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हजारीबाग DFO, पूर्व DFO,पूर्व PCCF, NTPC जीएम व DGM पर ऑनलाइन FIR दर्ज

 
Hazaribagh : झारखंड में हजारीबाग वन विभाग के अधिकारियों की चर्चाएं और शिकायतें इन दिनों सबसे ज्यादा हो रही हैं. अब एक बार फिर वन विभाग सुर्खियों में है. वन स्वीकृति की शर्तों के खिलाफ सड़क मार्ग से कोयला ट्रांसपोर्टेशन के मामले में विधानसभा में पूछे गए सवाल का जवाब पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए जारी नोटिफिकेशन से बचाव करने और जांच में आरोपी डीएफओ को क्लीन चिट देने के मामले में ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराया गया है. वहीं शिकायत पर कार्रवाई नहीं करने और पद का दुरुपयोग कर आरोपियों से सांठगांठ व षड्यंत्र कर लिखित में झूठा बना देने के मामले में हज़ारीबाग़ डीएफओ मौन प्रकाश,पूर्व डीएफओ सबा आलम अंसारी,पूर्व पीसीसीएफ सत्यजीत सिंह,एनटीपीसी जीएम फैज तैय्यब,डीजीएम नवीन कुमार पर ऑनलाइन मामला दर्ज किया गया है. इसे भी पढ़ें -झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-more-than-one-lakh-12th-pass-and-more-than-77-thousand-graduates-are-looking-for-employment/">झारखंड

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सवाल वन स्वीकृति की शर्तों का तो जवाब पर्यावरणीय स्वीकृति का भेजते हैं अधिकारी

हजारीबाग के वन विभाग के बारे में एक्टिविस्ट मंटु सोनी ने जो आरोप लगाए हैं, वह चौंकाने वाला है.एनटीपीसी द्वारा वन स्वीकृति की शर्तों के खिलाफ सड़क मार्ग से कोयला ट्रांसपोर्टेशन पर भारत सरकार और राज्य सरकार ने कई बार वन विभाग को पत्र लिखा है. लेकिन कोयले के काले खेल ने हज़ारीबाग़ के वन विभाग के अधिकारियों को इतना निरंकुशा और साहसी बना दिया है कि ये लोग लिखित में शर्तो के उल्लंघन करने वालों के पक्ष में कुछ भी लिखने को तैयार रहते हैं. मामला पूर्व विधायक लोबिन हेम्ब्रम द्वारा वन स्वीकृति के खिलाफ एनटीपीसी द्वारा सड़क मार्ग से कोयला ट्रांसपोर्टेशन को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में विभागीय स्तर से जवाब न देकर एनटीपीसी से ही पूछकर विभाग/सरकार को जवाब तत्कालीन डीएफओ सबा आलम ने भेज दिया. यह भी नहीं देखा कि सवाल वन स्वीकृति से संबंधित है तो जवाब पर्यावरणीय स्वीकृति से संबंधित नोटिफिकेशन का भेज दिया. सिर्फ मामला यहीं नहीं रुका, खुद अपने खिलाफ जांच कर खुद उस जवाब को खारिज करते हैं. इस बात की शिकायत जब राज्य सरकार से की जाती है तो तत्कालीन पीसीसीएफ आरोपी डीएफओ सबा आलम के पक्ष में आकर उन्हें जांच में क्लीन चिट दे दिया. यह भी नहीं देखा कि वन स्वीकृति के लिए वन संरक्षण अधिनियम 1980 है और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 है. दोनों के लिए दो अलग-अलग कानून हैं.

डीएफओ पर कार्रवाई नहीं कर रहे, केंद्र ने दिये हैं कार्रवाई के निर्देश

एनटीपीसी के द्वारा सड़क मार्ग से कोयला ट्रांसपोर्टेशन के खिलाफ भारत सरकार और राज्य सरकार से कार्रवाई के निर्देश के बाद वन विभाग कोई जवाब नहीं दे रहा था और इधर डीएफओ मौन प्रकाश ने शिकायत पर कार्रवाई करने के बदले सीधे शिकायत मिलने से इनकार करते हुए मामला दूसरे विषय का होने का लिखित जवाब दे दिया. हालांकि कुछ दिन पूर्व इनकी शिकायत भारत सरकार से भी की गयी है. भारत सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मौन प्रकाश पर कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को तीन दिन में ही निर्देश भेज दिया है. मौन प्रकाश पर आरोप है कि इनके पास वन स्वीकृति की शर्तों से संबंधित कोई विभागीय पत्र प्राप्त नहीं होने के बाद भी उसके पक्ष में लिखित में झूठा जवाब देकर गलत दस्तावेज बनाने का कार्य किया है.

इन धाराओं में इनके खिलाफ की गयी है शिकायत

शिकायत के आवेदन में कहा गया है कि राज्य द्वारा संविधान के अनुच्छेद 48 (A) के निर्देशों का पालन करने में असफल रहने व इसका उल्लंघन करने वालों के साथ पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ के लिए आरोपियों से सांठगांठ कर षड्यंत्र कर सरकार/विधानसभा को झूठा रिपोर्ट भेजने के मामले में संविधान के अनुच्छेद के 51 (A) (G) के तहत प्रदत अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए हज़ारीबाग डीएफओ मौन प्रकाश,पूर्व डीएफओ सबा आलम अंसारी,पूर्व पीसीसीएफ सत्यजीत सिंह,एनटीपीसी जीएम फैज तैय्यब,डीजीएम नवीन कुमार पर आईपीसी की धारा 166(A) 420455,467,468,337,182,406,409,120 B के तहत online FIR दर्ज करवाया गया है. जिसमें कहा गया है कि अब तक दर्जनों लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है. वन्य जीव का आवागमन बाधित हुआ है,वनों और कृषि को नुकसान हुआ है. इसे भी पढ़ें -रांची">https://lagatar.in/guillain-barre-syndrome-symptoms-seen-in-a-two-year-old-child-in-ranchi-treatment-underway/">रांची

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