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अब 20 नवंबर को 38 सीटों पर महासंग्राम, जिसने मारी बाजी, मिलेगी सत्ता की चाबी

Ranchi: झारखंड विधानसभा चुनाव के दूसरा चरण के लिए 20 नवंबर को वोटिंग होगी. इस चरण में 38 सीटों पर जिसने भी बाजी मारी, उसे ही सत्ता की चाबी मिलेगी. दूसरे चरण के चुनाव में सीएम हेमंत सोरेन, स्पीकर रवींद्र नाथ महतो, नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी, पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी, सुदेश महतो, कल्पना सोरेन सहित चार कैबिनेट मंत्री इरफान अंसारी, हफीजुल हसन, दीपिका पांडेय सिंह और बेबी देवी की किस्मत का फैसला होगा. वहीं 11 पूर्व मंत्री स्टीफन मरांडी, हेमलाल मुर्मू, बसंत सोरेन, लुईस मरांडी, बादल पत्रलेख, रंधीर सिंह, सुरेश पासवान, प्रदीप यादव, जेपी पटेल, मथुरा महतो और जलेश्वर महतो की भी प्रतिष्ठा दांव पर है. 38 सीटों के लिए कुल 528 उम्मीदवार मैदान में हैं. इसमें 472 पुरूष और 55 महिला उम्मीदवार हैं. एक थर्ड जेंडर उम्मीदवार भी चुनावी अखाड़े में है. राष्ट्रीय दल से 73 प्रत्याशी हैं, जिनमें 60 पुरुष और 13 महिलाएं हैं. मान्यता प्राप्त राज्यस्तरीय झारखंड की पार्टियों के 28 उम्मीदवार भी चुनावी रण में हैं. इसमें 23 पुरुष और पांच महिला उम्मीदवार शामिल हैं. निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या 257 है. इसे भी पढ़ें -झारखंड">https://lagatar.in/only-28-percent-of-jharkhand-police-officers-and-personnel-are-trained-to-fight-naxalites/">झारखंड

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जानिए सीटों का सियासी समीकरण

लोबिन के लिए कमल खिलाना चुनौती झामुमो से भाजपा में गए लोबिन के लिए बोरियो सीट से कमल खिलाने की चुनौती है. इस पर लोबिन का मुकाबला झामुमो के धनंजय सोरेन से है. पिछले चुनाव में लोबिन ने झामुमो की टिकट पर जीत हासिल की थी. लोकसभा चुनाव में लोबिन ने निर्दलीय चुनाव लड़कर बोरियो सीट से 14 हजार वोट हासिल किए थे. इस सीट में तीसरा कोण जेएलकेएम के उम्मीदवार सूर्यनारायण हांसदा बना रहे हैं. हॉट सीट है बरहेट बरहेट को हॉट सीट माना जा रहा है. इस सीट से खुद सीएम हेमंत सोरेन हैट्रिक लगाने की जुगत में है. इस बार हेमंत के सामने बीजेपी के उम्मीदवार गमालियेल हेंब्रम हैं. गमालियल पिछली बार आजसू की टिकट पर चुनाव लड़कर सिर्फ 2500 वोट ही हासिल किया था. बरहेट झामुमो का गढ़ रहा है. धनवार सीट पर बाबूलाल मरांडी की प्रतिष्ठा दांव पर धनवार विधानसभा सीट पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की प्रतिष्ठा दांव पर है. वर्ष 2019 के चुनाव में बाबूलाल मरांडी ने झाविमो टिकट पर जीत हासिल की. लेकिन इस बार वो फिर से बीजेपी उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में है. धनवार में जेएमएम और माले के बीच दोस्ताना संघर्ष है. जेएमएम ने यहां से पूर्व विधायक निजामुद्दीन अंसारी को चुनाव मैदान में उतारा है. जबकि माले के पूर्व विधायक राजकुमार यादव भी चुनाव मैदान में हैं. जबकि निर्दलीय निरंजन राय भी मुकाबले को बहुकोणीय बनाने के प्रयास में जुटे हैं. अनंत ओझा हैट्रिक लगाने की जुगत में राजमहल सीट में बीजेपी और झामुमो के बीच नेक टू नेक फाइट की संभावना है. इस सीट से बीजेपी के अनंत ओझा हैट्रिक लगाने की जुगत में हैं. 