
Vinay bharat
हमने कभी सोचा था कि इस विशाल धरती पर मुट्ठी भर सिरफिरे, जीवन में सच्चे प्रेम से चुके नारसिस्ट्स (narcissists), नर पिशाची क्रोनी कैपिटलिस्टस (crony capitalists) अगर दुनिया को मुट्ठी में कर सत्ता शीर्ष (power centres) पर बैठ जाएं, तो उनके किए गए दुष्कर्म का पाप भारत में आपके मोहल्ले तक, गैस की लंबी कतारों के रूप में लौटकर आयेगा! फिलहाल, आगे न जाने क्या-क्या देखना बाकी होगा. हर चीज की कीमत बढ़ेगी. सिर्फ इंसान की कीमतों में बेतहाशा गिरावट होगी.
इसलिए मैं कहता हूं, कर्म का सिद्धांत तब तक अधूरा है, जब तक हम सामूहिक समाजिक कर्म का आकलन नहीं करते. हम दिन भर गरीबों को रोटी खिलाते रहे, चिंटियों को आटा चीनी देते रहे, चोटिल कुत्ते की देखभाल करते रहे, पर जब हमारे समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के साथ अन्याय हुआ, हमारे टैक्स के पैसे का लाभ उनतक नहीं पहुंचा, हम चुप रहे. जब उन तक अस्पताल, स्कूल नहीं पहुंचा, हम चुप रहे.
अब मिडिल क्लास को आहुति देने की बारी है. ये मौन रहने का कर्म लौट कर आ रहा है. इन सेल्फ सेंटर्ड (self-centred) की भव्यता को ईश्वरीय मान कर हमारे द्वारा ओढ़ी गयी चुप्पी का हिसाब अब वक्त ले रहा.
अब भोगिये...
मुझ जैसे बहुत सारे लोगों को हमेशा फक्र रहेगा कि जब-जब व्हिसल (whistle) बजाने की बारी आयी, तब-तब चौकीदारी की है.
डिस्क्लेमर : लेखक डीएसपीएमयू के प्रोफेसर हैं और ये इनके निजी विचार हैं....
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