- बड़ी आफत : पेयजल विभाग के दावे के उलट शहरवासियों को मिल रहा गंदा पानी
- पेयजल विभाग और नगर निगम कर रहे फेंकाफेंकी, एक-दूसरे को ठहरा रहे जिम्मेवार
- हर रोज 43 मिलियन गैलन पानी की सप्लाई शहर के लोगों को की जा रही है
Tarun Kumar Chaubey Ranchi : भीषण गर्मी के बीच राजधानी के अधिकांश इलाकों में जलस्तर काफी नीचे चला गया है. शहर के ज्यादातर बोरवेल और चापाकल फेल हो चुके हैं. कुछ बोरवेल और चापाकल में सुबह-शाम पानी आ रहा है, उससे लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं. उधर, पेयजल विभाग द्वारा शुद्ध पेयजलापूर्ति के दावे के बावजूद शहरवासियों को पीला, काला और बदबूदार पानी की आपूर्ति की जा रही है. यह समस्या शहर के करीब-करीब हर वार्ड की है. जार का पानी न खरीद पाने वाले आम लोग गंदा और पीला बदबूदार पीने को विवश हैं. लोगों की शिकायत है कि जिस पानी की सप्लाई की जा रही है, वह पीने लायक तो नहीं ही है, कपड़ा धोने लायक भी नहीं है.

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पानी से आती है दुर्गंध, फिटकिरी से करते हैं सफाई
पेयजल विभाग के शुद्ध पानी सप्लाई के दावे की सच्चाई जानने के लिए सोमवार को शुभम संदेश की टीम ने लोहराकोचा लालपुर, मिस्त्री लेन,अपर बाजार, रातू रोड, हरमू, बरियातू, कोकर, मोरहाबादी इलाके में जाकर देखा, तो पाया कि अधिकांश घरों में पीला-मटमैला या काला बदबूदार पानी नल में आ रहा है. बदरंग पानी से बदबू भी आती है. इस पानी को पी तो नहीं सकते , अन्य कोई घरेलू काम (कपड़ा-बर्तन धोने) में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. कुछ लोगों ने बताया कि सप्लाई के पानी से जो कपड़े धोते हैं, उससे भी दुर्गंध आती है. लोग सप्लाई के पानी में फिटकरी डाल कर साफ करते हैं, फिर इस्तेमाल करते हैं. लोगों ने बताया कि पेयजल विभाग और नगर निगम से लगातार शिकायत करने के बाद भी पानी के रंग और बदबू में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं आ रहा है. करोड़ों की टैक्स वसूली, सुविधा शून्य
शहर के लोगों ने पिछले साल करीब 5 करोड़ 87 लाख रुपए वाटर टैक्स के रूप में नगर निगम में जमा कराए. लेकिन पानी की गुणवत्ता से जुड़ी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है. शिकायत करने पर नगर निगम के अफसर कहते हैं कि हम पानी की सप्लाई नहीं करते, हमारा काम सिर्फ टैक्स वसूलना है. उधर पेयजल विभाग के अधिकारी गंदा पानी सप्लाई के लिए नगर निगम को जिम्मेवार ठहराते हैं. दोनों एक-दूसरे पर कर रहे फेंका-फेंकी.
निगम आम लोगों की दिक्कत समझने को तैयार नहीं
लोहरा कोचा के निवासी राजेश लोहरा ने बताया कि उन्होंने कई बार निगम कार्यालय जा कर गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायत की है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं. बार बार जाने पर बस इतना जवाब मिला की पानी की सप्लाई पेयजल विभाग करता है, वहां जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं. पेयजल विभाग और नगर निगम आम लोगों की दिक्कत समझने को तैयार नहीं हैं. आखिर रिपोर्ट में पानी शुद्ध कैसे हुआ
बता दें कि लगातार आ रही शिकायतों के बीच हाल ही में पेयजल एवं स्वछता विभाग और यूनिसेफ ने रुक्का के दो और गोंदा जलशोधन केंद्र से आपूर्ति किए जा रहे पानी की गुणवत्ता की जांच की, तो उसमें पानी की गुणवत्ता को मानक पर खरा बताया. कहा गया कि तीनों सम्प से सप्लाई किया जा रहा पानी पूरी तरह शुद्ध है और इसके सेवन से स्वास्थ्य को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा. पानी की जांच के बाद कहा गया कि रुक्का के पुराने और नए जलशोधन केंद्र से भेजे जा रहे पानी का पीएच मानक 7.27 और 7.78 मिला है. वहीं गोंदा जलशोधन केंद्र के सम्प से लिए गए नमूने में जांच के बाद पीएच 7.23 मिला. मानक के अनुसार आपूर्ति के पानी में टीडीएस का स्तर 500 से 2000 और पीएच लेवल 6.30 से 8.30 के बीच तय है.
बड़ा सवाल
जैसा कि पेयजल विभाग का कहना है कि शहर में शुद्ध पानी की आपूर्ति की जा रही है, तो ये गंदा, पीला और बदबूदार पानी घरों के नलों में कहां से आ रहा है. ऐसा नहीं कि कभी-कभी गंदा पानी नल में आता हो, इन दिनों तो लगातार ऐसा ही हो रहा. पानी से काई का बदबू आ रहा है.
पेयजल विभाग की सफाई सप्लाई लाइन में लिकेज के कारण गंदा पानी मिल रहा
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता राधेश्याम रवि का कहना है कि रुक्का व गोंदा के पानी की जांच करायी गयी थी. पानी में किसी तरह की अशुद्धि नहीं है, वितरण लाइन में लिकेज के कारण लोकर स्तर पर पानी गंदा हो रहा है, जिसे देखने की जिम्मेवारी नगर निगन की है, क्योंकि निगम ही वाटर टैक्स की वसूली करता है.
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