2014 और 2019 में अनंत ओझा ने इस सीट से जीत हासिल की थी. इसपर जेएमएम के एमटी राजा के साथ उनकी कांटे की टक्कर होती नजर आ रही है. सिल्ली में त्रिकोणीय संघर्ष के आसार इस बार सिल्ली पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं. आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो का मुकाबला झामुमो के अमित महतो से है. वहीं जेएलकेएम उम्मीदवार देवेंद्र नाथ महतो तीसरा कोण बना रहे हैं. लोकसभा चुनाव में देवेंद्रनाथ महतो ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई थी. खिजरी में कांग्रेस और बीजेपी के बीच नेक टू नेक फाइट खिजरी विधानसभा सीट पर कांग्रेस के राजेश कच्छप और बीजेपी के रामकुमार पाहन के बीच नेक टू नेक फाइट है. 2019 में राजेश कच्छप को यहां बड़ी जीत मिली थी. इससे पहले भी कांग्रेस के सावना लकड़ा यहां से कई बार चुनाव जीत चुके हैं. वहीं बीजेपी के रामकुमार पाहन ने भी 2014 में इस सीट से जीत हासिल की थी. हेमलाल मुर्मू के लिए बड़ी चुनौती लिट्टीपाड़ा विधानसभा सीट से झामुमो ने इस बार हेमलाल मुर्मू पर दांव खेला है. वहीं बीजेपी ने बाबूधन मुर्मू को मैदान में उतारा है. वर्ष 2019 के चुनाव में इस सीट से झामुमो के दिनेश विलियम मरांडी ने जीत हासिल की थी. लेकिन जेएमएम से टिकट कटने के बाद दिनेश विलियम मरांडी अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. दिनेश विलियम मरांडी के पिता साइमन मरांडी और मां सुशीला हांसदा भी इस सीट से 7 बार चुनाव जीत चुकी हैं. पाकुड़ सीट पर कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर पाकुड़ सीट कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है. 2019 के चुनाव में पाकुड़ से कांग्रेस के आलमगीर आलम ने जीत हासिल की थी. लेकिन इस बार के चुनाव में आलमगीर आलम चुनाव मैदान में नहीं हैं. ईडी ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया है और पिछले कई महीनों से जेल में बंद है. ऐसे में कांग्रेस ने उनकी पत्नी निशात आलम को चुनाव मैदान में उतारा है. जबकि एनडीए की ओर से इस सीट से आजसू पार्टी के अजहर इस्लाम चुनाव मैदान में है. जबकि समाजवादी पार्टी से पूर्व विधायक अकील अख्तर मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं. महेशपुर रहा है झामुमो का परंपरागत किला महेशपुर विधानसभा सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता स्टीफन मरांडी चुनाव मैदान में हैं. वर्ष 2019 के चुनाव में भी स्टीफन मरांडी इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं. इस बार बीजेपी ने नवीन हेंब्रम को चुनाव मैदान में उतारा है. महेशपुर सीट परंपरागत रूप से जेएमएम का किला रहा है. इरफान और सीता आमने-सामने जामताड़ा विधानसभा सीट पर कांग्रेस के इरफान अंसारी और बीजेपी की सीता सोरेन आमने-सामने हैं. वर्ष 2014 और 2019 के चुनाव में इरफान अंसारी ने इस सीट पर जीत हासिल की. जबकि जेएमएम छोड़ने के बाद सीता सोरेन इस बार जामा छोड़ कर बीजेपी टिकट पर जामताड़ा से चुनाव मैदान में हैं. सभी की नजरें इस सीट पर टिकीं