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ऑपरेशन नवजीवन : झारखंड पुलिस मुख्यालय में 27 नक्सलियों ने हथियारों के साथ किया सरेंडर

  • 25 माओवादी और 2 जेजेएमपी उग्रवादी शामिल

Ranchi :   झारखंड पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है. ऑपरेशन नवजीवन के तहत पुलिस मुख्यालय में कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में सक्रिय भाकपा (माओवादी) संगठन के शीर्ष नेताओं, कमांडरों और दस्ता सदस्यों समेत कुल 27 नक्सलियों ने गुरुवार को आत्मसमर्पण किया है. इनमें 25 माओवादी और 2 जेजेएमपी उग्रवादी शामिल हैं.

 

नक्सलियों ने 17 हथियारों और करीब 2987 गोलियों के साथ सरेंडर किया है. माओवादी के पास से 16 हथियार और 2857 गोलियां बरामद की गई हैं. जबकि जेजेएमपी उग्रवादियों ने एक 5.56 एमएम इंसास राइफल, चार मैगजीन और 130 राउंड गोलियों के साथ आत्मसमर्पण किया है. 

 

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आत्मसमर्पण करने वाले 27 नक्सलियों की लिस्ट 

भाकपा (माओवादी) के 25 आत्मसमर्पित नक्सली

1. करण उर्फ डांगुर तियू (30 वर्षीय), , निवासी – सांगाज, थाना गोइलकेरा, जिला पश्चिमी सिंहभूम.


2. गादी मुंडा उर्फ गुलशन, (34 वर्षीय), निवासी – बारूहातू, जिला रांची.


3. नागेंद्र मुंडा उर्फ प्रभात मुंडा उर्फ मुखिया उर्फ पराउ (50 वर्षीय), निवासी – हरादलामा कोचा-टोव, थाना अड़की.


4. रेखा मुंडा उर्फ जयंती (40 वर्षीय), निवासी – बारूहातू, जिला रांची.


5. सागेन अंगारिया उर्फ दोकोल उर्फ याम लाल अंगारिया (50 वर्षीय), निवासी – सांगाज, थाना गोइलकेरा, जिला पश्चिमी सिंहभूम.


6. दर्शन उर्फ बिंज हांसदा (36 वर्षीय), निवासी – हातनाबुरू, छोटानागरा, जिला पश्चिमी सिंहभूम.


7. सुलेमान हांसदा उर्फ सुनी हांसदा उर्फ चमरा, (28 वर्षीय), निवासी – हातनाबुरू, छोटानागरा, जिला पश्चिमी सिंहभूम.


8. बैजनाथ मुंडा (28 वर्षीय), निवासी – हरबा, तमाड़.


9. बासुमती जेराई उर्फ बासू उर्फ सरस्वती (20 वर्षीय), निवासी – धारनकिर, जिला पश्चिमी सिंहभूम.


10. रघु कायम उर्फ गुणा (27 वर्षीय), निवासी – पश्चिमी सिंहभूम.


11. किशोर सिरका उर्फ दुर्गा सिरका (20 वर्षीय), निवासी – पश्चिमी सिंहभूम.


12. राम दयाल मुंडा (22 वर्षीय), निवासी – तमाड़ क्षेत्र.


13. वंदना उर्फ शांति (20 वर्षीय), निवासी – गोइलकेरा क्षेत्र.


14. सुनिता सरदार उर्फ बारी (24 वर्षीय).


15. डांगुर बोइपाई उर्फ मुकेश (18 वर्षीय).


16. बसंती देवगम  (22 वर्षीय).


17. मुन्नीराम मुंडा (19 वर्षीय)


18. अनिशा कोड़ा उर्फ रानी (20 वर्षीय).


19. सपना उर्फ सुरू कालुंडिया (19 वर्षीय).


20. सुसारी उर्फ दसमा कालुंडिया.


21. बिरसा कोड़ा उर्फ हरिसिंह, 


22. नुअस 


23. बुमली तियू उर्फ दामू चरण तियू (25 वर्षीय).


24. निति माई उर्फ निति हेंब्रम (19 वर्षीय).


25. लादू तिरिया, निवासी – सारजोमबुरू, थाना टोंटो, जिला पश्चिमी सिंहभूम.

