Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

BAU में पशुओं की बीमारी पर एक दिवसीय कार्यक्रम, कई विशेषज्ञ हुए शामिल

Ranchi:  बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा संकाय अधीन पशु रोग विभाग ने पशुओं के खुरपका- मुंहपका (एफएमडी) रोग पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया. पशुओं के खुरपका- मुंहपका रोग को लेकर डॉ एमके गुप्ता ने बताया कि यह रोग पशुओं में अत्यन्त संक्रामक एवं घातक विषाणुजनित रोग है. यह गाय, भैंस, भेंड़, बकरी, सूअर आदि पालतू पशुओं और हिरन को होता है. इस रोग के आने पर पशु को तेज बुखार हो जाता है. इसे पढ़ें-धनबाद">https://lagatar.in/balliapur-police-seizes-coal-laden-pickup-van-fir-on-four/">धनबाद

: बलियापुर पुलिस ने कोयला लदा पिकअप वैन जब्त किया, चार पर FIR
बीमार पशु के मुंह, मसूड़े, जीभ के ऊपर नीचे ओंठ के अन्दर का भाग खुरों के बीच की जगह पर छोटे-छोटे दाने से उभर आते हैं, फिर धीरे-धीरे ये दाने आपस में मिलकर बड़ा छाला बनाते हैं. समय पाकर यह छाले पक जाते हैं और उनमें जख्म हो जाता है. समय पर इलाज नहीं होने पर यह छाले व जख्म भर जाते हैं, परंतु संकर पशुओं में यह रोग कभी-कभी मौत का कारण भी बन सकता है. राज्य में पशुओ में पाया जाने वाला प्रमुख रोग है. उन्होंने कहा कि आईसीसीएआर, नई दिल्ली ने विभाग को झारखंड राज्य में पहली बार एफएमडी रोग समन्वित अनुसंधान परियोजना प्रदान की है. इसके अधीन एफएमडी रोग के नमूनों का संग्रह, सर्वे, अनुसंधान एवं उपचार पर कार्य होंगे.

सिरोप्रोवेलेंस की सहायता से रोग में कमी के प्रयास

मौके पर आईएएचपी, झारखंड के निदेशक डॉ बिपिन बिहारी महता ने राज्य में एफएमडी नमूनों का संग्रह, सिरोप्रोवेलेंस की सहायता से रोग में कमी के प्रयास. राज्य के विभिन्न जिलों में नमूना संग्रह से जुड़ी नियमावली पर बताया कि रोग के महत्त्व को देखते हुए पशु रोग विभाग ने खुरपका- मुंहपका विषाणु रोग की दृढ़ता विषय पर आमंत्रित शिक्षात्मक व्याख्यान का आयोजन किया. इसे भी पढ़ें-दुमका">https://lagatar.in/dumka-before-the-start-of-shravani-mela-various-departments-should-settle-their-work-dc/">दुमका

: श्रावणी मेला शुरू होने से पहले विभिन्न विभाग अपने कार्य निपटाएं- डीसी

रोग के नमूनों को संग्रह करने की आवश्यकता एवं तरीके को बताया

मौके पर डॉ रंजन ने इस विषाणु रोग की जटिलताओं को बताया साथ ही इस रोग के नमूनों के संग्रह करने की आवश्यकता एवं तरीके को बताया. उन्होंने बीयोप्सी और विषाणु को फैलाने वाले वाहक (पशुओं) की जांच नियमावली पालन के तरीके, शिक्षात्मक पहलु और वैज्ञानिक दृश्यों से अपने अनुभवों को साझा किया. उन्होंने पशुओं के विभिन्न अंगों से नमूना संग्रह, पशुओं में एंटीबॉडी की जांच के लिए सब लिंगत नमूनों के एकत्र करने पर जोर तथा भविष्य में नियमावली स्थापित होने पर एफएमडीम रोग के फैलाव में कमी को बताया.

ये रहे मौजूद

मौके पर डॉ एमके गुप्ता डॉ अंसार अहमद,डॉ एके पांडे, डॉ संजय कुमार, डॉ राजू प्रसाद, डॉ प्रवीण कुमार, डॉ अभिषेक कुमार, डॉ नुपुर, डॉ राजेश, डॉ स्नेहा, डॉ विशाखा सिंह, डॉ कूल्लू, डॉ नंदिनी कुमारी सहित 55 से अधिक प्रतिभागी मौजूद थे. [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही