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दशहरे के अवसर पर पीएम मोदी बोले-'राष्ट्र तभी प्रगति करता है, जब उसके पास आत्मसम्मान की भावना हो'

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे सामने विकसित भारत का लक्ष्य है, हमारे सामने आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य है. हमें जनशक्ति से जनकल्याण करते हुए जनता की हर आकांक्षा को पूरा करना है. एक राष्ट्र तभी प्रगति करता है, जब उसके पास आत्मसम्मान का भाव होता है. उस आत्मसम्मान में सबसे बड़ी भूमिका उसकी विरासत की होती है.
 
Coutesy-DD News

Lagatar Desk

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि एक राष्ट्र तभी प्रगति करता है, जब उसके पास आत्मसम्मान का भाव होता है. और इस आत्मसम्मान में बहुत बड़ी भूमिका उसकी विरासत की होती है. इसलिए, आज देश अपनी विरासत और पहचान को भी संरक्षित करने में जुटा है.

 

प्रधानमंत्री ने मंगलवार को पूर्वी दिल्ली में आईपी एक्सटेंशन के डीडीए उत्सव ग्राउंड में दशहरा समारोह में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा, "सदियों तक हमारी धरोहरों को लूटा गया और उन्हें विदेशों में ले जाया गया. लेकिन आज हम उन्हें वापस ला रहे हैं. बीते 12 वर्षों में साढ़े छह सौ से ज्यादा प्राचीन मूर्तियों को भारत वापिस लाया गया है.  इसी तरह, भारत अपने सांस्कृतिक केन्द्रों को दुनिया में नई पहचान दिलवा रहा है। बीते वर्षों में, हमारे कितने ही स्थानों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की लिस्ट में शामिल किया गया है। पिछले साल दीपावली को भी यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया है। ये करोड़ों भारतीयों की सामूहिक इच्छाशक्ति का ही परिणाम है. हमें इसी निष्ठा से आगे भी काम करना है.

 

उन्होंने कहा, आज भारत अपनी विरासत और पहचान को बचाने के लिए समर्पित है. पीएम मोदी ने इसे "करोड़ों भारतीयों की सामूहिक इच्छाशक्ति का परिणाम" बताया और कहा कि देश को इसी निष्ठा के साथ आगे भी काम करना है. विजयादशमी के महत्व पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह “जीत का त्योहार” और “विजय का उत्सव” है. यह पर्व साहस देता है कि शत्रु चाहे कितना भी ताक़तवर क्यों न हो, अगर हम सत्य और मानवता के पक्ष में खड़े हैं, तो अंत में जीत हमारी ही होगी. विजयादशमी की यही भावना हमेशा से भारत के मूल विचारों का हिस्सा रही है.

 

विकसित भारत का लक्ष्य

 

पीएम मोदी ने कहा कि हमारे सामने विकसित भारत का लक्ष्य है, हमारे सामने आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य है. हमें जनशक्ति से जनकल्याण करते हुए जनता की हर आकांक्षा को पूरा करना है. एक राष्ट्र तभी प्रगति करता है, जब उसके पास आत्मसम्मान का भाव होता है. उस आत्मसम्मान में सबसे बड़ी भूमिका उसकी विरासत की होती है. यही वजह है कि आज देश अपनी विरासत और पहचान को भी संरक्षित करने में जुटा है.

 

प्रभी श्रीराम के आदर्श अतुलनीय

 

उन्होंने कहा कि इस देश ने इसकी संस्कृति और इसके पूर्वजों ने हजारों वर्षों से प्रभु श्रीराम की उपासना की है. ये आस्था केवल इसलिए नहीं है कि श्रीराम ने राक्षसराज रावण का अंत किया, ये आस्था इसलिए भी है कि प्रभु श्रीराम ने हमें ऐसे आदर्श दिए, जो मानवता के इतिहास में अतुलनीय हैं.उन्होंने आगे कहा कि प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन में कितनी ही कठिनाइयों का सामना किया. लेकिन, उन्होंने सच्चाई और नीति का हाथ कभी नहीं छोड़ा। उनका चरित्र ही ऐसा है कि प्रभुराम के चेहरे पर न राजपद पाने की प्रसन्नता हुई और न वनवास जाने पर उन्हें कोई दुख हुआ. 

 

चाहे चुनौती जितनी बड़ी हो

 

पीएम मोदी ने कहा, "हमेशा जनता को जनार्दन मानकर आगे बढ़ना है. हमें गरीब और वंचित की सेवा को सर्वोपरि रखना है. प्रभुराम के जीवन से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है। संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, चुनौती कितनी भी बड़ी क्यों न हो, हमें दूसरे के भरोसे नहीं बैठना है. हमें अपना सामर्थ्य पहचानना है, अपने संसाधनों पर विश्वास करना है. अपने संकल्प को शक्ति बनाना है और अपने परिश्रम से समाधान निकालना है. प्रभुराम ने हमें सिखाया कि रास्ते की कठिनाइयां हमारी यात्रा को रोक नहीं सकतीं."

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