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एसआरई फंड को लेकर हुई थी समीक्षा
झारखंड के 18 जिलों के एसपी के साथ एसआरई फंड को लेकर 29 मई को एडीजी अभियान की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई थी. यह बैठक एसआरई फंड को लेकर आयोजित की गयी है. जिसमें राज्य के 18 जिलों के एसएसपी और एसपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिए थे. जिनमें रांची, धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो, चतरा, दुमका, गढ़वा, गिरिडीह, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, लातेहार, पलामू, सराइकेला, चाईबासा, कोडरमा, रामगढ़ और सिमडेगा जिले के एसपी-एसएसपी शामिल हुए थे. इस दौरान एसआरई मद का कितना खर्च हुआ और कितने का भुगतान किया जाना बाकी है, इसकी जिले के एसपी से डिटेल मांगी गई थी. इसके अलावा जिला पुलिस, सीआरपीएफ, एसएसबी, कोबरा, एसटीएफ, स्पेशल ब्रांच, एनआईए, सीबीआई, जैप, आईआरबी, एसआईआरबी में कितने चार पहिया और दो पहिया वाहन हैं, इसकी भी जानकारी ली गई थी.झारखंड में माओवाद प्रभाव वाले 16 जिले हैं
झारखंड में माओवाद प्रभाव वाले जिलों में रांची, खूंटी, बोकारो, चतरा, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गुमला, हजारीबाग, लातेहार, लोहरदगा, पलामू, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम शामिल हैं. वहीं आठ अति माओवाद प्रभावित जिलों में चतरा, गिरिडीह, गुमला, खूंटी, लोहरदगा, लातेहार, सरायकेला-खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम शामिल हैं. इसे भी पढ़ें -अब">https://lagatar.in/now-it-is-the-turn-of-monsoon-how-much-preparation-of-the-municipal-body/">अबहै मॉनसून की बारी, नगर निकाय की कितनी तैयारी
एसआरई फंड के तहत ये मिलता है
- उग्रवादी हिंसा में मारे गए नागरिकों/सुरक्षाबल के परिवारों को अनुग्रह राशि के भुगतान.
- सरेंडर करने वाले नक्सली को मुआवजा.
- फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन का निर्माण
- सिविक ऐक्शन प्रोग्राम
- उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क का निर्माण
- नक्सलरोधी अभियानों के लिए हेलीकॉप्टर मुहैया कराना.
- चार पहिया और दो पहिया वाहन के लिए फंड
- पुलिस पिकेट बनाने के लिए फंड
- उग्रवाद से प्रभावित राज्यों में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती.
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