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अब राजनीतिक घमसान

झारखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन ( संवर्धन और सुविधा ) विधेयक 2022 को लेकर विरोध बढ़ता ही जा रहा है. अब राजनीतिक दलों में भी इसे लेकर घमसान शुरू हो गया है. भाजपा ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया है. भाजपा नेताओं ने इस बिल को आम जनता के खिलाफ बताते हुए सरकार से इसे जल्द वापस लेने को कहा है. वहीं कांग्रेस और झामुमो ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस ने सरकार से इस बिल के संदर्भ में व्यापारियों की मांगों पर गौर करने की बात भी कही है. दूसरी ओर सरकार द्वारा कृषि शुल्क विधेयक को प्रभावी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इससे राज्यभर के खाद्यान्न व्यापारियों, कृषकों एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों में गहरा आक्रोश है. कृषि शुल्क विधेयक को व्यवसायियों ने काला कानून बताते हुए राज्य सरकार से वापस लेने की मांग की है. उनका कहना है कि इसके लिए वे आर-पार की लड़ाई के लिए वे तैयार हैं. शुभम संदेश टीम ने इससे जुड़ी प्रतिक्रिया ली है. पेश है रिपोर्ट...

कांग्रेस -झामुमो ने कहा-किसानों के हित में

[caption id="attachment_550517" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/RAJESH-THAKUR_288-300x229.jpg"

alt="" width="300" height="229" /> राजेश ठाकुर[/caption] इसे लागू तो होने दीजिए, फिर पता चलेगा कि बिल के परिणाम क्या आ रहे हैं  झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, कि किसी भी विधेयक की मंजूरी सभी चीजों को देखने के बाद ही मिलती है. जहां तक विधेयक के विरोध की बात है तो यह देखना चाहिए कि राज्यपाल ने भी पूरी तरह सोच समझकर ही इसकी स्वीकृति दी है. व्यापारी वर्ग इसके परिणाम को लेकर विरोध कर रहे हैं तो पहले इसे लागू तो होने दीजिए, उसके बाद ही पता चलेगा कि विधायक के परिणाम सकारात्मक या नकारात्मक. राजस्व में बढ़ोतरी तो होगी ही, बिचौलियों की मनमानी पर भी अंकुश लगेगा [caption id="attachment_550516" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/RAJESH-KACCHAP_210-300x249.jpg"

alt="" width="300" height="249" /> राजेश कच्छप[/caption] कांग्रेस के खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि विधेयक राज्य हित में है. आने वाले दिनों में इससे सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी. साथ ही बिचौलियों की कार्यशैली पर भी अंकुश लगेगा. उन्होंने कहा, सरकार ने काफी सोच विचार कर इस विधेयक को विधानसभा से पारित कराया है. किसानों पर कोई भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा. इससे चीजें भी मंहगी नहीं होंगी.

अगर किसानों पर भार पड़ता है तो सरकार को बिल वापस ले लेना चाहिए

[caption id="attachment_550522" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/SHILPI-NEHA-TIRKEY_491-300x200.jpg"

alt="" width="300" height="200" /> शिल्पी नेहा तिर्की[/caption] कांग्रेस की मांडर विधायक शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि सरकार ने किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए इस विधेयक को विधानसभा से पारित कराया है. वहीं, इन दिनों राज्य में सुखाड़ की स्थिति है. तो हमें यह सोचना चाहिए कि किस तरह से किसानों पर भार को घटा सकते हैं. अगर कुछ समूह कृषि शुल्क बढ़ने से किसानों पर भार बढ़ने का आरोप लगा रहे हैं तो सरकार को सोच विचार कर इस पर मंथन करना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो इस विधेयक को वापस ले लेना चाहिए.

व्यापारी वर्ग को अमूल दूध में 3 रूपए की बढ़ोतरी का भी विरोध करना चाहिए 

[caption id="attachment_550519" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/RAKESH-SINHA_351-300x207.jpg"

alt="" width="300" height="207" /> राकेश सिन्हा[/caption] कांग्रेस प्रदेश महासचिव सह प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने बताया, कि लोकतंत्र में हर किसी को विरोध प्रदर्शन का अधिकार है. झारखंड में यह बढ़ोतरी अप टू 2 प्रतिशत हुई है. हो सकता है कि यह इससे कम हो. जो व्यापारी आज इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं उन्हें अमूल दूध पर पिछले दिनों के 3 रूपए की बढ़ोतरी हुई है, उसका भी विरोध करना चाहिए.

किसानों के हित में लाया गया है यह विधेयक, विरोध ठीक नहीं

[caption id="attachment_550521" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/RAMDAS-SOREN_429-300x200.jpg"

alt="" width="300" height="200" /> रामदास सोरेन[/caption] झामुमो के घाटशिला विधायक रामदास सोरेन ने कहा कि यह विधेयक आम सहमति के बाद ही विधानसभा से पारित हुआ. उसके बाद राज्यपाल ने इसे अनुमति दी. अब व्यापारी वर्ग अगर इसका विरोध कर रहे हैं तो सरकार इस पर संज्ञान लेकर मंथन करेगी. जहां तक विधेयक की बात है तो यह किसानों के हित में लाया गया विधेयक है. इससे सभी को फायदा होगा. इसका विरोध ठीक नहीं है.