हुई हैं. आलोक सोरेन के लिए पिता की विरासत संभालना चुनौती शिकारीपाड़ा विधानसभा सीट से जेएमएम ने इस बार सांसद नलिन सोरेन के पुत्र आलोक सोरेन को मैदान में उतारा है. जबकि उनके सामने बीजेपी के पारितोष सोरेन मैदान में है. शिकारीपाड़ा विधानसभा सीट से जेएमएम के नलिन सोरेन सात बार चुनाव जीत चुके हैं, इस बार लोकसभा चुनाव में नलिन सोरेन को जीत मिली, जिसके बाद उन्होंने अपने पुत्र आलोक को चुनाव मैदान में उतारा है. नाला में स्पीकर रवींद्रनाथ महतो को मिल रही कड़ी चुनौती नाला विधानसभा में जेएमएम के रबिन्द्रनाथ महतो को बीजेपी के माधव चंद्र महतो चुनौती दे रहे हैं. रबिन्द्रनाथ महतो ने वर्ष 2014 और 2019 में लगातार दो बार जीत हासिल की. इससे पहले भी वो इस सीट से एक बार चुनाव जीत चुके है. 2019 में विजयी होने के बाद उन्हें स्पीकर बनाया गया. इस चुनाव में बीजेपी के माधवचंद्र महतो से उन्हें कड़ी चुनौती मिल रही है. जामा में लुईस मरांडी की अग्निपरीक्षा जामा विधानसभा सीट पर झामुमो की लुईस मरांडी के लिए अग्निपरीक्षा है. इस सीट से तीन बार की विधायक रहीं सीता सोरेन की जगह जेएमएम ने अब डॉ. लुईस मरांडी को उम्मीदवार बनाया है. लुईस मरांडी विधानसभा चुनाव में दुमका सीट से टिकट नहीं मिलने पर बीजेपी छोड़ कर जेएमएम में शामिल हुईं. वहीं बीजेपी ने एक बार फिर से सुरेश मुर्मू को उम्मीदवार बनाया है. बादल पत्रलेख की प्रतिष्ठा दांव पर जरमुंडी में कांग्रेस प्रत्याशी बादल और बीजेपी के देवेंद्र कुंवर की प्रतिष्ठा दांव पर है. वर्ष 2014 और 2019 के चुनाव में बादल ने यहां से जीत हासिल की थी. वहीं देवेंद्र कुंवर भी इस सीट से दो बार चुनाव जीत चुके हैं. दोनों प्रतिद्वंदी इस बार अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं. हफीजुल के लिए कठिन डगर मधुपुर विधानसभा सीट से जेएमएम प्रत्याशी और मंत्री हफीजुल हसन का इस बार बीजेपी के गंगा नारायण सिंह से मुकाबला है. 2022 के उपचुनाव में भी हफीजुल को गंगा नारायण ने कड़ी चुनौती दी. वहीं इस सीट से हफीजुल हसन के पिता हाजी हुसैन अंसारी भी कई बार विधायक रह चुके हैं. सारठ में झामुमो और बीजेपी के बीच महामुकाबला सारठ विधानसभा सीट पर जेएमएम ने इस बार उदय शंकर सिंह उर्फ चुन्ना सिंह को उम्मीदवार बनाया है. चुन्ना सिंह विभिन्न दलों के टिकट पर और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अब तक चार बार जीत हासिल कर चुके हैं. जबकि रणधीर सिंह को 2014 और 2019 में जीत मिली. एक बार फिर दोनों पुराने प्रतिद्वंदी चुनाव मैदान में हैं. देवघर में राद और बीजेपी आमने-सामने देवघर विधानसभा सीट पर इस बार आरजेडी के सुरेश पासवान और बीजेपी के नारायण दास के बीच मुकाबला है. नारायण दास ने बीजेपी उम्मीदवार के रूप में इस सीट से 2014 और 2019 में जीत हासिल की. वहीं सुरेश पासवान भी इस सीट से कई बार चुनाव जीत चुके हैं. पिछले चुनाव में भी वो कम वोटों के अंतर से पराजित हुए थे. इस बार भी दोनों उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला है. प्रदीप यादव छठी बार जीत हासिल करने की जुगत में पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट से प्रदीप यादव पांच बार विधायक रह चुके हैं. पिछला