30 हजार से अधिक है. लेकिन बाढ़ का सबसे ज्यादा असर फुटबॉल मैदान, स्कूल, मार्केट आदि निचले क्षेत्रों में होता है. इस क्षेत्र के सैकड़ों घर प्रतिवर्ष लगभग डूब जाते हैं. एक वर्ष पूर्व स्थानीय उद्योगपतियों, सामाजिक संगठनों, सांसद, जिला परिषद, नागरिकों के संयुक्त प्रयास से बड़ाजामदा के नाला को साफ किया गया था. इसमें जेसीबी मशीन से नाला को गहरा कर साफ-सफाई की गई थी. लाखों रुपये खर्च हुये थे, लेकिन नाला पक्का नहीं होने से स्थिति पहले जैसी ही है. जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी ने कहा कि बड़ाजामदा के इस नाला का कैनाल के रूप में निर्माण डीएमएफटी फंड से कराने के लिए ग्राम सभा करवा कर विभाग व सांसद को भी पत्र दिये हैं. यह प्रोजेक्ट बड़ा है, जिसमें काफी पैसा लगेगा. पंचायत व हमारे फंड से संभव नहीं है. इसके अलावे कुछ लोगों के बीच नाला का जमीन को लेकर भी विवाद है, जिसे प्रशासनिक स्तर पर सुलझाने की जरूरत है. जिला प्रशासन को विशेष प्राथमिकता के तहत इस नाला का निर्माण हर हाल में कराने की जरूरत है.
घाटशिला :
ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था ही नहीं, नालियों में भर जाता है कचरा
alt="" width="1600" height="720" /> घाटशिला में नगर निकाय या नगरपालिका नहीं होने के कारण घाटशिला शहर में ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह खत्म हो चुकी है. वर्षों पूर्व शहर की मुख्य सड़क निर्माण के दौरान नाली का निर्माण किया गया था. इसकी साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं होने से कचरे से पूरी तरह नालियां भर चुकी हैं. मॉनसून आने के पहले पंचायत समिति सदस्य निधि से नाली मरम्मत एवं सफाई के लिए टेंडर निकाला गया. लगभग 9 लाख की लागत से कार्य शुरू कराया गया है. वह भी सिर्फ गोपालपुर स्थित शहीद दिलीप बेसरा चौक से राजस्टेट तक सफाई और मरम्मत कार्य की जा रही है. इसके अलावा शहरी क्षेत्र में कहीं भी नाली की साफ-सफाई या मरम्मत की पहल शुरू नहीं की गई है. नालियों में गंदे पानी भरा पड़ा है. बरसात के समय में बिहारी कॉलोनी घाटशिला में पूरी तरह से पानी भर जाता है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि जल निकासी के लिए आज तक कोई व्यवस्था की ही नहीं गई है. ग्रामीण क्षेत्र में तो ड्रेनेज सिस्टम की बात करना ही बेमानी है. वहीं पंचायत में फंड की समस्या है.
जामताड़ा :
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शहर को तीन जोन में बांट कर करायी जा रही नालियों की सफाई
15 जून तक मॉनसून के सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है. मॉनसून में बारिश होने से जलजमाव नहीं हो और गंदगी न लगे इसके लिए तैयारी जोरों पर है. इस संबंध में नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि बरसात के आगमन से पूर्व नगर पंचायत क्षेत्र में साफ-सफाई को लेकर पूरे शहर को तीन जोन में बांटा गया है. चार-पांच वार्डों को मिलाकर प्रत्येक जोन का गठन किया गया है. सफाईकर्मी नालियों की साफ-सफाई में जुट गए हैं. नालियों में जमा गाद व कीचड़ को निकाला जा रहा है. अक्सर प्लास्टिक व थर्मोकोल के प्लेट व पत्तल के कारण नालियां जाम होती हैं. नालियों में प्लास्टिक जमा न हो इसके लिए नालियों को ढका जा रहा है. कुछ नालियों को ढका जा चुका है, कुछ नालियां अभी ढकना बाकी है. जो नालियां ढकी नहीं गई है उसे भी ढक दिया जाएगा. इसके अलावा कुछ नालियां निर्माणाधीन है. निर्माण कार्य पूरा होते ही उसे भी ढक दिया जाएगा. मॉनसून को देखते हुए साफ-सफाई की विशेष योजना तैयार की गई है.पाकुड़ :
मॉनसून सिर पर,पहले चरण में कुछ नालों की सफाई कराई गई
alt="" width="1156" height="868" /> अमूमन शहर की सरकार बरसात पूर्व बडे-बड़े दावे करती है, पर वक्त पर हकीकत खुद बयां हो जाती है. मॉनसून से निपटने को लेकर विभाग की सक्रियता नगण्य है. पहले जनप्रतिनिधि रहते थे तो वे अपने स्तर से अपने क्षेत्र पर ध्यान देते थे. पर अब सरकारी अधिकारी कितना कारगार होते है. यह वक्त के गर्भ में है. मॉनसून में होने वाले परेशानियों को लेकर नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी कोशलेस यादव ने बताया कि मॉनसून आने से पहले बड़े नाले की सफाई करवाई जा चुकी है. अन्य नालियों की सफाई 15 दिनों के अंदर करवा दी जाएगी. मॉनसून प्रारंभ होने के उपरांत कीटनाशक दवाई का छिड़काव कराया जाएगा. हालांकि शत-प्रतिशत नाली का जीर्णोद्धार नहीं हुआ है. छूटे हुए नाली निर्माण को लेकर नगर विकास विभाग को प्रस्ताव भेजी जा चुकी है. शहर की सफाई के लिए आकांक्षा एनजीओ व नगर परिषद से दिन में दो बार शहर की सफाई की जाती है. गंदे नाली का पानी सड़क पर बहने की संभावना नहीं है. क्योंकि क्षेत्र के सभी नालियों का निर्माण व जीर्णोद्धार कराया जा चुका है. परंतु नाली सड़क से ऊंची है. जिसको लेकर वर्षा के दिनों में सड़क का पानी नाली में न जाकर वहीं जमा रह जाती है. जिसके कारण समस्याएं होती है. इस पर ध्यान दिया जा रहा है.
आदित्यपुर :
तैयारी में जुटा नगर निगम
alt="" width="1024" height="768" /> आदित्यपुर नगर निगम मॉनसून की बारिश और नदी के तटीय इलाकों में होने वाली बाढ़ की समस्या को देखते हुए अभी से ही तैयारी में जुटा हुआ है. यहां नालों की सफाई और जल जमाव वाले क्षेत्र में विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है. नगर निगम हर वर्ष बरसात के दिनों में होने वाले जल जमाव व तटीय इलाकों की बाढ़ को देखते हुए अप्रैल से ही तैयारी में जुटा है. यह जानकारी नगर निगम के प्रशासक और अपर नगर आयुक्त गिरिजा शंकर प्रसाद ने दी.
क्या है तैयारी
- तटीय इलाकों के वार्डों से होकर गुजरने वाली बड़े नालों की सफाई विशेष अभियान चलाकर की जा रही है.
- तटीय इलाकों के स्कूल और सामुदायिक भवनों को बतौर आश्रय गृह के रूप में चिन्हित किया गया है. ऐसे 15 आश्रय गृह चिन्हित किए गए हैं.
- नगर निगम में सफाई का कार्य करने वाली एजेंसियों को अपने-अपने क्षेत्र के वार्डों के बड़े नालों की सफाई के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दे दिया गया है.
- तटीय इलाकों की बस्तियों में रहने वाले गोताखोरों के नाम नगर निगम में सूचीबद्ध कर लिया गया है.
- जिला प्रशासन के साथ तालमेल स्थापित कर बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री उपलब्ध कराने की पहल जारी है.
- नदी के किनारे रहने वाले लोगों को चेतावनी दे दी गई है कि वे बाढ़ की आशंका के मद्देनजर आश्रय गृह में जाने को तैयार रहें.
- हर वर्ष की तरह बाढ़ के दौरान जियाडा में बनने वाले राहत कंट्रोल रूम पूर्व से चिन्हित है.
- आम लोगों को बाढ़ के दौरान मदद के लिए पदाधिकारियों के नाम उपलब्ध करा दिये गए हैं, जिन्हें वे फोन से सूचना देकर मदद ले सकते हैं.
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क्या कहते हैं प्रशासक
आदित्यपुर नगर निगम के प्रशासक सह अपर नगर आयुक्त गिरिजा शंकर प्रसाद कहते हैं कि नगर निगम आदित्यपुर का नदी क्षेत्र का तटीय इलाकों में हर वर्ष ओडिशा के डैम से छोड़े जाने वाले पानी की वजह से यहां बाढ़ की स्थिति बनती है जो बमुश्किल 24 घंटे की होती है. इसी दौरान लोगों के जानमाल की क्षति होती है. इससे निपटने के लिए नगर निगम जिला प्रशासन के साथ मिलकर योजना बनाती है. इसकी तैयारी पूरी की जा रही है.हजारीबाग :
बरसात में सड़कों पर भर जाता है पानी
[caption id="attachment_653408" align="aligncenter" width="867"]alt="" width="867" height="1156" /> सफाईकर्मियों के भरोसे नगर निगम[/caption] नगर की सफाई नगर निगम की होती है. इसके लिए बरसात के पूर्व ही सफाई की जाती है, ताकि बारिश के समय दिक्कत नहीं हो. काम आसानी से हो सके. जब बारिश आती है तो कई जगह नालियों का गंदा पानी सड़क पर आ जाता है. ऐसे में आवागमन बाधित होता है. लोगों के लिए सड़क से गुजरना मुश्किल होता है. इसके लिए किसी तरह की पुख्ता तैयारी नहीं दिखाई दे रही है.मॉनसून के मद्देनजर हजारीबाग नगर निगम उपलब्ध संसाधनों के भरोसे है. फिलहाल सरकार से कोई फंड नहीं है. टैक्स से आयी राशि से नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है. नगर निगम से हाल में नालियों की सफाई के लिए कोई टेंडर नहीं निकाला गया है और न ही कोई योजनाएं आयी हैं.
घरों में घुस जाता है पानी
वैसे कुछ जगहों पर ड्रेनेज और नालियों की सफाई में कर्मी लगे हुए हैं. कई जगहों की स्थिति काफी खराब है. हजारीबाग के ओकनी तालाब रोड, बड़ा बाजार मालवीय मार्ग, शिवपुरी, रामनगर, पगमिल फ्रेंड्स कॉलोनी, कुम्हारटोली, खीरगांव आदि इलाके में बरसात में नालियों का नर्क सड़क पर आ जाता है. ऐसे समय में हालात काफी खराब हो जाते हैं. लोगों का जीना दुभर हो जाता है. जो इन इलाकों में रहते हैं, वे पानी के गुजरने का इंतजार करते रहते हैं. जब समस्या काफी बढ़ जात है तब सफाई का काम होता है, लेकिन तब तक काफी देर हो जाती है. मंडई में सड़क ऊपर होने से बरसात का पानी घरों में घुस जाता है.आम आदमी को भी सहयोग करने की जरूरत हैः प्रेरणा
नगर आयुक्त प्रेरणा दीक्षित कहती हैं कि इसमें आम आदमी को भी सहयोग करने की जरूरत है. सफाईकर्मी नालियों में घुसकर काम करते हैं. आम आदमी को चाहिए कि नालियों को जाम होने से बचाएं. इस पर उन्हें भी ध्यान देना चाहिए. उसमें कूड़ा-कचरा नहीं डालना चाहिए.. हर वार्ड में सफाईकर्मी जाते हैं. कचरा नालियों में नहीं फेंकें. उसे इकट्ठा कर उन्हें दें. इससे सभी को काम में सहुलियत होगी. कहीं कचरे की समस्या नहीं रहेगी.चाकुलिया :
नगर पंचायत में कचरा है प्रमुख समस्या
alt="" width="720" height="298" /> बारिश के आते ही जलजमाव की समस्या शुरू हो जाती है. कई जगहों पर कचरे का अंबार लग जाता है. इससे पानी पास होने में रुकावट होती है. इससे आगे का रास्ता जाम होता है. चाकुलिया में कई जगहों पर नारकीय स्थिति हो जाती है. रेलवे लाइन के किनारे वाले इलाके में भारी जलजमाव होता है. इससे वहां के लोगों के लिए जीना दुभर हो जाता है. कई दिनों तक पानी जमा रहता है. ऐसी ही समस्या स्वर्णरेखा नहर के पास होती है, जहां नालियों का पानी तालाब में तब्दील हो जाता है. ऐसे में उस रास्ते से गुजरना मुश्किल होता है. लोगों से बात की तो उन्होंने कहा कि अभी से ही इस पर ध्यान दिया जाएगा तो बारिश में परेशानी नहीं होगी. लेकिन अभी कुछ नहीं किया जाता है.
विभिन्न तालाबों में बह कर जाता है नालियों का पानी
- चाकुलिया नगर पंचायत क्षेत्र में नालियों के गंदे पानी और कचरे का जमाव सबसे बड़ी समस्या है.
- नगर पंचायत के 12 वार्ड में कई जगहों पर गंदा पानी और कचरे का जमाव तालाब का रूप ले चुका है.
- वार्ड नंबर 10 में बाजपेई नगर के पास रेलवे लाइन के किनारे जल का जमाव है.
- वार्ड नंबर एक के कमारीगोड़ा के पास स्वर्णरेखा नहर के पास नालियों का पानी तालाब के रूप में तब्दील हो गया है.
- वार्ड नंबर 3, 4 और 5 का पानी नामोपाड़ा और गोड़गड़िया के पास खेत में जमा है.
- वार्ड नंबर 8 और 9 के नालियों पानी और कचरा खेत में बहता है.
- ड्रेनेज सिस्टम नहीं होने के कारण नालियों का पानी विभिन्न तालाबों और गंधरूपी नदी में बरसात के मौसम में बह कर जाता है.
- नगर पंचायत में नालियों का निर्माण किया गया है. कई जगहों पर नालियां कचरे से जाम हो गई है.
- बरसात में पश्चिमी रेलवे फाटक के पास बने रेलवे के नाला का पानी और कचरा सड़कों पर आ जाता है.
- नगर पंचायत प्रशासन द्वारा बरसात के मद्देनजर नालियों की सफाई की जा रही है.
- सिटी मैनेजर मोनीस सलाम ने बताया कि बरसात के पूर्व नालियों की सफाई करने की योजना है.
लातेहार :
कचरे से जाम नालियों की सफाई शुरू हुई
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