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जल, जंगल और जमीन को आदिवासी ही बचा सकते हैं : मुख्यमंत्री

  •  ऐतिहासिक मुड़मा जतरा मेला के समापन समारोह में शामिल हुए
  • शक्ति स्थल की पूजा- अर्चना की, गले में मांदर टांगा
  • जहां पर आदिवासियत का सवाल होगा, हेमंत खड़ा रहेगा
  • महिलाओं से अपील, माथे पर हड़िया-दारू ढोना बंद कर सरकार की योजना को ढोएं, व्यवसाय करें
Ranchi : दक्षिणी छोटानागपुर का दो दिवसीय ऐतिहासिक मुड़मा जतरा का गुरुवार को समापन हो गया. मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि जल-जंगल और जमीन हमारे देवता हैं. यह केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे मानव जाति के देवता हैं. जल, जंगल और जमीन को आदिवासी ही बचा सकते हैं. जल, जंगल को न फॉरेस्ट विभाग बचा सकता है ना डीएफओ और ही न रेंजर इसे बचा नहीं सकते हैं. उन्होंने कहा कि मुड़मा जतरा शक्ति स्थल का कायाकल्प होगा. यह मेरा भी स्थल है. मुड़मा मेला के प्रति जो भी योगदान होगा, हम देंगे. कार्यक्रम में  मंत्री आलमगीर आलम भी शामिल हुए. इसे भी पढ़ें –अनिश्चितकालीन">https://lagatar.in/indefinite-picket-continues-for-the-third-day-condemning-the-working-style-of-the-chief-engineer/">अनिश्चितकालीन

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यह मेला हमारे समाज का एक हिस्सा भी

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेला हमारे समाज का एक हिस्सा भी है. मैं हमेशा यहां आता रहा हूं. आदिकाल से यह मेला यहां लगता रहा है. समाज में टूट-फूट का खतरा बढ़ने लगा था. तभी हमारे दिशोम गुरु शिबू सोरेन, बंधु तिर्की, धर्मगुरू बंधन तिग्गा ने इस मेला में एक ऐसी नींव गाड़ी कि आज उस खूंटे के इर्द-गिर्द घूमने के लिए पूरे देश से लोग आते हैं. आज समाज की रक्षा करना किसी एक व्यक्ति विशेष का काम नहीं है. इसमें हर व्यक्ति को योगदान करना चाहिए. तभी यह समाज बचेगा. हम संरक्षक हो सकते हैं, हम व्यवस्था दे सकते हैं. मगर इस व्यवस्था को बचाए रखने के लिए समाज के लोगों को आगे करना होगा.

गुरुजी ने आंदोलन शुरू किया तो लोग हंसते थे

मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि राज्य गठन का सपना क्यों देखा गया. जब गुरुजी ने इस आंदोलन को शुरू किया तो लोग हंसते थे. कहते थे कि आदिवासी लोग अलग राज्य लेगा. हड़िया-दारू पीने वाले लोग राज चलाएंगे. मगर अलग राज्य बना. पर यह बात भी सही है कि हड़िया-दारू के कारण हमारा बहुत नुकसान हो चुका है.

आज हम यहां हैं, कल न रहें, तब क्या होगा?

कहा कि मुख्यमंत्री का पद हमारी खानदानी नहीं है. यह संघर्ष के कारण मिला है. आज हम यहां हैं. कल न रहें, तब क्या होगा. इस धरती के अंदर केवल आदिवासी समाज नहीं है. जैसे समुद्र में कई बड़ी मछलियां रहती हैं. हमेशा बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है. समाज में भी ऐसी गतिविधियां होती हैं, जहां एक दूसरे को खा जाते हैं. बड़े-बड़े भवन बनाने से आदिवासी समाज नहीं बचेगा. 20 वर्ष में क्यों नहीं सरना धर्म कोड प्रस्ताव पास किया गया.आज सरना-मसना का संरक्षण और संवर्धन क्यों हो रहा है. मुड़मा जतरा स्थल को बचाना समाज के हर व्यक्ति का काम है.

हम सचेत नहीं रहे, तो समाप्त हो जाएंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक पीढ़ी ने यह राज्य बना दिया. अब नयी पीढ़ी की जिम्मेवारी है कि समाज और राज्य को बचाएं. इसके लिए हम हर वह काम करेंगे, जिससे समाज को मजबूती मिलती है. आज विचित्र हालत है. मैंने इस उम्र में ही बहुत कुछ देख लिया. अब हम भी निराश हो जाते हैं, आदिवासी समाज की दुर्दशा देखकर. आदिवासियों का जीवन संघर्षपूर्ण रहा है. अगर हम सचेत नहीं रहे, तो समाप्त हो जाएंगे. जहां भी आदिवासियत की बात होगी, वहां हेमंत खड़ा रहेगा.

कोरोना से निबटे, तो सूखा आ गया

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बनते ही कोरोना आ गया. कोरोना से निबटे, तो सूखा आ गया. आज हमने समय से पहले धान के बीज और खाद दिया. मगर इसके बाद बारिश ने धोखा दे दिया. उन्होंने महिलाओं से कहा कि माथे पर हड़िया-दारू लेकर चलना बंद करें. सरकार की योजनाओं को माथे लेकर चलें. आपके लिए सरकार बहुत योजनाएं चला रही है. आपको जो व्यवसाय करना है, करें. इसे भी पढ़ें – आरोप:">https://lagatar.in/allegation-the-junior-doctor-of-rims-assaulted-the-deranged/">आरोप:

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मुड़मा जतरा स्थल का विकास करेंगे : आलमगीर आलम

मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि यह मुड़मा जतरा मेल सदियों पुराना है. दो साल से कोरोना संकट के कारण यह नहीं मना. हमारी हिंदुस्तानी परंपरा ही हमारी पहचान है. हमारे पूर्वजों ने जो शुरू किया उसे हम आगे बढ़ाते आ रहे हैं. मेले के आयोजन से लोगों का रोजगार भी मिलता है और परंपरा भी आगे बढ़ता है. सरकार की ओर से योजना चलाकर इस क्षेत्र का विकास करेंगे. सड़कों की सुधार करेंगे.

हेमंत आदिवासी-मूलवासी-सदानों को उनका हक देने का काम रहे : बंधु तिर्की

कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा कि जतरा और समाज को आगे बढ़ाना है. 20 साल बाद आदिवासी-मूलवासी और सदानों को हक और अधिकार देने का काम हेमंत सोरेन कर रहे हैं. मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हैं. उनके प्रयास से ही सिरम टोली का सौंदर्यीकरण हो रहा है. उन्हें सरना-मसना की चिंता है. सदानों के लिए भी बहुत कुछ कर रहे हैं. गरीब के बच्चों को पढ़ने के लिए विदेश भेज रहे हैं. आने वाले दिनों में झारखंड का नक्शा बदलेगा. हेमंत के नेतृत्व में झारखंड का विकास होगा. सीएम और सरकार पर संकट होने के बाद भी हमारी सरकार ने सरना धर्म कोड, स्थानीय नीति, ओबीसी आरक्षण सहित कई मुद्दों पर निर्णय लिया. पड़हा संचालन मंच बनाया जाए. यहां पर पूरे देश से लोग पहुंचते हैं. इनके लिए दो तल्ला भवन बना दिया जाए. 2023 में नया रूप में जतरा होगा.

मुड़मा जतरा स्थल को संरक्षित और संवर्धन करें : उरांव

डॉ करमा उरांव द्वारा जतरा स्थल के संरक्षण एवं संर्वधन के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया. कहा कि मुख्यमंत्री राज्य के विकास के लिए कई काम कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने आदिवासियों के धार्मिक स्थल की सुरक्षा एवं संर्वधन का निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री ने स्थानीय नीति को कैबिनेट से पास किया. मुख्यमंत्री को झारखंड के आदिवासी-मूलवासी की ओर से धन्यवाद. मुख्यमंत्री ने सरना धर्म कोड प्रस्ताव पास करके दिल्ली भेजा. कहा कि मुड़मा जतरा स्थल के विकास के लिए आपको काम करना चाहिए. यह राज्य केआदिवासियों और मूलवासियों का सबसे बड़ा शक्ति स्थल है.

सीएम को मांदर भेंट किया

इससे पहले सीएम ने मुड़मा जतरा शक्ति स्थल में पूजा-अर्चना कर राज्य की खुशहाली की कामना की. सीएम को मांदर भेंट किया गया. उन्होंने मांदर बजाया. इस मौके पर मंत्री आलमगीर आलम, धर्म गुरू बंधन तिग्गा, पूर्व विधायक बंधु तिर्की, विधायक नेहा शिल्पी तिर्की, विद्यासागर केरकेट्टा, रवि तिग्गा, केंद्रीय सरना समिति अध्यक्ष अजय तिर्की समेत कई उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें – मैट्रिक">https://lagatar.in/date-of-application-for-matriculation-level-competitive-examination-extended-will-be-able-to-apply-till-november-10/">मैट्रिक

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