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जमीन 1, दावेदार 2

 
  • गोड्डा के महागामा में सरकारी जमीन को लेकर सरकारी सिस्टम कन्फ्यूज
  • सीएम का निर्देश: फिर भी नहीं हुआ शिकायत का निष्पादन
  • जमीन एक, दावेदार दो,सरकारी दस्तावेज दोनों के पास
Pravin Kumar/ Amit Singh Ranchi: गोड्डा जिले के महगामा अंचल अंतर्गत सरकारी जमीन को लेकर सरकारी सिस्टम ही कन्फ्यूज हो गया है. अफसर तय नही कर पा रहे हैं कि आखिर जमीन किसकी है. जबकि सरकारी दस्तावेज बता रहे है कि जमीन सरकार की है. इसके बाद भी कैलाश कुमार टिबडेवाल सहित कई ऐसे लोग हैं, जिन्होने सरकारी जमीन अवैध रूप से अपने नाम करा ली. ऐसे लोगों के पास सरकारी दस्तावेज भी हैं, मगर जमीन पर उनका दावा गलत है. ऐसा हम नहीं, सरकारी जांच रिपोर्ट कह रही है. महगामा में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें जमीन एक है, मगर जमीन के दावेदार अनेक हैं. सभी दावेदारों के पास जमीन के सरकारी दस्तावेज हैं. ऐसे लोग दस्तावेज लेकर अंचल और गोड्डा डीसी के पास पहुंच रहे है. एक ही जमीन को दो अलग-अलग व्यक्ति अपनी जमीन बता रहे हैं. ऐसा ही एक मामला मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र(शिकायत संख्या 2017-49928 दिनांक 11.10.2017) में भी आया था. तत्कालीन सीएम रघूवर दास ने मामले की गंभीरता को समझते हुए, जांच कर निष्पादन का निर्देश दिया था. मामले के निष्पादन को लेकर गोड्डा जिला प्रशासन ने कार्रवाई भी शुरू की, मगर अचानक कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई.

कामत मालिकान रहे, तो वह जमीन सरकारी

महगामा अंचल के मौजा-खेरा, थाना नं-512, ज.-23, रक्वा-36 बीघा 14 डिसमिल 2 धूर भूमि मेजर सर्वे में लक्ष्मण भगत बल्द शिववालक भगत, कौम कलवार, शाकिन- महामामा हाल मोकाम घाट डेवड़ी सर्वे में दर्ज है. उक्त जमाबंदी का किस्म कामत पर्चा में दर्ज है. संथाल क्षेत्र में कामत, चौकीदारी, गोडैत, प्रधानी, दक्षिणोत्तर-पश्चिमोत्तर जैसी जमीन बे-लगान होती थी. कामत पर्चा में जमीन पर अगर कामत मालिकान रहे, तो वह पूर्णत: सरकारी और सिर्फ कामत रहे एवं उसमें कामत नाम लिखा रहे, तो रैयत उस जमीन को अपनी निजी जमीन की तरह उपयोग करते रहे हैं.

जमीन एक, दावेदार दो, दोनों के पास दस्तावेज

शिकायतकर्ता नीरज कुमार जायसवाल खरियानी जमाबंदी रैयत के वंशज हैं. उनका कहना है कि जमीन पर उनके पूर्वजों का नाम है. बे-लगान होने के कारण उक्त जमीन पर रेंट फिक्सेशन (नं71/60-61) तेजनारायण भगत बनाम सरकार के द्वारा रेंट का निर्धारण किया गया एवं इस आधार पर उनका नाम रजिस्टर-टू में दर्ज होना चाहिए. विपक्षी सुंदर राम टिबडेवाल का कहना है कि उक्त जमीन उनके पूर्वज गोविंद राम मारवाड़ी को यह जमीन शिकायतकर्ता नीरज कुमार जायसवाल के वंशज शिवशंकर जायसवाल ने 22.02.1933 के रजिस्ट्री नं० 20 के द्वारा गोविंद राम मारवाड़ी को विक्रय कर दिया. उनका भी रेट फिक्सेसन 71/60-61 के तहत रेट का निर्धारण हुआ है. इस आधार पर उनका म्यूटेशन हुआ है. वर्ष 1997-98 से वे लगान देते आ रहे हैं. जमीन पर उनका दखल कब्जा भी है. एवं हाल सर्वे के खतियान में उनका नाम भी चढ़ा हुआ है.

रिपोर्ट में सीओ ने बताया दोनों के पास सत्यापित कॉपी

महागामा सीओ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस आधार पर दोनों व्यक्तियों से कागज की मांग की गई, दोनों के द्वारा एक ही केश सं0-71 /60-61 का जिक्र किया गया है. दोनों की सत्यापित कॉपी अभिलेखागार के कार्यालय को दी गई. अभिलेखागार से जब इसकी जांच कराई गई, तो इन्होंने पत्रांक 29.01.2019 के द्वारा बताया कि (आरएफ71/60-61) तेज नारायण भगत बनाम सरकार का कागज सही है. रजिस्टर-टू में विपक्षी राम अवतार राम का नाम चढ़ा है, परन्तु परिवर्तन के अधिकार कॉलम में दर्ज का आधार अंकित नहीं है, एवं वर्ष 1997-98 से लगान दर्ज है. वर्तमान में दखल राम अवतार राम मारवाड़ी का है. चूंकि विवाद निजी जमीन से संबंधित है, एवं दोनों व्यक्तियों ने सत्यापित अभिप्रमाणि कागज प्रस्तुत किया है. खतियान में नाम शिकायतकर्ता के वंशजों का है. परन्तु दखल विपक्षी ( राम अवतार राम के वंशज) का है. शिकायतकर्ता ने इतनी लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी आजतक जमीन पर विपक्षी का दखल करने के संबंध में कोई वाद किसी भी कोर्ट में दायर नहीं किया है. उक्त भूमि के दाखिल खारिज के संबंध में भी आजतक आवेदन नहीं किया गया है, जो संदेह उत्पन्न करता है. ऐसी परिस्थिति में उक्त विवाद का सक्षम न्यायालय के निर्णय के बाद ही रजिस्टर में कराना उचित प्रतीत होता है. [wpse_comments_template]
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