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हजारीबाग: 4 फीट ही बचा है छड़वा डैम में पानी, शहरवासियों के लिए जल संकट

Hazaribagh: सावन में झमाझम बारिश से जलाशय लबालब होते हैं. लेकिन इस बार झारखंड में लोगों की नजरें सावन वाली बारिश को तरस ही रही हैं. तो दूसरी ओर कई जगहों पर पानी की किल्लत भी देखी जा रही है. हजारीबाग शहर की भी आधी आबादी प्यासी है. ऐसे मौसम में भी यहां की लगभग डेढ़ लाख की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है. शहर में करीब तीन लाख की आबादी सप्लाई वाटर पर निर्भर है. लेकिन यहां आधी जनसंख्या को ही पेयजल नसीब हो पा रहा है. शहर में दो जगहों छड़वा डैम और झील से पेयजलापूर्ति होती है. छड़वा डैम से छह जलमीनार में हर रोज एक-एक लाख गैलन और झील से एक जलमीनार में इतनी ही क्षमता की जलापूर्ति होती है. लेकिन बारिश नहीं होने की वजह से छड़वा डैम में महज चार फीट लेयर पानी बचा है. अगर पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो माहभर में पानी के लिए शहर में हाहाकार मच जाएगा. जानिए पेयजलापूर्ति की कहानी, शहरवासियों की जुबानी [caption id="attachment_363877" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/34-hazaribagh-sarik.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> सारिक[/caption]

जलाशयों का जलस्तर सुरक्षित रखने का रास्ता सोचना होगा : सारिक

हजारीबाग सरदार चौक निवासी सारिक कहते हैं कि जलाशयों का जलस्तर सुरक्षित रखने का रास्ता सोचना होगा.शहरवासी अगर पानी बचाने पर ध्यान नहीं देते हैं, तो जीवन में आगे परेशानी उन्हीं को उठानी होगी. अब धीरे-धीरे छड़वा डैम का भी पानी कम होता जा रहा है. वैसे भी शहर की आधी जनसंख्या को पानी नसीब नहीं हो रहा है. पेयजलापूर्ति योजना को आबादी के अनुसार बढ़ाना होगा. साथ ही जलस्तर सुरक्षित रखने के लिए जल संरक्षण आवश्यक है. [caption id="attachment_363876" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/35-hazaribagh-santosh.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> संतोष पांडेय[/caption]

मॉनसून का विकल्प तलाशना होगा : संतोष पांडेय

ओकनी के संतोष पांडेय कहते हैं कि खेतों में फसल उगानी हो या पेयजलापूर्ति का मामला हो, यहां पूरी तरह मॉनसून पर निर्भर है. अगर मॉनसून दगा दे दे, तो उसके लिए विकल्प तलाशना जरूरी है. ऐसे में जल संरक्षण को जीवन का अभिन्न अंग बनाने की जरूरत है. पानी बर्बाद नहीं करें, अन्यथा खुद की प्यास बुझाने में आगे परेशानी होगी. वैसे सरकार और प्रशासन को नई योजना लाकर सबको पेयजलापूर्ति करने की आवश्यकता है. [caption id="attachment_363878" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/37-hazaribagh-mahavir.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> महावीर महतो[/caption]

जल के बिना जीवन की कल्पना करना मुश्किल : महावीर महतो

को-ऑपरेटिव कॉलोनी निवासी महावीर महतो कहते हैं कि जल ही जीवन है, यह कहावत सौ फीसदी सत्य है. जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. अगर पानी नहीं बचाया गया, तो भविष्य में लोगों को बूंद-बूंद के लिए तरसना होगा. फिलहाल पेयजलापूर्ति तो हो रही है, लेकिन कब बंद हो जाएगी, इस पर भरोसा करना मुश्किल है. कई बार ऐसी मुसीबतें झेलते रहे हैं. अब भी शहर के कई ऐसे एरिया हैं, जहां पेयजलापूर्ति नहीं हो रही है. उन क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति करने की जरूरत है. पानी अमृत के समान है, इसे बर्बाद नहीं करना चाहिए, यह सभी लोगों को आदत में शुमार करना होगा. [caption id="attachment_363879" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/36-hazaribagh-Pradeep.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> प्रदीप लाल[/caption]

पूरे शहर में पानी की परेशानी : प्रदीप लाल

न्यू एरिया निवासी प्रदीप लाल कहते हैं कि पानी की परेशानी शहरभर में है. कहीं एक वक्त, तो कहीं दो वक्त पानी की सप्लाई होती है. कभी-कभी तो पूयजलापूर्ति होती भी नहीं. ऐसे में सब काम छोड़कर पानी के लिए भटकना पड़ता है. शहर में जब पेयजलापूर्ति की योजना बनी थी, तो उस वक्त आबादी कम थी. अब आबादी बढ़ गई है और ऊपर से सप्लाई वाटर भी घटा दिया गया है. ऐसे में इस पर ध्यान देने की जरूरत है कि पानी बचाने प्रयास करें. अगर अभी नहीं चेते, तो आनेवाले समय में रोजमर्रा के लिए पानी खरीदने की नौबत आ जाएगी. अगर हर लोग जागरूक हो जाएं, तो पानी की बचत होगी. [caption id="attachment_363880" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/07/33-Hazaribagh-umesh-prasad-1.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> उमेश प्रसाद मेहता[/caption]

जल संरक्षण को आदत में डालना होगा : उमेश प्रसाद मेहता

बड़ासी के उमेश प्रसाद मेहता कहते हैं कि हर कदम पर पानी की बर्बादी हो रही है. इसका परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से लोग खामियाजा भी भुगत रहे हैं. जल संरक्षण को आदत में डालना होगा. कम से कम पानी की बर्बादी हो, इसका ख्याल करना होगा. आज पेयजलापूर्ति की जो स्थिति है, उससे सभी लोग वाकिफ हैं. जरूरत से काफी कम सप्लाई वाटर मिल रहा है. इस पर सरकार और प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है. कम से कम कामभर पानी तो सप्लाई होना ही चाहिए. लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

प्रति व्यक्ति हर दिन 70 लीटर वाटर सप्लाई : अभियंता

पेयजल विभाग के अभियंता विजय प्रसाद कहते हैं कि शहर में प्रति व्यक्ति हर दिन 70 लीटर वाटर सप्लाई हो रहा है. दो-तीन साल पहले करीब 135 लीटर पानी प्रति व्यक्ति मिलता था. जब पेयजलापूर्ति योजना बनी थी, उस वक्त डेढ़ लाख की आबादी थी और आज यह बढ़कर करीब तीन लाख हो गई है. नए बसे मुहल्लों में फिलहाल सप्लाई वाटर नहीं जाता, चूंकि पाइप नहीं बिछाया जा सका है. शहर में पानी सप्लाई के लिए छड़वा डैम और झील में एक-एक प्लांट हैं. अंडरग्राउंड वाटर अर्थात डीप बोरिंग के सहारे पारनाला में 50 हजार गैलन पानी दिया जाता है. इसके अलावा छड़वा से छह जलमीनार और झील से एक जलमीनार में पानी सप्लाई हो रहा है.

कैसे हैं भावी जलसंकट के आसार

पेयजल विभाग के अभियंता कहते हैं कि जुलाई में अमूमन छड़वा डैम का जलस्तर 24 फीट रहता है. अभी महज 18 फीट वाटर लेवल है. चार फीट लेवल और गिरे, तो जलसंकट हो सकता है. चूंकि यहां टावर नीचे और वाटर लेवल ऊपर है. ग्रैविटी फोर्स से पानी जलमीनार में चढ़ाया जाता है. चार फीट जलस्तर गिरने से पानी टंकी में चढ़ने की स्थिति में नहीं रहता. अगर बारिश नहीं हुई, तो जलस्तर में बढ़ोतरी नहीं होगी. ऐसे में पानी जलमीनार में चढ़ ही नहीं पाएगा, तो फिर सप्लाई कैसे होगा.

क्या हो रही वैकल्पिक व्यवस्था

शहर में घर-घर पेयजलापूर्ति के लिए एक बड़ी योजना पर काम चल रहा है. विष्णुगढ़ के कोनार डैम से हजारीबाग में पानी लाने के लिए काम चल रहा है. अगर यह योजना पूरी हो जाएगी, तो शहरवासियों के लिए बड़ी सौगात होगी. कम से कम जलसंकट की नौबत भविष्य में नहीं आएगी. हालांकि यह योजना कब पूरी होगी, यह भविष्य के गर्भ में है. इसे भी पढ़ें- सुप्रीम">https://lagatar.in/supreme-court-grants-interim-bail-to-alt-news-co-founder-mohammad-zubair-orders-release/">सुप्रीम

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