दो चुनाव उन्होंने झाविमो टिकट पर जीता. लेकिन इस बार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में प्रदीप यादव छठी बार जीत हासिल करने के लिए मैदान में हैं. उनके खिलाफ बीजेपी ने देवेंद्र नाथ सिंह को उम्मीदवार बनाया. गोड्डा में पुराने प्रतिद्वंदी आमने-सामने गोड्डा में बीजेपी के अमित मंडल और आरजेडी के संजय यादव के बीच एक बार फिर कड़ा मुकाबला है. अमित मंडल ने 2014 और 2019 में इस सीट से जीत हासिल की. वहीं उनके पिता भी इस सीट से दो बार विधायक चुके हैं. जबकि संजय यादव भी दो बार इस सीट से विधायक निर्वाचित हो चुके हैं. ऐसे में दोनों के बीच इस चुनाव में कड़ी टक्कर है. महागामा में कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने महागामा विधानसभा सीट से एक बार फिर कांग्रेस की दीपिका पांडेय सिंह और बीजेपी के अशोक भगत के बीच मुकाबला है. वर्ष 2019 के चुनाव में दीपिका पांडेय सिंह ने जीत हासिल की, लेकिन इससे पहले दो बार अशोक भगत भी महागामा के विधायक रह चुके हैं. एक बार फिर से दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला है. आजसू के लिए रामगढ़ प्रतिष्ठा का विषय रामगढ़ विधानसभा सीट पर आजसू पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का विषय है. आजसू की सुनीता देवी फिर से चुनावी अखाड़े में वर्ष 2019 के चुनाव में इस सीट से कांग्रेस की ममता देवी ने जीत हासिल की थी. उपचुनाव में आजसू की सुनीता चौधरी विजयी रहीं. इस बार सुनीता देवी को कांग्रेस की ममता देवी फिर से चुनौती दे रही हैं. हालांकि जेएलकेएम के परमेश्वर कुमार भी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने के प्रयास में जुटे हैं. जेपी पटेल को तिवारी महतो की चुनौती मांडू विधानसभा सीट पर कांग्रेस के जेपी पटेल को इस बार आजसू पार्टी के तिवारी महतो टक्कर दे रहे हैं. वर्ष 2019 के चुनाव में जेपी पटेल ने बीजेपी टिकट पर जीत हासिल की थी. लेकिन लोकसभा चुनाव के पहले वे कांग्रेस में शामिल हो गए. 2014 के चुनाव में जेपी पटेल ने जेएमएम टिकट पर मांडू से जीत हासिल की. मांडू में इस बार के चुनाव में जेएलकेएम के परमेश्वर कुमार को भी कांग्रेस और आजसू को कड़ी टक्कर दे रहे हैं. बगोदर में माले और बीजेपी के बीच मुकाबला बगोदर विधानसभा सीट से भाकपा-माले उम्मीदवार के रूप में विनोद कुमार सिंह एक बार फिर से चुनाव मैदान में है. विनोद कुमार सिंह ने 2005, 2009 और 2019 में इस सीट से जीत हासिल की. लेकिन 2014 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इस बार उन्हें बीजेपी के नागेंद्र महतो से चुनौती मिल रही है. मंजू देवी और केदार हाजरा एक बार फिर आमने-सामने जमुआ में मंजू देवी और केदार हाजरा एक बार फिर आमने-सामने हैं. वर्ष 2019 के चुनाव में केदार हाजरा ने बीजेपी उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की. वहीं कांग्रेस की मंजू देवी ने उन्हें कड़ी टक्कर दी. लेकिन ऐन चुनाव के मौके पर मंजू देवी कांग्रेस छोड़ कर बीजेपी में शामिल हो गई. जबकि टिकट नहीं मिलने पर केदार हाजरा जेएमएम में शामिल हो गए. अब जेएमएम ने केदार हाजरा और बीजेपी ने मंजू देवी को उम्मीदवार बनाया है. कल्पना और मुनिया देवी के बीच टक्कर