Search

अब 25 जनवरी 2022 पर टिकी हैं केबल कंपनी के कर्मचारियों की निगाहें

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2021/12/20cable-300x200.jpg"

alt="" width="300" height="200" /> Jamshedpur : वर्षों से बंद पड़ी इंकैब इंडस्ट्रीज (केबुल कंपनी) के खुलने की उम्मीद से कर्मचारियों व उनके परिजनों में आस नए सिरे से जगने लगी थी . लेकिन कंपनी चलाने को खुद को सक्षम बतानेवाले तीनों बीडर (प्रस्‍तावक)  द्वारा आज सोमवार को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) कोर्ट में अपना प्रस्ताव जमा नहीं करने से मामला 25 जनवरी 2022 तक टल गया . आज एनसीएलटी कोर्ट में बीडरों के वकील हाजिर नहीं हुए जिसके कारण कोर्ट द्वारा सुनवाई की अगली तारीख 25 जनवरी 2022 को रखी गई. कोर्ट द्वारा आइआरपी टिबरीवाल के वकील को निर्देश दिया गया है की वे तीनों बीडरों से संपर्क स्थापित कर सुनवाई की अगली तारीख 25 जनवरी को कोर्ट मे उपस्थित हो कर बीडरों द्वारा अपना प्रस्ताव रखना सुनिश्चित करें ताकि कंपनी को पुनः चालू करने कि प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके.

तीन बीडर कंपनी को पुन: चालू करने के लिए सामने आए हैं

एनसीएलटी ने मार्च 2022 तक रिहाबलिटेशन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है. इसके बाद आइआरपी पंकज टिबरीवाल  द्वारा प्रकाशित विज्ञापन के आधार पर तीन कंपनियां टाटा लांग प्रोडक्ट लिमिटेड, वेदांत लिमिटेड और ए वन इंफास्ट्रक्चर कंपनी लिमिटेड बीडर के रूप में इसे चालू करने के लिए आगे आई हैं. 20 दिसबंर बीडर की ओर से प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित थी. लेकिन जानकारी के अनुसार तीनों कंपनियों ने आज कोर्ट में उपस्थित हो कर अपना प्रस्ताव नहीं रखा है. कोर्ट ने बीडरों को अपना प्रस्ताव रखने का एक मौका देते हुए सुनवाई के लिए 25 जनवरी की तारीख सुनिश्चित की है.

जुलाई 2018 मे एनसीएलटी में गया मामला

इंकैब इंडस्ट्री का मामला एनसीएलटी में चल रहा है. एनसीलटी द्वारा क्रेडिटर्स ऑफ कंपनी द्वारा दिए प्रस्ताव पर 4 जून 2021 को आइआरपी ( इंट्रीम रेसूलेशन प्रोफेशनल ) के तौर पर पंकज टिबरीवाल की नियुक्ति की गई. टिबरीवाल ने 16 जून 2021 से प्रभार ग्रहण किया. एनसीएलटी के अनुसार आइआरपी को ही कंपनी संपत्ति सुरक्षा के साथ ही कंपनी के पुन: चालू करने की जिम्मेवारी है.

1514 कर्मचारियों का कुल बकाया-दो सौ बीस करोड़ सत्तानबे लाख सतहत्तर लाख चार सौ अड़सठ रुपया 