 

जेजेएमपी के 2 उग्रवादी ने किया सरेंडर

26. सचिन बैंक उर्फ युजीन बैंक, निवासी – अपर घाट, अंबाकोना, थाना गुरदारी, जिला गुमला.


27. श्रवण गोप,  निवासी – कलिगा, थाना गुमला.

 

2026 में 44 नक्सलियों ने किया है सरेंडर

झारखंड के महानिदेशक (डीजी) और पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के निर्देश पर झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर राज्यभर में नक्सली संगठनों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है.  झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत भटके हुए नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस लाने की कोशिश भी लगातार जारी है.

 

पुलिस के बढ़ते दबाव, जंगलों में लगातार अभियान और संगठन के अंदर शोषण एवं भयादोहन से परेशान होकर बड़ी संख्या में नक्सली अब आत्मसमर्पण कर रहे हैं. पुलिस मुख्यालय के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक झारखंड में 44 नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि 29 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. इसके अलावा विभिन्न मुठभेड़ों में 22 नक्सली मारे जा चुके हैं.

 

पश्चिमी सिंहभूम जिले में नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए सारंडा क्षेत्र में 21 नए एडवांस कैंप लोकेशन और फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस स्थापित किए गए हैं.

 

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली भाकपा (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर जी और असीम मंडल की टीम से जुड़े रहे हैं. इनमें सब-जोनल कमेटी सदस्य, एरिया कमांडर और मारक दस्ता सदस्य शामिल हैं, जो कोल्हान और सारंडा के सुदूर जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय थे और इलाके के चप्पे-चप्पे की जानकारी रखते थे. 

 

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कई बड़े हमलों में शामिल रहे आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर पश्चिमी सिंहभूम और आसपास के इलाकों में कई बड़ी घटनाओं को अंजाम देने का आरोप है. इनमें जनवरी 2022 में गोइलकेरा थाना क्षेत्र में पूर्व विधायक गुरूचरण नायक पर हमला भी शामिल है.  इस हमले में नक्सलियों ने दो बॉडीगार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी थी और सरकारी राइफल लूट ली थी.

 

इसके अलावा तुंबाहाका मुठभेड़, मैगजीन से विस्फोटक लूट, लोवाबेड़ा आईईडी ब्लास्ट, राजाबासा मुठभेड़, बलिबा और मरांगपोंगा विस्फोट, रातामाटी आईईडी ब्लास्ट, पंचलाता बुरू मुठभेड़, बिंगईकीर-कुलापाबुरू मुठभेड़ और कोलबंगा व दलाईगढ़ा में सुरक्षा बलों पर हमले जैसी कई बड़ी घटनाओं में इनकी संलिप्तता रही है. इन घटनाओं में कई जवान शहीद और घायल हुए थे. 

 

नक्सली संगठन को लगा बड़ा झटका

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले अधिकांश नक्सली पश्चिमी सिंहभूम और गिरिडीह जिले के स्थानीय निवासी हैं, जिन्हें पहले माओवादी संगठन में शामिल किया गया था. इनके आत्मसमर्पण से कोल्हान, सारंडा और आसपास के क्षेत्रों में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है.

 

झारखंड पुलिस ने शेष नक्सलियों से हिंसा और भय का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की है. 

 

अभियानों के कारण नक्सली संगठन हुए कमजोर : अभियान आईजी 

अभियान आईजी नरेंद्र सिंह ने कहा कि झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को कई सुविधाएं दी जाती हैं. इसमें अनुदान राशि, जीवन बीमा, बैंक लोन, जमीन , बच्चे की खर्चा,चार लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता, सरकारी अस्पतालों में निशुल्क चिकित्सा सुविधा शामिल है.

 

उन्होंने कहा कि यदि आत्मसमर्पित नक्सली शारीरिक मापदंड पूरा करते हैं तो उन्हें झारखंड पुलिस, गृह रक्षक और एसपीओ के रूप में भी नियुक्त किया जा सकता है. यह भी कहा कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत महिला उग्रवादियों एवं उग्रवादियों की पुत्रियों के विवाह के लिए भी अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाती है. इसके अलावा ओपन जेल जैसी सुविधाएं भी सरकार की ओर से दी जाती हैं.