गांडेय में दिलचल्प मुकाबला देखने को मिलेगा. उपचुनाव में इस सीट से जेएमएम की स्टार प्रचारक कल्पना सोरेन ने जीत हासिल की. वे झामुमो से उम्मीदवार हैं. वहीं बीजेपी ने यहां इस बार मुनिया देवी को चुनाव मैदान में उतारा हैं. मुनिया देवी गिरिडीह जिला परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं. गिरिडीह में झामुमो बीजेपी के बीच दिलचस्प मुकाबला गिरिडीह में एक बार फिर से जेएमएम के सुदिव्य कुमार सोनू और बीजेपी के निर्भय शाहबादी के बीच कड़ा मुकाबला है. वर्ष 2019 में सुदिव्य कुमार ने निर्भय शाहबादी को मात दी थी, जबकि निर्भय शाहबादी भी दो बार यहां से चुनाव जीत चुके है. इस बार के चुनाव में कई अन्य प्रत्याशी भी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में जुटे हैं. डुमरी में त्रिकोणीय संघर्ष डुमरी में जेएमएम प्रत्याशी और मंत्री बेबी देवी इस बार कड़े मुकाबले में फंसी दिख रहीं हैं. एक ओर उन्हें आजसू पार्टी की यशोदा देवी टक्कर दे रही हैं, जबकि जेएलकेएम अध्यक्ष जयरा महतो भी जीत के लिए प्रयासरत है. वर्ष 2023 के उपचुनाव में बेबी देवी ने यहां से जीत हासिल की थी. इससे पहले जेएमएम के वरिष्ठ नेता रहे जगरनाथ महतो चार बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं. गोमिया में आजसू की प्रतिष्ठा दांव पर गोमिया विधानसभा सीट पर आजसू पार्टी विधायक लंबोदर महतो को जेएमएम के योगेंद्र महतो और जेएलकेएम की पूजा कुमारी से कड़ी टक्कर मिल रही है. लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान इस सीट पर जेएलकेएम प्रत्याशी को बढ़त मिली थी, ऐसे में जेएलकेएम समर्थकों में उत्साह हैं. जबकि योगेंद्र महतो और उनकी पत्नी भी यहां से विधायक रह चुकी हैं. बेरमो में त्रिकोणीय संघर्ष बेरमो विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी कुमार जयमंगल सिंह का बीजेपी के रवींद्र पांडेय और जेएलकेएम अध्यक्ष जयराम महतो से मुकाबला है. रवींद्र पांडेय गिरिडीह से तीन बार सांसद रह चुके हैं. लोकसभा चुनाव में बेरमो में जेएलकेएम ने बढ़त हासिल की थी. इसलिए जयराम महतो खुद यहां से चुनाव मैदान में उतरे हैं. इन तीनों उम्मीदवारों के कारण मुकाबला दिलचस्प हो गया है. श्वेता और बिरंची के बीच दिलचस्प मुकाबला बोकारो में कांग्रेस की श्वेता सिंह और बीजेपी के बिरंची नारायण के बीच दिलचस्प मुकाबला की संभावना है. 2014 और 2019 के चुनाव में बिरंची नारायण ने यहां से जीत हासिल की. लेकिन पिछले चुनाव में कांग्रेस की श्वेता सिंह ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी और करीब एक लाख वोट प्राप्त किए. श्वेता सिंह के ससुर समरेश सिंह इस सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं. नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी को भी मिल रही चुनौती चंदनकियारी विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक दल के नेता अमर कुमार बाउरी इस बार कड़े मुकाबले में फंस गए हैं. अमर बाउरी ने वर्ष 2014 और 2019 में चंदनकियारी सीट से जीत हासिल की थी. इस बार बीजेपी-आजसू पार्टी के बीच तालमेल होने पर उमाकांत रजक ने जेएमएम का दामन थाम लिया और जेएमएम प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं. उमाकांत