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NSUI ने नीड बेस्ड नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने के लिए सीएम को लिखा पत्र

 
Ranchi: NSUI के राज्य उपाध्यक्ष अमन अहमद ने सीएम हेमंत सोरेन को नीड बेस्ड नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने के लिए शुक्रवार को सीएम को पत्र लिखा. इसमें लिखा है कि वर्तमान में रांची विश्विद्यालय द्वारा नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति प्रक्रिया संचालित है. अभ्यर्थियों का शैक्षणिक दस्तावेज सत्यापन हो रहा है. इस नियुक्ति में यूजीसी की अहर्ता संबंधी नियमावली का अनुसरण किया जा रहा है. जबकि यूजीसी ने स्वयं ही राज्य सरकार एवं राज्य विश्वविद्यालयों से कहा है कि अपने राज्य में संचालित विश्व विद्यालय में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति के लिए राज्य लोक सेवा आयोग नियुक्ति नियमावली बना सकती है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2025/02/5-13.jpg">

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alt="" width="600" height="400" /> इसी नियमावली से नियुक्ति की जानी चाहिए. इसके तहत झारखंड लोक सेवा आयोग ने नियुक्ति नियमावली बनाई और अनुसरण के लिए राज्य सरकार को भेज दिया. वर्तमान में झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का पद रिक्त हैं. कई पदाधिकारी का पद रिक्त है. स्थाई नियुक्ति नहीं हो रही है. इसलिए सरकार को अनुबंध आधारित नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति करनी पड़ रही है. लेकिन झारखंड का ब्यूरोक्रेसी स्थानीय आदिवासी एवं मूलवासी है. इसकी भावनाओं को दरकिनार किया जा रहा है. जेपीएससी द्वारा निर्मित नियमावली को नहीं मान रही है औऱ यूजीसी की नियमावली के तहत अनुबंध आधारित नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति हो रही है, जो राज्य के आठ विश्वविद्यालयों में चल रही है.

विवि में यूजीसी नियमावली से 97% अभ्यर्थी बाहरी

विश्वविद्यालय में यूजीसी की नियमावली से 97% अभ्यर्थी राज्य से बाहर के हैं. जिनका शैक्षणिक दस्तावेज का सत्यापन किया जा रहा है. इस नियुक्ति में झारखंड के आदिवासी मूलवासी अभ्यर्थी बाहर हो जा रहे हैं. जिसकी चिंता ना तो शिक्षा मंत्री को है. ना मुख्यमंत्री को है, ना ही यहां के ब्यूरोक्रेसी को है.

सहायक प्राध्यापक नियुक्ति में आदिवासी मूलवासी को नहीं मिल रहा अवसर

संगठन ने मांग करते हुए लिखा है कि झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा तैयार नियमावली के तहत ही यह नियुक्ति हो, अन्यथा इस नियुक्ति को पूर्णतः रद्द कर दिया जाए. ताकि स्थानीय अभ्यर्थियों को नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापक नियुक्ति में उचित अवसर मिल सके. इस नियुक्ति में कई विसंगतिया हैं. कुलपति के रिश्तेदार का चयन ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में किया गया है. जबकि वह झारखंड से नहीं बल्कि मुजफ्फरपुर की हैं. जब विश्वविद्यालय का कुलपति ही अपने रिश्तेदार को सहायक प्राध्यापक बनाने के लिए नियमों उल्लघंन कर सकता है. तो यह कैसे कहा जाएगा कि यहां के आदिवासी मूलवासियों को इस नियुक्ति में उचित अवसर प्रदान किया जाएगा. यह नियुक्ति 100 फीसद सेटिंग का है. जिससे स्थानीय आदिवासी मूलवासी को नौकरी से वंचित रखा जा रहा है.

शिक्षा की गुणवत्ता हो रही है प्रभावित

राज्य के बाहर के अभ्यर्थियों को नौकरी दी जा रही है.भविष्य में किसी भी विश्वविद्यालय में गेस्ट, अनुबंध इत्यादि जैसी नियुक्ति प्रक्रिया नहीं किया जाए, शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन मांग किया है कि कि उक्त नियुक्ति प्रक्रिया को अविलंब स्थगित कर नियुक्ति को रद्द किया जाए इसे भी पढ़ें – LG">https://lagatar.in/on-instructions-of-lg-acb-team-reached-kejriwals-residence-to-investigate-the-allegations-of-bjps-offer-of-rs-15-crore-each/">LG

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