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हे भगवान- ऐसे मित्र व ऐसी मित्रता किसी को ना मिले

एक तरह से अमेरिका में रह रहे और जाने वाले प्रोफेशनल्स को घुसपैठिया कह दिया गया. घुसपैठिया किसे कहते हैं, यह तो आप सब जानते ही हैं. ऐसे ही मित्रों और ऐसी ही मित्रता को देखते हुए कहा गया है- हे भगवान- ऐसे मित्र व ऐसी मित्रता किसी को ना मिले. बाकी गर्व करते रहिये. डंका तो बज ही रहा है.
 
  • हैप्पी बर्थ डे माई फ्रेंड के बाद ट्रंप का झटके पर झटका

मीडिया लहालोट : 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्म दिन पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन करके शुभकामना संदेश दिया. ट्रंप ने मोदी को तेजस्वी काम करने वाला बताया और यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के प्रयासों में भारत के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया.

 

जवाब में मोदी ने भी सोशल मीडिया पर ट्विट कर लिखा- धन्यवाद, मेरे मित्र, राष्ट्रपति ट्रंप. आपकी तरह ही मैं (मोदी) भी भारत-अमेरिका के बीच व्यापक और वैश्विक साझेदारी को नई उंचाईयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं. हम यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने की दिशा में आपके प्रयासों का समर्थन करते हैं.

 

इसके बाद तो मीडिया के धुरंधर कूद ही पड़े. मोदी-ट्रंप की दोस्ती पर किस्से-कहानी की कल्पनाओं का दौर ही शुरु हो गया. देश के लोगों को बेवकूफ बनाने का सिलसिला चलता रहा. 

 

चाबहार पोर्ट : 19 सितंबर- अमेरिका ने ईरान के चाबहार पोर्ट को दी गई छूट को खत्म करने का आदेश जारी कर दिया. आदेश 29 सितंबर से प्रभावी होगा. यह छूट भारत को वर्ष 2018 में मिली थी. इस छूट के खत्म होने से भारत को बड़ा आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है. 

 

चाबहार पोर्ट की वजह से भारत अफगानिस्तान समेत मध्य एशिया तक आसानी से अपना कारोबार कर पा रहा था. भारत के लिए यह क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण था. छूट को वापस लेने की वजह से भारत को आर्थिक, सामरिक और रणनीतिक तौर पर बड़ा नुकसान होने का अनुमान है. 

 

एच-वनबी वीजा : 20 सितंबर-अमेरिका ने एच-वनबी वीजा पर भारी शुल्क लगा दिया है. अब एच-वनबी वीजा के लिए अप्लाई करने वाले या रिन्यूअल कराने वालों को एक लाख डॉलर, यानी करीब 88 लाख का शुल्क देना होगा. अमेरिका के इस फैसले का भारत के करीब दो लाख आईटी प्रोफेशनल्स और आईटी कंपनियों पर असर पड़ेगा. क्योंकि अभी तक अमेरिका में 70-73 प्रतिशत एच-वनबी वीजा सिर्फ भारतीयों को मिलते हैं.

 

वर्ष 2024 में ही दो लाख आईटी प्रोफेशनल्स ने यह वीजा लिया था. अब अमेरिकी कंपनियां भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को नौकरी देने से कतरायेंगी. साथ ही भारत की बड़ी आईटी कंपनियों पर भी इसका असर पड़ेगा. एक तरह से देखा जाये कि भारतीय प्रोफेशनल्स का अमेरिका जाना अब नामुमकिन बना दिया गया है. अमेरिका जाकर रिसर्च करने वाले छात्रों का भी अब सपना अधूरा रह जायेगा. 


तो यह स्थिति है भारत-अमेरिका संबंधों की. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों एक-दूसरे को दोस्त बताते हैं. एक-दूसरे की तारीफ करते हैं. दोनों देशों के मीडिया इन दोनों की दोस्ती पर लहालोट रहती है. लेकिन यह कैसी दोस्ती है कि जन्म दिन के दिन हैप्पी बर्थ डे माई फ्रेंड कहने के तीन दिन के भीतर अमेरिका ने भारत को तीन झटके दे दिये. यानी झटके पर झटके. एक तरह से अमेरिका में रह रहे और जाने वाले प्रोफेशनल्स को घुसपैठिया कह दिया गया. घुसपैठिया किसे कहते हैं, यह तो आप सब जानते ही हैं. ऐसे ही मित्रों और ऐसी ही मित्रता को देखते हुए कहा गया है- हे भगवान- ऐसे मित्र व ऐसी मित्रता किसी को ना मिले. बाकी गर्व करते रहिये. डंका तो बज ही रहा है.

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