- मात्र 27.4% मामलों में ही बलात्कारियों को मिलती है सजा
- रेप के मामलों में राजस्थान-उत्तराखंड आगे, झारखंड भी पीछे नहीं
LagatarNewsNetwork/Kolkata : कोलकाता में महिला डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है. लेकिन भारत में रेप और बलात्कार कोई नयी बात नहीं है, ये एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जो लगभग हर वक्त कहीं न कहीं सुर्खियों में बनी रहती है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में भारत में हर दिन 86 रेप के मामले सामने आये, यानी हर 16 मिनट में एक बलात्कार का केस दर्ज हुआ. वहीं हर तीन दिन में दो महिलाओं की रेप के बाद हत्या कर दी गयी. रेप, जिसे अक्सर यौन उत्पीड़न के रूप में जाना जाता है. यह एक जघन्य अपराध है जो तब होता है जब कोई पुरुष किसी महिला के साथ उसकी बिना सहमति के जबरदस्ती यौन संबंध बनाता है. इसमें शारीरिक बल का इस्तेमाल करना, धमकी देना या किसी भी अन्य तरह का दबाव बनाना भी शामिल हो सकता है. यह तब भी हो सकता है, जब कोई व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाता है जो कानूनी तौर पर हां कहने या सहमति देने की स्थिति में नहीं है. अगर कोई पुरुष किसी महिला के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध या उसकी सहमति के बिना यौन गतिविधि में संलग्न होता है, तो वह बलात्कार का दोषी है. भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 63 के खंड एक से सात में इसे परिभाषित किया गया है.
देश में रेप के मामलों का क्या है आंकड़ा
भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले साल-दर-साल बढ़ते ही जा रहे हैं. एनसीआरबी के अनुसार, 2020 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 371,503 मामले दर्ज किये गये थे. इसके बाद साल 2021 में 428,278 और 2022 में 445,256 मामले सामने आये. यानी कि तीन साल में करीब 20 फीसदी अपराध बढ़ गया. साल 2022 में कुल 31,982 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं रिपोर्ट की गयी और कुल 31,516 केस रजिस्टर किये गये. राज्यवार आंकड़ा देखें तो 2022 में राजस्थान में सबसे ज्यादा 5408 महिलाओं के साथ रेप जैसा घिनौना अपराध हुआ और यहां कुल 5399 रेप के केस दर्ज किये गये. राजस्थान के बाद उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ऐसे दो राज्य हैं, जहां तीन हजार महिलाओं के साथ ऐसा अपराध हुआ. इसके अलावा महाराष्ट्र (2911), हरियाणा (1787), असम (1478), ओडिशा (1464), झारखंड (1298), छत्तीसगढ़ (1246) और पश्चिम बंगाल (1112) में सबसे ज्यादा महिलाओं के साथ रेप के मामले सामने आये हैं. आबादी के हिसाब से देखा जाये तो उत्तराखंड में सबसे ज्यादा बलात्कार के मामले हुए. रेप के मामले में उत्तराखंड का सबसे ज्यादा 15.4 क्राइम रेट है. इसका मतलब है कि एक लाख की आबादी पर 15.4 महिलाओं का बलात्कार हुआ. उत्तराखंड के बाद रेप मामले में चंडीगढ (13.9), राजस्थान (13.8), हरियाणा (12.7), दिल्ली (12.3) और लक्षद्वीप (12.1) में सबसे ज्यादा क्राइम रेट है.
किस उम्र की महिलाएं ज्यादा शिकार होती हैं?
2022 की एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, 18 से 30 साल के बीच की महिलाएं सबसे ज्यादा (21,063) शिकार यौन उत्पीड़न का शिकार हुईं. इनके अलावा 30 से 45 साल के बीच की 8644 महिलाओं ने बलात्कार के मामले की रिपोर्ट दर्ज करायी.
उम्र के हिसाब से महिलाओं के यौन उत्पीड़न के ये रहे आंकड़े...
- - 6 साल से कम - 32
- - 6 से 12 साल के बीच - 88
- - 12 से 16 साल के बीच - 370
- - 16 से 18 साल के बीच - 527
- - 18 से 30 साल के बीच - 21063
- - 30 से 45 साल के बीच - 8644
- - 45 से 60 साल के बीच - 1171
- - 60 से ऊपर - 87
कितने आरोपियों को मिली सजा?
साल 2022 में रेप के कुल मामलों में से 19,954 में पुलिस ने चार्जशीट दायर की. वहीं इस साल दर्ज मामलों में से अदालत ने 507 केस में दोषी ठहराया. अदालत ने कुल 1388 मामले निपटाए और कुल 12,062 केस में आरोपियों को बरी कर दिया गया. रिपोर्ट के अनुसार, 27.4 फीसदी मामलों में अदालत ने आरोपियों को बलात्कार का दोषी ठहराया है. एनसीआरबी के आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2022 में हर दिन करीब 15 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिला के साथ रेप की घटना हुई. कुल 5588 केस दर्ज हुए और 5610 महिलाओं ने घटना रिपोर्ट की. इनमें शेड्यूल कास्ट की महिलाओं की संख्या ज्यादा है और क्राइम रेट भी इनका ही ज्यादा है. 2022 में शेड्यूल कास्ट की 4252 महिलाओं ने 4241 केस दर्ज करायो, जिनका क्राइम रेट 2.1 फीसदी है. वहीं शेड्यूल ट्राइब की 1358 महिलाओं ने घटना की रिपोर्ट की, इनमें से 1347 केस रजिस्टर हुए. इनका क्राइम रेट 1.3 फीसदी रहा.
भारत में महिला सुरक्षा को लेकर क्या कानून
भारतीय संविधान में महिला सुरक्षा के लिए कई कानून हैं. इन कानूनों का मकसद महिलाओं को हिंसा, उत्पीड़न और भेदभाव से बचाना है. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार का एक अहम मंत्रालय है जो महिलाओं और बच्चों के अधिकारों और कल्याण के लिए काम करता है. सबसे डरावनी बात यह है कि भारत में अधिकांश रेप के मामलों में जान-पहचान वाले ही ज्यादातर गुनाहगार होते हैं. इसके अलावा अनजान और विकत मानसिकता के लोग भी ये गुनाह करते हैं.
भारत में रेप के केस ज्यादा क्यों
समाज में महिलाओं को लेकर एक पुरानी सोच अभी भी मौजूद है जिसमें उन्हें पुरुषों से कमतर माना जाता है. महिलाओं के प्रति यौन उत्पीड़न को अक्सर हल्के में लिया जाता है. जब समाज में यह धारणा बनती है कि लड़के तो लड़के हैं या यह आम है, तो इससे बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों को बढ़ावा मिलता है. कई बार परिवार और समुदाय बलात्कारी को बचाते हैं, जिससे महिलाएं अपनी आवाज उठाने में डरती हैं. ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन का भी सहयोग नहीं मिलता है. भारत में बलात्कार के मामलों में सजा की दर बहुत कम है. 2022 में बलात्कार के मामलों में केवल 27.4% मामलों में सजा सुनायी गयी थी. इससे अपराधियों में यह विश्वास बढ़ता है कि उन्हें सजा नहीं मिलेगी. इस कारण उनकी हिम्मत और बढ़ जाती है. वहीं अक्सर देखा गया है कि पुलिस भी बलात्कार के मामलों में एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल करती है या देरी करती है. कई बार पुलिस बलात्कार की घटनाओं को गंभीरता से नहीं लेती, जिससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता. [wpse_comments_template]
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