Vinit Upadhyay
Ranchi /New Delhi : छठी जेपीएससी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है . सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच और डबल बेंच के आदेश को निरस्त कर दिया है. इससे 326 अधिकारियों को राहत मिली है, जबकि 60 अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने JPSC द्वारा की गई पहली रिकमंडेशन को सही करार दिया है. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने रिट कोर्ट में लिए गए स्टैंड को भी सही करार दिया है. रिट कोर्ट में JPSC के अधिवक्ता संजोय पिपरवाला ने पक्ष रखा था. इस फ़ैसले से इन 60 अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है. 28 जुलाई को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस दौरान सभी पक्षों के वकीलों की बहस को कोर्ट ने सुना है.
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हाईकोर्ट ने रिजल्ट को खारिज कर दिया था
उल्लेखनीय है कि झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. रविरंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की डबल बेंच ने एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए छठी जेपीएससी के रिजल्ट को खारिज कर दिया था. अदालत ने एलपीए 204 और 207 पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया था. कोर्ट ने 7 जून 2021 को छठी जेपीएससी की नई मेरिट लिस्ट जारी करने का फैसला दिया था. जिसके बाद यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष पहुंचा.
शीर्ष अदालत ने प्रार्थियों के आग्रह को स्वीकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा है कि जिन अधिकारियों का चयन हुआ है, वे दो साल से नौकरी कर रहे हैं. उन्होंने प्रोवेशन की अवधि भी पूरी कर ली है. जो भी नियम बनाए गए थे, वह सरकार और जेपीएससी के थे. इसमें प्रार्थियों की गलती नहीं थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश से ये उम्मीदवार प्रभावित हो गए. हाईकोर्ट ने सिर्फ छठी जेपीएससी और प्रावधानों की दो धाराओं को ही ध्यान में रख कर फैसला सुनाया, जिसका शिकार इन उम्मीदवारों को होना पड़ा है. अब जबकि सरकार ने सातवीं जेपीएससी की परीक्षा ले ली है और नयी नियमावली भी तैयार कर ली है, ऐसे में इसे वृहद परिप्रेक्ष्य में देखना होगा. ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश को उचित नहीं माना जायेगा. उक्त आदेश के साथ ही शीर्ष अदालत ने प्रार्थियों के आग्रह को स्वीकार किया है.
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