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टीपीसी संगठन में बचे सिर्फ सात इनामी उग्रवादी, ब्रजेश गंझू पर सबसे अधिक इनाम

Ranchi :  आक्रमण गंझू, भीखन गंझू की गिरफ्तारी और मुकेश गंझू के सरेंडर करने के बाद टीपीसी संगठन में सिर्फ सात इनामी उग्रवादी बचे हैं. इनमें सबसे अधिक इनाम टीपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू पर घोषित है. उल्लेखनीय है कि झारखंड पुलिस लगातार नक्सलियों के खिलाफ अभियान चला रही है. इस अभियान के चलते राज्य का सबसे बड़ा नक्सली संगठन भाकपा माओवादी खत्म होने के कगार पर है. वहीं दूसरी तरफ टीपीसी, पीएलएफआई और जेजेएमपी जैसे छोटे उग्रवादी संगठनों की भी गतिविधियां कम हुई हैं. हालांकि उग्रवादी संगठन ग्रामीण इलाकों में चल रहे कंस्ट्रक्शन वर्क, स्टोन माइंस, ईंट भट्ठों में आगजनी और हमले कर अपने अर्थतंत्र को मजबूत करने में लगे हैं.

टीपीसी संगठन में बचे हैं सिर्फ सात इनामी उग्रवादी :

  1. - ब्रजेश गंझू : 25 लाख इनाम
  2. - आरिफ : 10 लाख इनाम
  3. - प्रभात गंझू : 05 लाख इनाम
  4. - करीम : 02 लाख इनाम
  5. - सहेंद्र यादव : 01 लाख इनाम
  6. - बाबूलालजी : 01 लाख इनाम
  7. - राजू यादव : 01 लाख इनाम

चार जिलों में सक्रिय हैं टीपीसी

हजारीबाग, चतरा, लातेहार और पलामू जिले में धीरे-धीरे माओवादियों की पकड़ कमजोर पड़ती गयी. माओवादियों के कमजोर पड़ने से  इन चार जिलों टीपीसी का वर्चस्व भी बढ़ता गया. हजारीबाग के बड़कागांव से होने वाले अवैध कोयला कारोबार, टंडवा व पिपरवार से कोयले की ट्रांसपोर्टिंग, लोहरदगा की बॉक्साइट ढुलाई समेत अन्य धंधों से मिलने वाले लेवी की राशि माओवादियों के बजाये टीपीसी के उग्रवादियों को मिलने लगी. टीपीसी के गिरफ्तार उग्रवादियों ने यह खुलासा किया है कि टेरर फंडिंग मामले में एनआईए जांच जब से शुरू हुई है, उसके बाद से टीपीसी का अर्थतंत्र बिगड़ गया है. खासकर छोटे कैडरों के पास पैसे ना के बराबर पहुंच रहे हैं. ऐसे में संगठन के छोटे कैडर को भी यह आदेश दिया गया है कि वह छोटी-छोटी टुकड़ियां बनाकर कंस्ट्रक्शन कंपनियों पर हमला करें और उनसे लेवी वसूलें.

कई बड़े टीपीसी उग्रवादी गिरफ्तार, कई ने किया सरेंडर

झारखंड पुलिस ने हाल के महीनों में कार्रवाई करते हुए 15 लाख के इनामी टीपीसी उग्रवादी आक्रमण गंझू समेत टीपीसी के 27 बड़े उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है. वहीं पुलिस की दबिश से परेशान होकर कई बड़े उग्रवादियों ने सरेंडर भी किया है. गिरफ्तार उग्रवादियों में पांच लाख इनामी सौरव गंझू, अनिश्चय गंझू और कृष्णा गंझू शामिल हैं. इसके अलावा ललन राणा, मुन्ना कुमार यादव, प्रवीण कुमार, उमेश भुइयां, रंजीत राणा, विकास गंझू, ननकु गंझू, आशिक गंझू, विनोद गंझू, बीरेंद्र यादव, मेघलाल यादव, राजकुमार गंझू, अशोक गंझू, रामेश्वर गंझू, जितेंद्र यादव, दीक्षित, आदेश गंझू, नरेश गंझू और अरविंद गंझू को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है. वहीं सरेंडर करने वालों में टीपीसी के सेकेंड सुप्रीमो 15 लाख इनामी मुकेश गंझू, पांच लाख इनामी उदेश गंझू और नागेश्वर गंझू शामिल हैं. पुलिस ने इन उग्रवादियों के पास से एक एके- 47, 10 से अधिक राइफल, कई पिस्टल और करीब 3000 कारतूस बरामद किये हैं.

साल 2005 में बना था टीपीसी संगठन

उग्रवादी संगठन टीपीसी (तृतीय झारखंड मुक्ति मोर्चा) का गठन वर्ष 2005 में हुआ, लेकिन इसकी पृष्ठभूमि 2004 से ही तैयार होने लगी थी. चतरा, लातेहार, हजारीबाग और पलामू में भाकपा माओवादी (जिसे 21 सितंबर 2004 से पहले एमसीसीआई के नाम से जाना जाता था) के खास जाति के नक्सलियों की लगातार गिरफ्तारी हुई. इस कारण संगठन में दो फाड़ होने लगा. एक जाति के नक्सलियों को लग रहा था कि दूसरी जाति के नक्सली अपना दबदबा बढ़ाने के लिए उन्हें गिरफ्तार करवा रहे हैं. टीपीसी के गठन के समय भी दो बड़े नक्सली नेता अमूल्य सेन और कन्हैया चटर्जी की तस्वीर लगाने को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था. अमूल्य सेन की तस्वीर पहले लगाने की मांग करने वाले माओवादियों ने अलग होकर टीपीसी का गठन किया. लेकिन इससे बड़ा एक सच यह भी था कि उस वक्त ब्रजेश, मुकेश और पुरुषोत्तम पर संगठन के पैसे का गबन करने का आरोप था. टीपीसी के गठन के वक्त ये तीनों उग्रवादी संगठन के बड़े पद पर थे. पुरुषोत्तम मारा जा चुका है और ब्रजेश और मुकेश (सरेंडर) अब भी जिंदा है और चतरा-हजारीबाग में सक्रिय है. इन उग्रवादियों के बारे में कहा जाता है कि टीपीसी के गठन के बाद इनकी संपत्ति में इजाफा हुआ है.

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