सरकार ने कृषि शुल्क विधेयक लागू कर सराहनीय कार्य किया है 

[caption id="attachment_550499" align="aligncenter" width="298"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/09RC_M_160_09022023_1-298x300.jpg"

alt="" width="298" height="300" /> रवि यादव[/caption] युवा राजद अध्यक्ष रवि यादव ने कृषि शुल्क विधेयक पर कहा कि मेरी सहयोगी सरकार झारखंड में कृषि शुल्क विधेयक लागू कर सराहनीय कार्य कर रही है. इससे किसानों व्यापारियों, मजदूर वर्ग को लाभ मिलेगा. उन्होंने कहा कि कृषि शुल्क विधेयक जो लोग समझ रहे हैं. वह इसका विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन जो लोग नहीं समझ रहे हैं इसका विरोध कर रहे हैं. इसलिए मैं आम लोगों से आग्रह करता हूं इस बिल को लागू कराने में सहयोग करें,

कृषि शुल्क विधेयक लागू हो जाने से लोगों को लाभ मिलेगा 

[caption id="attachment_550498" align="aligncenter" width="239"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/09RC_M_145_09022023_1-239x300.jpg"

alt="" width="239" height="300" /> डॉ. एजाज आलम[/caption]   झारखंड मुक्ति मोर्चा के अल्पसंख्यक मोर्चा के केंद्रीय सचिव डॉ. एजाज आलम ने कहा कि झारखंड प्रदेश गरीब गुरबो का प्रदेश है. कृषि शुल्क विधेयक लागू हो जाने से लोगों को लाभ मिलेगा कृषि शुल्क विधेयक को कुछ लोग ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं और जो लोग समझ रहे हैं. वह इसका विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन जो लोग नहीं समझ रहे हैं वह इस बिल का विरोध कर रहे हैं. इस कृषि शुल्क विधेयक पारित हो जाने से किसानों को लाभ होगा, जैसे किसानों की योजनाओं और झारखंड में बढ़ोतरी की जाएगी. लेकिन चंद लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं . उन्होंने कहा कि झारखंड को केंद्र सरकार कोई मदद नहीं कर रही है. केंद्र सरकार झारखंड सरकार को बकाया राशि 134000 करोड़ रॉयल्टी का भुगतान नहीं कर रही है. अगर यह रॉयल्टी का भुगतान हो जाता है तो झारखंड में बेरोजगारी दूर होगी. हमारी सरकार कृषि शुल्क विधेयक को पारित कर एक सराहनीय कार्य कर रही है

भाजपा ने कहा - बिल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला

हेमंत सरकार किसान और व्यापारी विरोधी 

[caption id="attachment_550513" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/RAGHUBAR-DAS_238-300x249.jpg"

alt="" width="300" height="249" /> रघुवर दास[/caption] भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व सीएम रघुवर दास ने कहा कि हेमंत सरकार किसान, छोटे व मंझोले व्यापारी और आम लोगों की विरोधी है. कृषि बाजार समिति पर फिर से शुल्क लगाकर हेमंत सरकार ने बंद पड़े भ्रष्टाचार के अड्डे को चालू कर दिया. भाजपा इसका कड़ा विरोध करती है. इस शुल्क के लागू होने से सबसे ज्यादा किसान और आम लोग प्रभावित होंगे. हेमंत सरकार से लोगों को राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती है.

सरकार को इस विधेयक पर पुनर्विचार करना चाहिए 

[caption id="attachment_550500" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/ANANT-OJHA_644-300x219.jpg"

alt="" width="300" height="219" /> अनंत ओझा[/caption] भाजपा विधायक अनंत ओझा ने कहा कि इस विधेयक का भाजपा ने सदन में प्रतिकार किया था. हमने कहा था कि किसानों और व्यापारियों पर बोढ़ न बढ़े. उनपर बोझ बढ़ेगा तो सीधे-सीधे यह बोझ आम जनता पर भी बढ़ेगा, लेकिन सदन में राज्य विरोधी हेमंत सरकार ने हमारी बातों को नहीं सुना. संख्या बल के आधार पर विधेयक को पारित करा लिया गया. भाजपा व्यापारियों के साथ है. सरकार को एक बार विधेयक पर पुनर्विचार करना चाहिए.