1. टाटा स्टील लि.-सतहत्तर करोड़ छियासठ लाख उनचास हज़ार सात सौ छब्बीस रुपया पैंसठ पैसा 77,66,49,726.65/-, 2. द कस्टोडीयन फेयरग्रोथ फाइनेंस सर्विस लि.- छह करोड़ बहत्तर लाख इकतीस हजार डेढ़ सौ रुपया सत्रह पैसा 6,72,31,150.17/-, 3. भिडे प्लास्टिक इंडस्ट्रीज़ - तीस लाख अड़तालीस हजार आठ सौ पैंतीस रुपया 30,48,835/-, 4. आईसीआईसीआई बैंक- छब्बीस लाख पंचानबे हज़ार रु 26,95,000/-, 5. साक्षी सप्लायर्स-एक लाख अट्ठाईस हज़ार छह सौ छह रुपया 1,28,606/-,  6. क्लासिक कोआपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी- एक लाख चौदह हज़ार एक सौ छियालिस रुपया 1,14,146/-, 7. प्रणव कैटरिंग सर्विस- चौरानबे हज़ार चार सौ पैंतालीस रुपया 94,445/-, 8. कमल मिल्स लि.- एक हज़ार पांच सौ चौवन करोड़ बहत्तर लाख इकहत्तर हज़ार पांच सौ सत्तर रुपया 15,54,72,71,570/-, 9. फसकुआ इनवेस्टमेंट प्रा. लि.- दो सौ छियासठ करोड़ सतहत्तर लाख छियासठ हज़ार चार सौ पचासी 2,66,77,66,485/-, 10.असिस्टेंट कमिशनर स्टेट टैक्स-साठ हजार नौ सौ उनतीस रुपया 60,929/-, 11.एम्प्लॉईस स्टेट इंश्योरेंस कापोरेशन-उनतीस लाख साठ हजार सात सौ बीस रुपया 29,60,720/-, 12.कुल 1514 कर्मचारियों का कुल बकाया-दो सौ बीस करोड़ सत्तानबे लाख सतहत्तर लाख चार सौ अड़सठ रुपया 2,20,97,77,468/-, 13.पेगासस एसेट्स रिकॉन्सट्रक्शन लि- एक सौ सतासी करोड़ छह लाख सैंतीस हज़ार एक सौ अठहत्तर रुपया चौंसठ पैसा 1,87,06,37,178.64/-, 14. एलआइसी-सत्तावन करोड़ सतासी लाख पंद्रह हज़ार नौ सौ उनतीस रुपया 57,87,15,929/-, 15.ओरिएंटल इंश्योरेंस लि.-तीस करोड़ बीस लाख पचासी हज़ार तीन सौ बारह रुपया तीस पैसा 30,20,85,312.30/-, 16.यूनाइटेड इंश्योरेंस लि.-बारह करोड़ तैंतीस लाख सैंतीस हज़ार नौ सौ सात रुपया 12,33,37,907/-, 17.पंजाब नेशनल बैंक -आठ करोड़ सैंतीस लाख तिरपन हज़ार नौ सौ अट्ठावन रुपया 8,37,53,958/-, 18.नेशनल इंश्योरेंस- एक करोड़ छ्त्तीस लाख चौवन हज़ार तीन सौ पैंतालीस रुपया 1,36,54,345/-, 19.अतुल सेठिया-छब्बीस हज़ार तीन सौ तिरसठ रुपया तिहत्तर पैसे 26,363.73/-, 20.डूंगरी देवी सेठिया एण्ड सुनीता सेठिया-छब्बीस हज़ार तीन सौ तिरसठ रुपया तिहत्तर पैसा 26,363.73/-,  21.तरुण सेठिया एण्ड सुनीता सेठिया-छब्बीस हज़ार तीन सौ तिरसठ रुपया तिहत्तर पैसा 26,363.73/-, 22.सुनीता सेठिया एण्ड तरुण सेठिया- छब्बीस हज़ार तीन सौ तिरसठ रुपया तिहत्तर पैसा 26,363.73/-, 23.आईसीआईसीआई बैंक- दो सौ पचास करोड़ पचहत्तर लाख सत्तर हज़ार पांच सौ चौदह रुपया 2,50,75,70,514/-

केबुल कंपनी के पास करोड़ों की परिसंपत्ति

इंडियन केबुल कंपनी के पास जमशेदपुर के अतिरिक्त कोलकाता, दिल्ली, पुणे, मुंबई जैसे शहरों में करोड़ों की अचल संपत्ति है. इसमें कोलकाता में 2500 वर्ग फीट, दिल्ली में 4500 वर्ग फीट, पुणे में लगभग 4000 वर्ग फीट, मुंबई में 2500 वर्ग फीट जमीन के अलावा जमशेदपुर में कंपनी परिसर कई एकड़ मे फैला है.

1920 में ब्रिटिश कंपनी ने की स्थापना

वर्ष 1920 में गोलमुरी में ब्रिटिश इंसुलटेड कैलेंडर कंपनी लिमिटेड द्वारा इंडियन केबुल कंपनी की शुरुआत की गई. तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने ग्रांट लांड़ ऐक्ट 1913 के तहत 15 जुलाई 1920 को कंपनी को 147.95 एकड़ जमीन उपलब्ध करायी थी. उसके बाद 18 फरवरी 1943 को 10.5 एकड़, 2 नवबंर 1964 को 5.25 एकड़ , 2नवबंर 1964 4.15 एकड़ और 10 जुलाई 1968 को 8.5 एकड़ जमीन तत्कालीन सरकारों ने कंपनी को उत्पादन सहित रिहाइशी कार्यों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध करायी. केवल 10.5 एकड़ ही रिहाइशी व कार्यालय भवन के लिए इस्तेमाल किया गया, शेष भूमि कंपनी के उत्पादन अथवा कंपनी परिसर के लिए इस्तेमाल की गई.