रजक भी 2009 में इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं. बीजेपी और माले के बीच टक्कर सिंदरी विधानसभा सीट से बीजेपी ने इस बार विधायक इंद्रजीत महतो की पत्नी तारा देवी को उम्मीदवार बनाया है. इंद्रजीत महतो पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे हैं और हैदराबाद के एक अस्पताल में भर्ती है. तारा देवी जिला परिषद की सदस्य रहीं हैं और क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ है. वहीं भाकपा-माले ने चंद्रदेव महतो को उम्मीदवार बनाया है. उन्हें जेएमएम-कांग्रेस और आरजेडी का समर्थन प्राप्त है. निरसा में बीजेपी और माले के बीच टक्कर निरसा विधानसभा सीट पर इस बार फिर से बीजेपी की अपर्णा सेनगुप्ता और भाकपा-माले के अरूप चटर्जी के बीच मुकाबला है. यहां से अरूप चटर्जी पहले भी दो बार चुनाव जीत चुके हैं. वर्ष 2019 के चुनाव में बीजेपी टिकट पर अपर्णा सेनगुप्ता ने जीत हासिल की थीं. इससे पहले अपर्णा फारवर्ड ब्लॉक उम्मीदवार के रूप में भी यहां से चुनाव जीत चुकी हैं. धनबाद में राज सिन्हा और अजय दूबे आमने-सामने धनबाद विधानसभा सीट से बीजेपी के राज सिन्हा के सामने इस बार कांग्रेस के अजय दुबे मैदान में हैं. वर्ष 2014 और 2019 में राज सिन्हा ने धनबाद सीट से जीत हासिल कीं. अब वो जीत की हैट्रिक बनाने के लिए चुनाव मैदान में हैं. कांग्रेस ने इस बार अजय दुबे को उम्मीदवार बनाया है. अजय दुबे इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में मैदान में उतर चुके हैं और वो दूसरे स्थान पर रहे थे. देवरानी और जेठानी के बीच फिर से मुकाबला झरिया में वर्ष 2019 की तरह इस बार भी देवरानी और जेठानी के बीच मुकाबला है. कांग्रेस ने विधायक पूर्णिमा सिंह को उम्मीदवार बनाया है. जबकि बीजेपी टिकट पर रागिनी सिंह चुनाव मैदान में हैं. झरिया सीट पर पिछले पांच दशक से मजदूर नेता सूर्यदेव सिंह के परिवार का कब्जा रहा है. अब इस परिवार में बंटवारा हो चुका है और परिवार की देवरानी और जेठानी आमने-सामने हैं. टुंडी में त्रिकोणीय संघर्ष के आसार टुंडी विधानसभा में जेएमएम के मथुरा प्रसाद महतो को बीजेपी के विकास महतो और जेएलकेएम के मोतीलाल महतो कड़ी टक्कर दे रहे हैं. मथुरा प्रसाद महतो वर्ष 2009, 2014 और 2019 में यहां से चुनाव जीत चुके हैं. लोकसभा चुनाव में भी मथुरा प्रसाद महतो गिरिडीह के अन्य क्षेत्रों में पिछड़ गए थे, लेकिन उन्होंने टुंडी में बढ़त हासिल की थी. शत्रुघन के लिए भाई की विरासत को बचाने की चुनौती बाघमारा विधानसभा सीट से 2014 और 2019 में ढुल्लू महतो ने जीत हासिल की. इस बार बीजेपी ने ढुल्लू महतो के बड़े भाई शत्रुघ्न महतो को बाघमारा से उम्मीदवार बनाया है. जबकि कांग्रेस की ओर से फिर से जलेश्वर महतो मैदान में है. वर्ष 2019 के चुनाव में जलेश्वर महतो करीब 800 से वोटों से चुनाव हार गए थे. इस बार जेएलकेएल उम्मीदवार भी यहां मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं. इसे भी पढ़ें -एक">https://lagatar.in/ek-hai-to-safe-hai-rahul-gandhi-waves-modi-adani-poster-connection-with-dharavi-project/">एक

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