सरकार इस विधेयक को शीघ्र वापस ले 

[caption id="attachment_550504" align="aligncenter" width="257"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/CP-SINGH_988-257x300.jpg"

alt="" width="257" height="300" /> सीपी सिंह[/caption] भाजपा के विधायक सीपी सिंह ने कहा कि छोटे व्यापारियों पर कृषि उपज और पशुधन विपणन विधेयक थोपना सरासर गलत है. जब राज्य में रघुवर दास की सरकार थी तब इस सिस्टम को खत्म कर दिया था. फिर से भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए यह विधेयक दोबारा लाया गया. हमने विधानसभा में भी विधेयक पारित होने का विरोध किया था. आज भी भाजपा इसकी घोर निंदा करती है. व्यापारियों का विरोध जायज है.

सरकारी दादागिरी बढ़ाने के लिए लाया गया विधेयक 

[caption id="attachment_550503" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/BIRANCHI-NARAYAN_879-300x249.jpg"

alt="" width="300" height="249" /> बिरंची नारायण[/caption] भाजपा विधायक दल के सचेतक बिरंची नारायण ने कहा कि यह काफी दुखद है. रघुवर सरकार ने बाजार समिति से भ्रष्टाचार और सरकारी दादागिरी खत्म करने के लिए इसे खत्म कर दिया था, लेकिन हेमंत सरकार ने फिर से व्यापारियों का दोहन करने के लिए यह विधेयक लाया है. इस शुल्क के लागू होने से सबसे ज्यादा किसान और आम लोग प्रभावित होंगे. हेमंत सरकार से आम लोग राहत की उम्मीद नहीं कर सकते हैं.

विधेयक भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला 

[caption id="attachment_550520" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/RAMCHANDRA-CHANDRAWANSHI_473-300x244.jpg"

alt="" width="300" height="244" /> रामचंद्र चंद्रवंशी[/caption] भाजपा विधायक रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि भाजपा इस विधेयक का विरोध करती है. यह विधेयक भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला है. बिहार और यूपी जैसे राज्यों ने भी इस बिल को वापस ले लिया है. विधेयक से राज्य में कृषि उपज के उत्पादन, विपणन और प्रसंस्करण उद्योग में भारी कमी आएगी. यह सरकार किसानों और व्यापारियों की विरोधी है. यह बिल जनता को लूटने के लिए लाया गया है. सरकार विधेयक को वापस ले.

सरकार को इसका खमियाजा तो भुगतना ही पड़ेगा 

[caption id="attachment_550514" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/RAJ-SINHA_348-300x249.jpg"

alt="" width="300" height="249" /> राज सिन्हा[/caption] भाजपा विधायक राज सिन्हा ने कहा कि इस विधेयक को लाने का खमियाजा हेमंत सरकार को भुगतना पड़ेगा. भाजपा शुरू से ही इस विधेयक का विरोध कर रही है. रघुवर सरकार में खत्म किये गये प्रावधानों को दोबारा यह सरकार विधेयक के रूप में व्यापारियों का दोहन करने के लिए लाई है. कृषि बाजार समिति पर फिर से शुल्क लगाकर हेमंत सरकार ने बंद पड़े भ्रष्टाचार को चालू कर दिया है. यह सरकार निरंकुश होकर राज्य को चला रही है.

राजस्व तो नहीं ही बढ़ेगा, इंस्पेक्टर राज आ जाएगा 

[caption id="attachment_550508" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/MANISH-JAISWAL_113-300x249.jpg"

alt="" width="300" height="249" /> मनीष जायसवाल[/caption] भाजपा के विधायक मनीष जायसवाल ने कहा कि जब यह विधेयक सदन में लाया गया था उस वक्त भी भाजपा ने विरोध किया था, लेकिन यह सरकार सुनने वाली कहां है. विधेयक से राजस्व नहीं बढ़ेगा बल्कि इंस्पेक्टर राज आ जाएगा. भाजपा की सरकार जब कृषि बिल लेकर आई थी तब इनको खराब लग रहा था और अब व्यापारियों के दोहने के लिए यह बिल लेकर आई है. यह हेमंत सरकार का दोहरा चरित्र है. राज्य सरकार भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का काम कर रही है. यह बिल जनता को लूटने के लिए लाया गया है. सरकार को इस विधेयक पर फिर से विचार करना चाहिए. आम व्यापारी इस बिल से नाराज चल रहे हैं. सरकार को व्यापारियों की बातों पर ध्यान देना चाहिए. गहराई से देखना चाहिए कि इस बिल में कितनी खामियां है.इसे लेकर सरकार का जल्दबाजी करना ठीक नहीं हैं.

सरकार व्यापारियों से भी बातचीत करे 

[caption id="attachment_542029" align="aligncenter" width="260"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/Saryu-rai-1-260x300.jpg"

alt="" width="260" height="300" /> सरयू राय[/caption] झारखंड सरकार की ओर से मंडी टैक्स 2 प्रतिशत बढ़ाने का विधेयक प्रभावी किए जाने पर जमशेदपुर पूर्वी के निर्दलीय विधायक सरयू राय का कहना है कि मंडी टैक्स पर सरकार को व्यापारियों की मांगों पर भी विचार करना चाहिए. अगर वे इसको लेकर आंदोलनरत हैं, तो उनकी भी पूरी सुनी जानी चाहिए. इसको लेकर अगर कानून बनाया गया है. तो इससे होने वाले फायदे के साथ-साध इसके दूसरे पहलु पर भी गौर करने की जरूरत है.

