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EXCLUSIVE: पेयजल घोटाले की रकम से अफसरों ने उपहार के रूप में लिये जेवर, आइफोन और मैकबुक

Shakeel Akhter Ranchi: पेयजल विभाग के अफसरों ने घोटाले की रकम में से बतौर उपहार जेवर, आइफोन और मैकबुक लिये. कार्यपालक अभियंता द्वारा उसे नौकरी से बर्खास्त कराने का डर दिखा कर घोटाले की रकम ट्रेजरी से उसके बैंक खाते में भेजी जाती थी.  इस काम के लिए ट्रेजरी ऑफिसर को 5 प्रतिशत की दर से कमीशन का भुगतान किया जाता था. संतोष ने अपने ऊपर लगे आरोपों के जवाब में विभाग को भेजे गये अपने जवाब में इन तथ्यों का उल्लेख किया है. साथ ही घोटाले की दूसरी घटनाओं को भी विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के रूप में पेश किया है.
संतोष ने विभाग को भेजे गये अपने जवाब में ट्रेजरी से निकासी की प्रक्रिया उल्लेख किया है. इसमें यह कहा गया है कि बिल जेनरेट करने से पारित करने में तीन लोग (बिल सहायक, लेखा पदाधिकारी, कार्यपालक अधिकारी) शामिल होते हैं. 
इन तीनों व्यक्तियों द्वारा बिल बनाने और उसकी जांच करने का काम पूरा करने के बाद चेक बनाने के लिए उसके (संतोष कुमार)  पास जाता था. चेक बनने के बाद उस पर कार्यपालक अभियंता और संतोष कुमार का हस्ताक्षर करते थे. इसके बाद इसे निकासी के ट्रेजरी भेजा जाता था. संतोष कुमार ने अपने पत्र में लिखा है कि जिस 2.71 करोड़ की फर्जी निकासी के मामले में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है, उस बिल को बिल क्लर्क संजय कुमार ने जेनरेट किया था.  लेखा पदाधिकारी सुरेंद्र पाल मिंज और कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार सिंह के अनुमोदन के बाद उसके पास चेक बनाने के लिए भेजा गया था.  चेक पर कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार सिंह और उसके हस्ताक्षर के बाद छह चेक के माध्यम से 2.71 करोड़ की निकासी की गयी. निकासी की रकम उसके (संतोष) के बैंक खाते में भेजी गयी. 
ट्रेजरी से बिल निकासी के लिए ट्रेजरी ऑफिसर मनोज कुमार को 5 प्रतिशत राशि बतौर कमीशन दी जाती थी. कमीशन की रकम कार्यपालक अभियंता द्वारा उसे नकद दी जाति थी, ताकि ट्रेजरी ऑफिसर को दिया जा सके. 
कमीशन की रकम ट्रेजरी के सहायक लेखापाल शैलेंद्र कुमार के पास जमा किया जाता था. कमीशन की रकम का भुगतान करने के बाद निकासी के लिए ट्रेजरी में बिल भेजा जाता था. इसके बाद ट्रेजरी ऑफिसर द्वारा बिल पास कर उसे संतोष के बैंक खाते में भेजा जाता था.  संतोष कुमार ने विभाग को भेजे गये अपने पत्र में यह भी लिखा है कि ट्रेजरी से उसके बैंक खाते में पैसा जमा होने के बाद तत्कालीन कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार सिंह के निर्देश पर पैसों की निकासी की जाती थी. 
प्रभात कुमार के निर्देश पर विभाग के बड़े अफसरों सहित अन्य लोगों को उपहार के रूप में देने के लिए जेवर, आईफोन, मैकबुक, लैपटॉप आदि की ख़रीद की जाती थी. खाते से नकद निकासी के बाद प्रभात कुमार उपहार देने के नाम पर इन चीजों की खरीद उससे (संतोष) से करवाते थे. 
संतोष ने यह भी आरोप लगाया है कि किसी काम में बची हुई राशि की निकासी फर्जी काम दिखा कर किया जाता है. इस रकम का 20 प्रतिशत अधीक्षण अभियंता को मिलता है. बाकी 80 प्रतिशत दूसरे इंजीनियरों व अधिकारियो के बीच बांटा जाता है.  संतोष कुमार ने मेसर्स आनंद इंटरप्राइजेज को दिये गये गये काम में बची हुई राशि 28.94 लाख की निकासी को उदाहरण के तौर पर पेश किया है.  संतोष कुमार ने अपने पत्र में प्रभात कुमार द्वारा 2.71 करोड़ के अलावा 3.01 करोड़ रुपये की निकासी करवाने का भी उल्लेख किया है. 
इस मामले में संतोष ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रभात कुमार ने इंधन और आकस्मिकता मद से फर्जी वाउचरों के सहारे 3.01 करोड़ रुपये की निकासी करवायी. इस रकम की निकासी भी संतोष के खाते के माध्यम से की गयी. इस निकासी में 99 प्रतिशत में प्रयुक्त पेई आइडी ( payee ID) डोरंडा ट्रेजरी से संबंधित है, जो उसका नहीं है. 
संतोष ने अपने पत्र में यह आरोप भी लगाया है कि 3.01 करोड़ की निकासी में उसके खाते का इस्तेमाल किये जाने के बाद कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार ने उससे मंहगे उपहार लिये. संतोष कुमार ने अपने जवाबी पत्र में योजनाओं में की जानेवाली गड़बड़ी का उदाहरण पेश करते हुए इसमें कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार और कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर की भूमिका का उल्लेख किया है. 
इसमें कहा गया है कि रुक्का से संबंधित एक काम मेसर्स प्रवीण कुमार को मिला था. इस काम के लिए इकरारनामे की अंतिम तिथि 2/1/2019 थी. कंपनी को इकरारनामा करने के लिए इस तिथि तक 5.25 लाख रुपये का सिक्यूरिटी डिपोजिट देना था. लेकिन कंपनी ने जो सिक्यूरिटी डिपोजिट दिया उस पर जारी करने की तिथि 4/1/2019 लिखी थी. 
ऐसी स्थिति में नियमानुसार मेसर्स प्रवीण जैन के साथ इकरारनामा नहीं करना चाहिए था. लेकिन प्रभात कुमार ने बैक डेटिंग करते हुए 2/1/2019 की तिथि में इकरारनामा किया. इसके बाद मेसर्स प्रवीण जैन को मिले काम के एवज में 4.90 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. इस काम का अंतिम बिल, कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर द्वारा मेसर्स प्रवीण जैन के करेंट अकाउंट के बदले टाटीसिलवे पोस्ट ऑफिस में खोले गये बचत खाता (010025742990) में किया गया, जो पूर्णतः गलत है.

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