Vinit Abha Upadhyay Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है कि पत्नी के रूप में साथ रह रही महिला को भरण पोषण (मेंटेनेंस) का अधिकार लेने के लिए शादी का पुख्ता सबूत देने की जरुरत नहीं है. खासकर जब साक्ष्य रिकॉर्ड के रूप में उपलब्ध हो. दरअसल रांची सिविल कोर्ट स्थित फैमिली कोर्ट ने मेंटेनेंस से जुड़े एक मामले में यह आदेश दिया था कि याचिकाकर्ता अपनी पत्नी को 5 हजार रुपए प्रति माह भरण पोषण के लिए देगा. फैमिली कोर्ट के इस आदेश को पति राम कुमार रवि ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. भरण-पोषण के लिए दायर याचिका में पत्नी की ओर से कहा गया कि उसका पति 25,000 रुपये की मासिक आय के साथ मोबाइल रिपेयरिंग और रियल एस्टेट का कारोबार करता है. वही दिव्यांग आरक्षण केटेगरी में उसे सरकारी नौकरी भी मिल गई है, जिसके बाद उसने अपनी पत्नी को छोड़ दिया. जबकि बचाव पक्ष ने महिला को अपनी पत्नी मानने से इंकार करते हुए यह कह दिया कि उसकी शादी उस महिला से नहीं हुई है.
अब पत्नी को सभी मामलों में मेंटेनेंस लेने के लिए शादी का सबूत देने की जरुरत नहीं - झारखंड हाईकोर्ट
Last Updated: Jan 25, 2024 12:00 AM (IST)