कृषि बिल में निजी भागीदारी की बात कही गयी है

[caption id="attachment_550509" align="aligncenter" width="213"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/PANKAJ-TIWARI-_95-213x300.jpg"

alt="" width="213" height="300" /> पंकज[/caption] कांग्रेस नेता पंकज तिवारी ने कहा कि इस बिल में कृषि विपणन में निजी भागीदारी एवं कृषकों को बाजार के अधिक विकल्प उपलब्ध कराने की बात कही गयी है. किसानों के उत्पाद को बाजार उपलब्ध कराया जाएगा. इस बिल का उदेश्य एक देश -एक बाजार की परिकल्पना है. कृषि बाजार से प्राप्त राजस्व से ग्रामीण हाट-बाजारों के आधुनिकरण के अलावा नए बाजारों की भी स्थापना की जाएगी. व्यवसायियों को ठंडे दिमाग से इसके नफा-नुकसान पर सोचना चाहिए.

व्यापारियों से बात कर कोई रास्ता निकालें

[caption id="attachment_550496" align="aligncenter" width="272"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/09RC_M_54_09022023_1-272x300.jpg"

alt="" width="272" height="300" /> समीर महंती[/caption] बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र के झामुमो विधायक समीर कुमार महंती ने राज्य सरकार द्वारा दोबारा बाजार समिति टैक्स लगाए जाने के मसले पर अपनी राय देते हुए कहा कि यह टैक्स पहले भी था. उन्होंने कहा कि अगर इस टैक्स के लगाने से व्यापारियों को अधिक परेशानी हो रही है, तो सरकार व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल से बात कर कोई बीच का रास्ता निकाले, ताकि सरकार भी चले और व्यापारियों का व्यापार भी चले. सरकार चलाने और जनकल्याणकारी योजनाओं को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए सरकार को टैक्स की भी जरूरत है. व्यापारियों को भी सरकार से बातचीत करनी चाहिए.

हेमंत सरकार की मनमानी व जन विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन अब और तेज होगा

[caption id="attachment_550501" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/BAZAR-HADTAL_358-300x238.jpg"

alt="" width="300" height="238" /> बिनोद गुप्ता[/caption] धनबाद से दो प्रतिशत कृषि बिल के विरोध में 9 फरवरी को बाज़ार समिति के प्रांगण में बैठक हुई. बैठक में कृषि बिल को काला कानून बताया गया और उसे वापस लेने के लिए आंदोलन पर विशेष चर्चा की गई. बाजार समिति के व्यवसायियों ने हेमंत सरकार को 14 फरवरी तक काला कानून वापस लेने का अल्टीमेटम दिया है. अगर सरकार कानून वापस नहीं लेगी, तो 15 फरवरी से खाद्यान्न व्यवसायी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. अगर 14 फरवरी तक कानून वापस नहीं हुआ तो 15 से खाद्यान्न का आवक बंद बाजार समिति चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष विनोद गुप्ता ने जानकारी देते हुए कहा कि हेमंत सरकार की मनमानी और जन विरोधी नीतियों के खिलाफ गुरुवार को बाजार समिति के प्रांगण में बैठक हुई, जिसमें आंदोलन पर विशेष चर्चा की गई. साथ ही सरकार द्वारा गुपचुप तरीके से पारित इस काला कानून को वापस लेने के लिए एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया गया.

व्यावहारिक नहीं है झारखंड का कृषि बिल 

[caption id="attachment_550518" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/RAKESH-KR-DUBEY_337-300x300.jpg"

alt="" width="300" height="300" /> राकेश दुबे[/caption] भाजपा नेता राकेश कुमार दुबे ने कहा कि झारखंड सरकार के द्वारा लाया गया कृषि बिल व्यवहारिक नहीं है. इससे आम जनता पर महंगाइ का बोझ बढ़ेगा. झारखंड के पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल और ओडिशा में यह शुल्क लागू नहीं है. सरकार बाजार समिति शुल्क लगा कर चावल और अन्य खाद्यान्नों से जड़े व्यापार को समाप्त करना चाहती है. इससे आम जनता परेशान होगी, उन पर महंगाई की मार पड़ेगी. इस लिहाज से इस विधेयक को लेकर सरकार को फिर से विचार करना चाहिए.

सरकार को बात सुननी चाहिए

[caption id="attachment_550502" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/BIDYUT_MAHATO_477-300x202.jpg"

alt="" width="300" height="202" /> विद्युत वरण महतो[/caption] जमशेदपुर के भाजपा सांसद विद्युत वरण महतो ने कहा है कि व्यापारियों के आंदोलन का समर्थन करते हैं. किसी तरह का नियम पास करने के पहले खासकर व्यापारियों से भी सलाह-मशविरा करनी चाहिये थी. अगर व्यापारी वर्ग मंडी टैक्स को लेकर आंदोलन कर रहे हैं तो सरकार को भी उनकी बातों को सुननी चाहिये. इसके बाद ही किसी तरह का फैसला करना चाहिये. जिस तरह से व्यापारी वर्ग आंदोलन कर रहे हैं उससे लगता है कि आगे चलकर उनका आंदोलन और तेज हो सकता है.

व्यवसायियों के साथ अन्याय कर रही सरकार 

[caption id="attachment_550515" align="aligncenter" width="260"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/RAJAN-TIWARI-_385-260x300.jpg"

alt="" width="260" height="300" /> राजन तिवारी[/caption] सांसद प्रतिनिधि राजन तिवारी ने कहा कि सरकार कृषि बिल लाकर छोटे दुकानदार व व्यवसायियों के साथ अन्याय कर रही है. सरकार को इस विधेयक पर पुनर्विचार करना चाहिए. बाजार समिति का दो प्रतिशत शुल्क लग जाने से अनाज पर प्रति क्विंटल 50 रुपये का अतिरिक्त भार बढ़ेगा. एक तो महंगाई पहले से चरम पर है और अब महंगाई और बढ़ेगी. सरकार को इस बिल को वापस लेना चाहिए. व्यापारियों का विरोध जायज है.इस बिल के प्रभावी हो जाने से सामान के दाम फिर बढ़ने लगेंगे.

मंडी टैक्स से इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा 

[caption id="attachment_550494" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/09RC_M_12_09022023_1-300x300.jpg"

alt="" width="300" height="300" /> मानव केडिया[/caption] सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव मानव केडिया का कहना है कि इस विधेयक के लागू होने से व्यापारी ही नहीं, आम जनता पर भी इसका सीधा असर होगा. मंडी टैक्स लागू होने इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा. भ्रष्टाचार बढ़ेगा. बाजार शुल्क लगाये जाने के उपरांत सीमावर्ती राज्य के थोक विक्रेता झारखंड में प्रचुर मात्रा में माल बेचेंगे. इससे झारखंड सरकार को जीएसटी से हो रहे राजस्व की प्राप्ति में भारी क्षति होगी. मंडी टैक्स लागू होने से खाद्यान्न महंगा होगा. वहीं, बड़े व्यापारी जियो रिलायंस जैसी कंपनी मंडी टैक्स से मुक्त होंगे, तो व्यापारियों को अपने घर में ही प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. व्यापारियों के सामने संकट उत्पन्न होगा. इसलिए सरकार को मंडी टैक्स को वापस लेने पर पुनर्विचार करना चाहिए.

मंडी टैक्स विधेयक सरकार की अदूरदर्शिता का परिचायक 

[caption id="attachment_550495" align="aligncenter" width="298"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/09RC_M_13_09022023_1-298x300.jpg"

alt="" width="298" height="300" /> स्वरूप गोलछा[/caption] जमशेदपुर के व्यापारी स्वरूप गोलछा का कहना है कि जो सरकार अपने प्रदेश वासियों, व्यापारियों और अपने राजस्व की होने वाली क्षति का आकलन नहीं करते हुए मंडी टैक्स को लागू करने के लिए प्रयासरत है. यह सरकार की अदूरदर्शिता का परिचायक है. सीधी सी बात है कि मंडी टैक्स से अनाज की कीमतों में वृद्धि होगी, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा. मंडी टैक्स व्यापारी अपने घर से तो देगा नहीं. वह खाद्यान्न पर 2 प्रतिशत का टैक्स लोगों से ही वसूल करेगा. वहीं सीमावर्ती राज्यों में मंडी टैक्स नहीं होने के कारण खाद्यान्न वहां सस्ता होगा, तो राज्य में सीमावर्ती राज्यों से खाद्यान्न की आवक बढ़ेगी. राज्य में व्यापार घटेगा तो सरकार को जीएसटी से प्राप्त होने वाले राजस्व में कमी होगी. सरकार को मंडी टैक्स वापस लेना चाहिए.

व्यापारियों के साथ धोखा है मंडी टैक्स 

[caption id="attachment_550493" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/09RC_M_11_09022023_1-300x192.jpg"

alt="" width="300" height="192" /> मुकेश मित्तल[/caption] सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष मुकेश मित्तल का कहना है कि इस काले विधेयक को लेकर खाद्यान्न व्यापारियों के बीच काफी रोष व्याप्त है. पूर्व में सरकार के सभी वरिष्ठ मंत्रियों द्वारा व्यापारियों को आश्वासन दिया गया था कि कृषि बाजार विपणन समिति पर प्रस्तावित दो प्रतिशत मंडी शुल्क को लागू नहीं किया जायेगा, लेकिन सरकार ने इसे दोबारा लागू कर दिया है. यह व्यापारियों के साथ ही नहीं, आम जनता के साथ भी धोखा है. इसके विरोध के लिये खाद्यान्न व्यापारी एकजुट हैं. पूरे राज्यभर में मंडी टैक्स के खिलाफ आंदोलन किया जा रहा है. सरकार यदि व्यापारियों की मांग पर विचार नहीं करती है तो राज्य में खाद्यान्न के आवक को पूरी तरह से बाधित किया जाएगा. मंडी टैक्स लागू करके सरकार ने यह बता दिया है कि उसे आम जनता की बिलकुल भी चिंता नही है.

कृषि उपज एवं पशुधन विधेयक व्यापरियों की कमर तोड़ने वाला कानून 

[caption id="attachment_550506" align="aligncenter" width="253"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/FJCCI-putla-dehan-4-253x300.jpg"

alt="" width="253" height="300" /> सुबोध श्रीवास्तव[/caption] भाजमो जमशेदपुर महानगर के जिलाध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव ने प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा है कि राज्य सरकार द्वारा खाद्यान्नों पर अतिरिक्त दो फीसदी शुल्क लगाने से महंगाई बढ़ेगी. जिसका खामियाजा व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों पर पड़ेगा. यह विधेयक लागू होने के बाद राज्य के खाद्यान्न व्यापारियों के व्यापार पर खासा प्रभाव पड़ेगा. दो फीसदी शुल्क का नुकसान व्यापारी ग्राहक से ही वसुलेंगे जिससे महंगाई बढ़ने की भी संभावना है. यह भी संभावना है कि व्यापारी अन्य राज्यों से माल की खरीदारी करें इससे राज्य को जीएसटी का नुकसान झेलना पड़ेगा, यह भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला विधेयक साबित होगा. उन्होंने सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग की है.

कृषि बिल के खिलाफ जोरदार आंदोलन करेंगे 

[caption id="attachment_550523" align="aligncenter" width="267"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/VIJAY-LUHARIYA-09_891-267x300.jpg"

alt="" width="267" height="300" /> विजय लुहाड़िया[/caption] खुदरा खाद्यान्न व्यवसायी संघ और उत्तरी छोटानागपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रवक्ता विजय लुहाड़िया ने कहा कि कृषि शुल्क विधेयक के खिलाफ जोरदार आंदोलन होगा. इसे लागू कर सरकार व्यवसायियों को परेशान करना बंद करे. एक तो जीएसटी, फिर नगर निगम की चुंगी और अब कृषि शुल्क. इन सब का टैक्स बढ़ने पर खाद्यान्न की कीमत में उछाल आएगा.

बिल से व्यवसायी और उपभोक्ता दोनों को नुकसान 

[caption id="attachment_550511" align="aligncenter" width="234"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/PRADEEP-PATODI-09_813-234x300.jpg"

alt="" width="234" height="300" /> प्रदीप पाटोदी[/caption] व्यवसायी प्रदीप पाटोदी ने कहा कि यह काला कानून है, सरकार को इसे वापस ले लेना चाहिए. इससे व्यवसायी और उपभोक्ता दोनों को हानि है. खाद्यान्न पर जितना टैक्स बढ़ेगा, वह बोझ आम जनता पर ही पड़ेगा. व्यवसायियों पर ही बाजार निर्भर है. सरकार को यह समझना चाहिए.

बिल पर सरकार14 फरवरी तक फैसला ले

[caption id="attachment_550505" align="aligncenter" width="205"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/DINESH-KHANDELWAL-09_766-205x300.jpg"

alt="" width="205" height="300" /> दिनेश खंडेलवाल[/caption] व्यवसायी दिनेश खंडेलवाल ने कहा कि 14 फरवरी तक सरकार फैसला ले. उसके बाद 15 फरवरी से खाद्यान्न का आवक रोको आंदोलन होगा. अगर सरकार नहीं मानेगी, तो आगे जमकर विरोध होगा. राज्य सरकार को बिल लाने के पहले व्यवसायियों से सहमति बनानी चाहिए थी. इस विधेयक से कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा.

व्यवसायियों और उपभोक्ताओं से ही बाजार 

[caption id="attachment_550512" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/PRAKASH-KUMAR_704-300x276.jpg"

alt="" width="300" height="276" /> प्रकाश कुमार[/caption] व्यवसायी प्रकाश कुमार ने कहा कि व्यवसायियों और उपभोक्ताओं पर ही बाजार टिका है. टैक्स पर टैक्स लादकर सिर्फ महंगाई बढ़ाई जा रही है. पहले से ही जीएसटी, फिर नगर निगम क्षेत्र में चुंगी और अब कृषि बिल विधेयक लाकर सरकार व्यवसायियों को मानसिक और आर्थिक तनाव देने का काम कर रही है.

विधेयक पर सरकार को फिर से विचार करने की जरूरत 

[caption id="attachment_550510" align="aligncenter" width="278"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/02/PINTOO-KR_641-278x300.jpg"

alt="" width="278" height="300" /> पिंटू कुमार[/caption] व्यवसायी पिंटू कुमार ने कहा कि कृषि शुल्क विधेयक पर सरकार को फिर से विचार करने की जरूरत है. यह व्यवसायियों के हित में नहीं है. इससे व्यवसायी, उनका व्यवसाय, बाजार और उपभोक्ता सब कुछ प्रभावित हो जाएगा. सरकार को व्यवसायियों पर यह बोझ लादने की जरुरत नहीं है.

टैक्स बढ़ेगा, उसका बोझ आम जनता को ही उठाना पड़ेगा-चिंटू गुप्ता 

चिंटू गुप्ता ने कहते हैं कि यह बिल काला कानून है. सरकार को इसे वापस ले लेना चाहिए. इससे व्यवसाय और खरीदार दोनों को नुकसान है. खाद्यान्न पर जितना टैक्स बढ़ेगा, उसका बोझ आम जनता पर ही पड़ेगा. व्यापारियों पर ही बाजार टिका हुआ है. सरकार को यह समझना चाहिए कि इस विधेयक से सामान के दाम बढ़ेंगे और जनता पर महंगाई की मार पड़ेगी. इसलिए सरकार इस पर शीघ्र विचार करें.

अनाज महंगे हो जाएंगे, आम लोगों की जेब कटेगी :सूर्य देव यादव

व्यवसायी सूर्य देव यादव ने कहा कि बाजार समिति शुल्क लगने से अनाज महंगे हो जाएंगे. सरकार को इस पर विचार करना चाहिए. व्यापारी प्रति क्विंटल 5 से 10 रुपए की मार्जिन लेकर कमाते हैं. कृषि बिल से सबसे अधिक नुकसान व्यापारी और आम जनता को होगा. विधेयक से सिर्फ महंगाई की मार पड़ेगी. जो सभी लोगों के लिए भारी पड़ेगी. इससे आम लोगों की जेब कटेगी.

बढ़ेगी महंगाई, सरकार बिल को लेकर पुनर्विचार करे : अभिषेक साव

व्यापारी अभिषेक साव ने कहा कि कृषि शुल्क बिल प्रभावी होने से हमारे राज्य में महंगाई बढ़ेगी. सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए. सरकार बिल पर पुनर्विचार करे. इस बिल को स्वीकार नहीं किया जाएगा. यदि बिल सभी के लिए बेहतर होता, तो इसका विरोध नहीं किया जाता, लेकिन बिल को लेकर पूरे झारखंड में विरोध किया जा रहा है. सरकार को इस बारे में विचार करने की जरूरत है.

यह बिल झारखंड की परिस्थिति के विपरीत है : राजकुमार मोदी

कोडरमा के राजकुमार मोदी के अनुसार व्यापारियों पर 2 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगाना सरकार की गलत नीतियों को दर्शाता है. यह बिल झारखंड की परिस्थिति के विपरीत है. सरकार ने पिछले वर्ष भी इसे लागू करने का प्रयास किया था, लेकिन व्यापारियों ने राज्यव्यापी आंदोलन कर सरकार की मंशा पर पानी फेर दिया था. इस बार सरकार ने इसे गुपचुप ढंग से पास कराया है.

सरकार को चाहिए कि मंगाई कम करें और राहत दे : अजय मोदी

कोडरमा के व्यापारी अजय मोदी के अनुसार राज सरकार महंगाई बढ़ाने के उद्देश्य 2 प्रतिशथ टैक्स लगा लगा रही है. सरकार को चाहिए कि मंगाई कम करें और जनता को राहत दे . ट्रक्स लगने से जहां चावल गेहूं पर मंगाई बढ़ जाएगी वही आम जनता भी महंगाई के मार से त्रस्त होगी अबे पारी किसी भी हालत में शांत नहीं बैठेंगे और व्यापारी चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी करेंगे .

बिल व्यापारियों और आम जनता के लिए बोझ : रविंद्र नाथ मिश्र

पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस के महामंत्री रविंद्र नाथ मिश्रा ने राज्य सरकार द्वारा कृषि बाजार शुल्क लगाए जाने को व्यापारियों और आम जनता पर एक बोझ बताया है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा यह टैक्स लगाना सरासर अन्याय है. जनता और व्यापारियों के हित को देखते हुए राज्य सरकार कृषि बाजार टैक्स लगाने के निर्णय को वापस ले. इस टैक्स के लगाए जाने से व्यापारी वर्ग आंदोलित है. व्यापारियों के आंदोलन से सरकार और जनता दोनों को नुकसान होगा.