कंपनी ने 1970 में 52 प्रतिशत शेयर वित्‍तीय संस्‍थानों को सौंप दिया

ब्रिटिश इंसुलटेड कैलेंडर कंपनी लिमिटेड द्वारा 1970 में अपने 100 प्रतिशत शेयर का 52 प्रतिशत हिस्सा वित्त मंत्रालय भारत सरकार के अधीन कार्यरत वित्तीय संस्थानों (आइसीआइसीआइ,यूटीआइ,एलआइसी,जीआइसी,यूटीआइ म्यूचूअल फंड) को सौंप दिया गया. 1970 से 1984 तक वित्तीय संस्थानों द्वारा कंपनी का संचालन किया गया.उस समय तक कंपनी मुनाफे में रही और सभी शेयर धारकों को ठीकठाक लाभांश भी प्राप्त हुआ.

सितंबर 1993 में पहली बार बंद हुई कंपनी

1984 में वित्तीय संस्थानों ने 10 प्रतिशत वाले शेयर धारक काशीनाथ तपड़िया पर अपना विश्वास जता कंपनी का प्रबंधन सौंप दिया.यही इंडियन केबुल कंपनी का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ और कंपनी के प्रदर्शन में गिरावट की शुरुआत हुई. महज सात वर्षों में मुनाफे में चल रही कंपनी बंद होने के कगार पर आ गई. यहां तक की कंपनी में कार्यरत कामगारों को वेतन भी मिलना मुहाल हो गया. सितंबर 1993 को बंद हो गई. उस वक्त कंपनी से लगभग 4000 कर्मचारी जुड़े थे, जो कंपनी के बंद होने के कारण भुखमरी के कगार पर आ गए. कंपनी 1996 तक बंद रही.

अक्‍टूबर 1996 में दोबारा खुली कंपनी मार्च 2000 में बंद हो गई

अक्टूबर 1996 में मारीशस की कंपनी लीडर इनवर्सल लिमिटेड ने कंपनी को पुन: शुरू किया तो लोगों को आस जगी कि अब उनके दिन फिरेंगे लेकिन यह मरीशस की कंपनी लीडर इनवर्सल लिमिटेड का मकसद कंपनी को चलाना नहीं था बल्कि कंपनी की बची हुई पूंजी को हड़पना था. इस दौरान अक्टूबर 1996 से मार्च 1999 तक कर्मचारियों को समान्य वेतन प्रबंधन द्वारा दिया गया.पुन: मार्च 2000 में कंपनी बंद हो गयी. अप्रैल 2000 में कंपनी का मामला बाइफर कोर्ट में चल गया, जो 2016 अक्टूबर तक चला.

केबुल कंपनी में नहीं रुक रही है चोरी की घटनाएं

कंपनी परिसर में बढ़ती चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से टिबरीवाल द्वारा कंपनी परिसर की सुरक्षा के लिए जुलाई 2021 से नई सिक्युरिटी एजेंसी की नियुक्ति की गयी है, लेकिन कंपनी परिसर में चोरी की घटनाएं रुकने का नाम ही नहीं ले रही है. पुलिस चोरी की घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करती रहती है. गोलमुरी थाना प्रभारी अरविन्द कुमार ने बताया की इंडियन केबल कंपनी में 2018 से 2021 तक कुल 26 चोरी के मामले दर्ज हुए हैं, पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर चोरी पर अंकुश लगाने की कोशिश करती है. उन्होंने बताया कि केबुल कंपनी में आए दिन चोरी की घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन इस संबंध में कोई मामला दर्ज करवाने नहीं आता है.

कंपनी की संपत्ति की सुरक्षा मात्र दो दर्जन सिक्युरिटी गार्ड पर निर्भर

जमशेदपुर के गोलमुरी थाना अंतर्गत स्थित इंकैब इंडस्ट्री कंपनी परिसर लगभग 166 एकड़ में फैला हुआ है, कंपनी कि चालू हालत में 85 सिक्युरिटी गार्ड कंपनी कि संपत्ति की रक्षा में तैनात रहते थे, अब कंपनी बंद पड़ी है. कंपनी परिसर में किसी तरह की आवाजाही नहीं है.ऐसे में महज दो दर्जन प्राइवेट सिक्युरिटी के भरोसे कंपनी की संपत्ति की सुरक्षा कैसे संभव हो सकती है. यह अपने आप में बड़ा सवाल है. एनसीएलटी कोर्ट के अनुसार कंपनी की संपत्ति की सुरक्षा की जवाबदेही पंकज टिबरिवाल की है. स्थानीय स्तर पर किसी व्यक्ति को अधिकृत नहीं किए जाने के कारण कंपनी परिसर में चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने में असमर्थ है. [wpse_comments_template]  

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp