सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में खोले जाएंगे दो दर्जन मिल्क कलेक्शन सेंटर, दुग्ध विक्रेताओं को मिलेगा बाजार पीएम मोदी के लोकल फॉर वोकल सपने को साकार कर रहे चार युवा Gaurav Prakash Hazaribagh : जहां कभी नक्सलियों का दुर्ग हुआ करता था, वहां अब श्वेत क्रांति की धारा बहेगी. हजारीबाग में निजी क्षेत्र का पहला डेयरी फार्म शुक्रवार को खोला गया. कभी घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र कहे जाने वाले चुरचू के जोरदाग में सदर विधायक मनीष जायसवाल ने इस डेयरी फार्म का शुभारंभ किया. इस डेयरी फार्म से प्रतिदिन 8000 लीटर दूध सप्लाई करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी के लोकल फॉर वोकल सपने को साकार करने में चार युवा पाइका दूध पैकेट के जरिए जुट गए हैं. इसके लिए फिलहाल वे 100 गायें खरीदेंगे. वैसे इस डेयरी फार्म में कुल 500 गायें रखने का लक्ष्य है. इतना ही नहीं सुदूर गांवों में दो दर्जन मिल्क कलेक्शन सेंटर भी खोलने की योजना है. इससे ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों को भी रोजगार के साथ दूध के सही दाम मिल पाएंगे और डेयरी का मकसद भी पूरा होगा. इसे भी पढ़ें :
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मां-पिता के प्यार ने चार दोस्तों को अपने पैतृक आवास हजारीबाग खींच लाया. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे महानगरों में चारों दोस्त नौकरी किया करते थे. ऐसा लगा कि मां-पिता को समय देना बेहद जरूरी है. ऐसे में नौकरी छोड़कर सभी हजारीबाग अपनी जन्मभूमि पहुंच गए. फिर सोचा, क्यों न हजारीबाग में ही कुछ रोजगार किया जाए, जिससे नाम भी हो और पैसा भी कमाया जा सके. ऐसे में सभी दोस्तों ने हजारीबाग के चुरचू प्रखंड स्थित जोरदाग में मिलकर डेयरी फार्म खोलने का निर्णय लिया.
किसानों को प्रोत्साहित करने का अवसर
डेयरी फार्म के प्रोपराइटर अभिजीत कुमार मिश्रा बताते हैं कि उन लोगों की यह कोशिश है कि किसानों को प्रोत्साहित किया जाए. सरकार ने किसानों के लिए कई योजनाएं लायी हैं. लेकिन किसानों को यह फिक्र रहती है कि उनका दूध कौन लेगा और कैसे बिकेगा. उन लोगों के फार्म हाउस बनाने से किसानों को एक वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराया जा रहा है. वहां से कंपनी अच्छे मूल्य पर दूध किसानों से खरीदेंगे.

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‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा
इस फॉर्म को बनाने में मेक इन इंडिया के कांसेप्ट को भी बढ़ावा दिया गया है. सारे मशीन स्वदेशी हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दो सपनों को चार दोस्त साकार कर रहे हैं. पहला आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को धरातल पर उतारा जा रहा है, तो दूसरी ओर मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसे भी पढ़ें :
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अभिजीत मिश्रा बताते हैं कि वह दिल्ली में काम करते थे. नौकरी में मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती थी. घर में मां-पिता भी अकेले थे. ऐसे में उन लोगों ने सोचा कि क्यों नहीं, कुछ ऐसा किया जाए, जिसमें शुद्धता हो और उन लोगों ने सबसे शुद्ध दूध का व्यापार शुरू किया. चार एकड़ भू-भाग में डेयरी मिल्क फार्म हाउस खोला गया है. पहले दौर में दूध का व्यापार किया जाएगा. उसके बाद दूध से बने सामान जैसे-चीज और मक्खन विशेष रूप से तैयार करने की योजना है. यह फॉर्म हाउस फॉर्च्यूनर फॉर डेयरी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से बनाया गया है और दूध पाइका के नाम से बाजार में उपलब्ध होगा.
झारखंड के लोकनृत्य पर आधारित नामकरण
पाइका नामकरण करने के पीछे भी एक बहुत अच्छी सोच है. कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर बताते हैं कि पाइका झारखंड का लोक नृत्य है, जो अब विलुप्त होती जा रही है. कंपनी समाज के सामने उसका नाम जिंदा रखना चाहती है और लोगों को झारखंड के लोक नृत्य पाइका के बारे में बताना चाहती है.
पीएम की सोच को धरातल पर उतारना बड़ी बात : विधायक
डेरी मिल्क का उद्घाटन करने के लिए हजारीबाग के विधायक मनीष जायसवाल भी पहुंचे. उन्होंने कहा कि आज के समय में दूध ऐसा प्रोडक्ट है, जो सबके घरों में पहुंचता है. यह एक अच्छा व्यापार है. सबसे खासियत यह है कि प्रधानमंत्री की सोच को यह धरातल पर उतार रहा है. आत्मनिर्भर भारत और लोकल फॉर वोकल के आवाज को हजारीबाग का डेयरी फार्म बुलंद कर रहा है. इस व्यवसाय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसानों की समस्या का भी समाधान होगा और उन्हें नया बाजार भी मिलने जा रहा है. [wpse_comments_template]
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