व्यापारियों के लिए काला कानून है मंडी टैक्स : शंकर अग्रवाल

खाद्यान्न व्यापारी शंकर अग्रवाल का कहना है कि सरकार द्वारा लगाया गया मंडी टैक्स व्यापारियों के लिए काला कानून है. व्यापारी वर्ग इस मंडी टैक्स का पुरजोर विरोध करता है. सरकार को मंडी टैक्स वापस लेना होगा. सरकार द्वारा पहले व्यापारियों को टैक्स लागू नहीं करने का आश्वासन दिया जाता है, फिर टैक्स लागू कर दिया जाता है. जो कहीं ना कहीं व्यापारी के साथ धोखा है. झारखंड कृषि उत्पादन वाला राज्य नहीं होने के बावजूद सरकार द्वारा मंडी टैक्स लगाना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है, जबकि कृषि उत्पादन वाले राज्य पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार में मंडी टैक्स लागू नहीं है. इसके कारण झारखंड में खाद्यान्न महंगा होगा. आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा. व्यापारी इस मंडी टैक्स का पुरजोर विरोध करते हुए सड़क से सदन तक आंदोलन करने के लिए मन बना चुका है. मालूम हो कि हाल के दिनों में सामान के दाम स्थिर हैं. अगर यह विधेयक प्रभावी होगा, तो सामान के दाम फिर बढेंगे और मंहगाई को बढ़ावा मिलेगा. सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरुरत है.

बाजार शुल्क लगाने से आम लोगों पर बढ़ेगा बोझ : अनिल गुप्ता

खाद्यान्न व्यापारी अनिल गुप्ता का कहना है कि सरकार द्वारा बाजार शुल्क लागू करने से आम लोगों पर ही अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा. व्यापारी अपने घर से टैक्स नहीं देगा. आम लोगों से ही टैक्स वसूल कर देगा. इससे महंगाई बढ़ेगी. महंगाई बढ़ेगी तो आम लोगों की परेशानी बढ़ना स्वाभाविक है. सरकार का यह निर्णय ना तो सरकार के हित में है और ना ही व्यापारियों के हित में है. सीमावर्ती राज्यों में मंडी टैक्स नहीं होने के कारण वहां खाद्यान्न की कीमत झारखंड से कम है. इसके कारण सीमावर्ती राज्यों पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार से राज्य में खाद्यान्न की आवक बढ़ेगी. इसके कारण जहां सरकार को राजस्व का नुकसान होगा, वहीं व्यापारियों के सामने भी संकट उत्पन्न होगा. सरकार को विधेयक पर फिर से विचार करने की जरुरत है. मंडी टैक्स के प्रभावी होने से सामान के दाम फिर से बढ़ने लगेंगे. जिसका बोझ आम लोगों पर पड़ेगा. इसलिए बहुत जरुरी है कि ऐसे विधेयक को सरकार जितनी जल्द हो वापस ले.

बिल से व्यवसायियों और उपभोक्ताओं दोनों को ही नुकसान : राहुल खंडेलवाल

खुदरा खाद्यान्न व्यवसायी संघ और उत्तरी छोटानागपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य राहुल खंडेलवाल ने कहा कि यह काला कानून है, सरकार को इसे वापस ले लेना चाहिए. इससे व्यवसायी और उपभोक्ता दोनों को नुकसान है. खाद्यान्न पर जितना टैक्स बढ़ेगा, वह बोझ आम जनता पर ही पड़ेगा. व्यवसायियों पर ही बाजार निर्भर है. सरकार को यह समझना चाहिए. पता नहीं सरकार की मंशा क्या है. उसे इस विधेयक पर फिर से विचार करना चाहिए. बिल को लेकर व्यापारियों में काफी रोष है. इससे झारखंड का व्यापार प्रभावित हो रहा है. बाजार शुल्क के लागू होने से सामान के दाम फिर से बढ़ने लगेंगे. अब सभी चीजों के दाम कमोवेश स्थिर हैं, पर विधेयक के प्रभावी होने से मंहगाई फिर से बढ़ने लगेगी.

विधेयक पर सरकार को फिर से विचार करना चाहिए : शरद खंडेलवाल

खुदरा खाद्यान्न व्यवसायी संघ और उत्तरी छोटानागपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स हजारीबाग के सदस्य शरद खंडेलवाल ने कहा कि कृषि शुल्क विधेयक पर सरकार को फिर से विचार करने की जरूरत है. यह व्यवसायियों के हित में नहीं है. इससे व्यवसायी, उनका व्यवसाय, बाजार और उपभोक्ता सब कुछ प्रभावित हो जाएगा. सरकार को व्यवसायियों पर यह बोझ लादने की जरुरत नहीं है. इसलिए इस मंडी टैक्स से किसी का भला नहीं होने वाला है. सामान के दाम बढ़ने का खमियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ेगा. बिल को लेकर सरकार की मंशा ठीक नहीं लग रही है.अगर बिल वापस नहीं लिया गया तो व्यापारी वर्ग आरपार की लड़ाई का मन बना चुके हैं. [wpse_comments_template]

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