New Delhi : प्रयागराज महाकुंभ पर लोकसभा में पीएम मोदी के आज के संबोधन पर लोकसभा नेता राहुल गांधी ने कहा, हम पीएम मोदी की बात का समर्थन करते हैं, कुंभ हमारा इतिहास और संस्कृति है. लेकिन हमारी एकमात्र शिकायत यह है कि पीएम ने कुंभ में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि नहीं दी. कहा कि महाकुंभ में गये युवा भी पीएम मोदी से एक और चीज चाहते हैं, वह है रोजगार. लोकतांत्रिक ढांचे के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष को बोलने का मौका मिलना चाहिए, लेकिन वे हमें बोलने नहीं देंगे. यह नया भारत है.
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में महाकुंभ के भव्य आयोजन पर अपना बयान दिया
प्रधानमंत्री मोदी ने आज मंगलवार को संसद में महाकुंभ के भव्य आयोजन पर अपना बयान दिया. महाकुंभ की सफलता पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि हम सब जानते हैं कि गंगा को धरती पर लाने के लिए एक भगीरथ प्रयास हुआ था, वैसा ही महाकुंभ के महाप्रयास में भी दिखा. लेकिन पीएम मोदी की स्पीच समाप्त होते ही रायबरेली सांसद राहुल गांधी के साथ-साथ पार्टी के अन्य नेताओं ने उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री सदन में बोलने वाले थे, यह जानकारी समय रहते नहीं दी गयी.
महाकुंभ पर विपक्ष को बोलने नहीं दिया गया, ये कैसा न्यू इंडिया है?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पूरे मसले पर विपक्ष को नहीं बोलने दिया गया. ये कैसा न्यू इंडिया है? राहुल गांधी ने इसी के साथ ये भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को बेरोजगारी के बारे में भी बोलना चाहिए था, लेकिन उन्होंने इस पर कुछ नहीं बोला. पीएम मोदी को कुंभ में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि देनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के क्रम में राहुल गांधी ने कहा कि कुंभ हमारी परंपरा है, इतिहास है, संस्कृति है. लेकिन हमें इस बात की शिकायत है कि प्रधानमंत्री ने कुंभ में जान गंवाने वालों के बारे में कुछ नहीं कहा. मृतकों को श्रद्धांजलि तक नहीं दी.
कुंभ पर चर्चा की हमारी मांग को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया: वेणुगोपाल
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि जब बजट सत्र शुरू हुआ तो हम पहले दिन से ही कुंभ पर चर्चा की मांग कर रहे थे. उन्होंने हमें इस पर चर्चा करने का मौका नहीं दिया. उन्होंने कुंभ पर चर्चा की हमारी मांग को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया. बिना किसी पूर्व सूचना के प्रधानमंत्री ने कभी भी कोई भी बयान दिया, लेकिन एक प्रक्रिया है कि सदन को इसके बारे में सूचित किया जाना चाहिए. सदन को सूचित किये बिना अचानक प्रधानमंत्री ने आकर कुंभ के बारे में बयान दिया. इसके पीछे क्या गोपनीयता है? कहा कि विपक्ष के नेता भी इसमें योगदान देना चाहते थे. यह सदन की परंपरा है.यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है.विपक्ष के नेता को बोलने की अनुमति नहीं है.मुझे नहीं पता कि वे इन सभी एजेंडों के साथ क्यों आ रहे हैं.वे नहीं चाहते कि सदन सुचारू रूप से चले.
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