- द इटकी ट्यूबरकुलोसिस सेनेटोरियम (रेगुलेशन ऑफ बिल्डिंग) एक्ट-1951 को बजट सत्र-2023 में खत्म करेगी हेमंत सरकार
- अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी भवन बनाने के लिए जरूरी है बिहार सरकार के समय पारित एक्ट को वापस लेना
- स्वास्थ्य विभाग के इस एक्ट को वापस लेने से पहले कैबिनेट से पास कराना होगा, फिर उसे विधानसभा पटल पर रखा जाएगा. बुधवार को है कैबिनेट बैठक
Nitesh Ojha Ranchi : राजधानी के इटकी सेनेटोरियम क्षेत्र में अब किसी भी तरह के निर्माण काम में कोई भी बाधा नहीं होगी. ऐसा इसलिए क्योंकि बजट सत्र– 2023 में राज्य सरकार ‘द इटकी ट्यूबरकुलोसिस सेनेटोरियम (रेगुलेशन ऑफ बिल्डिंग) एक्ट-1951’ को खत्म करेगी. स्वास्थ्य विभाग की इस एक्ट को खत्म करने का कारण अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी भवन का निर्माण कराना है. खत्म करने से पहले सरकार पहले इस एक्ट को कैबिनेट में पेश करेगी. उसके बाद इसे विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा. बता दें कि बुधवार को कैबिनेट की बैठक बुलायी गयी है.
क्यों वापस लिया जा रहा एक्ट – 1951
अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी भवन रांची स्थित इटकी टीवी सेनेटोरियम में बनाया जाना है. यूनिवर्सिटी का भवन बनाने में यह एक्ट समस्या बन रही है. ‘द इटकी ट्यूबरकुलोसिस सेनेटोरियम (रेगुलेशन ऑफ बिल्डिंग) एक्ट-1951’ में ‘सेनेटोरियम क्षेत्र’ का अर्थ इटकी ट्यूबरकुलोसिस सेनेटोरियम से तीन मील यानी करीब 5 किलोमीटर के दायरे में शामिल क्षेत्र से हैं. एक्ट के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति, सेनेटोरियम लोकल ऑथोरिटी की पूर्व स्वीकृति के बिना, सेनेटोरियम क्षेत्र में किसी भी भूमि पर कोई भवन नहीं बनाएगा या पुनः निर्माण नहीं कराएगा. भवन निर्माण या पुनः निर्माण की मंजूरी मांगे जाने पर ऑथोरिटी से अनुमति देने से इंकार भी कर सकता है. यानी इस एक्ट को वापस लेने के बाद सरकार यहां किसी तरह का कोई भी निर्माण काम करा पाएगी.
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन करेगा 3000 करोड़ रुपए का निवेश
बता दें कि हेमंत सरकार ने इटकी सेनेटोरियम क्षेत्र में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को 150 एकड़ जमीन देने का फैसला किया है. फाउंडेशन को भूमि 99 साल के लीज पर दी जानी है. सबसे बड़ी बात यह है कि यूनिवर्सिटी के जरिए अजीम प्रेमजी फाउंडेशन राज्य में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा. [wpse_comments_template]
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