 

नरेंद्र सिंह ने संयुक्त सुरक्षा बलों का धन्यवाद देते हुए कहा कि लगातार चल रहे अभियानों की वजह से नक्सली संगठन कमजोर हुआ है. उन्होंने “जय हिंद, जय जवान” के नारे के साथ अपनी बात समाप्त की. 

 

आज का दिन ऐतिहासिक है : सीआरपीएफ आईजी 

सीआरपीएफ आईजी साकेत कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ और कोबरा बल के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन है.  उन्होंने कहा कि आज 25 माओवादी और 2 जेजेएमपी उग्रवादियों ने 16 हथियारों के साथ सरेंडर किया है.

 

उन्होंने कहा कि आज का यह आत्मसमर्पण झारखंड पुलिस, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ और कोबरा जवानों की लगातार मेहनत और जोखिम भरे अभियानों का परिणाम है. पिछले छह महीनों में सुरक्षा बलों ने जंगलों के भीतर 21 नए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस स्थापित किए, जिससे नक्सलियों की गतिविधियों पर काफी अंकुश लगा. 

 

साकेत कुमार सिंह ने कहा कि 6 नवंबर के बाद ऐसा कोई महीना नहीं गया ,जब सुरक्षा बलों की मुठभेड़ माओवादी संगठन की मिसिर बेसरा टीम से नहीं हुई हो. 22 जनवरी की मुठभेड़ में 17 नक्सली मारे गए थे. इसके बाद 1 मार्च, 15 अप्रैल, 29 अप्रैल और दो दिन पहले भी लगातार एनकाउंटर हुए. उन्होंने बताया कि इन अभियानों में सुरक्षा बलों को भी नुकसान उठाना पड़ा और जवान घायल हुए, लेकिन इसके बावजूद अभियान लगातार जारी रखा गया. 

 

आईजी ने कहा कि माओवादी संगठन अब पूरी तरह बिखर चुका है. मिसिर बेसरा की मुख्य टीम टूटकर कई हिस्सों में बंट गई है. असीम मंडल और अन्य कमांडरों के साथ अब बेहद कम संख्या में नक्सली बचे हैं. उन्होंने कहा कि लगातार चलाए गए अभियानों के कारण संगठन का पूरा ढांचा कमजोर हो गया है. 

 

उन्होंने शेष बचे नक्सलियों से अपील की कि वे भी मुख्यधारा में लौटें. उन्होंने कहा कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत उनका स्वागत किया जाएगा और उन्हें सम्मान के साथ समाज से जोड़ा जाएगा. साथ ही चेतावनी दी कि अगर नक्सली आत्मसमर्पण नहीं करते हैं तो ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक झारखंड पूरी तरह नक्सल मुक्त नहीं हो जाता. 

 

ऑपरेशन नवजीवन के कारण नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे : एडीजी मनोज कौशिक 

एडीजी मनोज कौशिक ने कहा कि आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि 27 माओवादी मुख्यधारा में लौट रहे हैं. उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने हिंसा और हथियार का रास्ता छोड़कर शांति और विकास का रास्ता चुना है.

 

उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की पुनर्वास नीति और झारखंड पुलिस के लगातार प्रयासों का यह सकारात्मक परिणाम है. उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के परिवारों के धैर्य और त्याग की भी सराहना की और कहा कि उनके सहयोग से ही यह संभव हो पाया है. 

 

एडीजी ने कहा कि झारखंड पुलिस, कोबरा, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के जवानों ने नक्सल विरोधी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने उन शहीद जवानों को भी नमन किया, जिन्होंने राज्य को नक्सल मुक्त बनाने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया. 

 

उन्होंने कहा कि डीजीपी के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे अभियानों और “ऑपरेशन नवजीवन” के कारण बड़ी संख्या में नक्सली अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं. 

 

झारखंड को नक्सल मुक्त बनाने के लिए आगे भी जारी रहेगा अभियान :  डीजीपी तदाशा मिश्रा

डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि आज का दिन झारखंड पुलिस और पूरे राज्य के लिए अविस्मरणीय है. उन्होंने कहा कि आज भटके हुए साथियों को फिर से मुख्यधारा में स्वागत किया जा रहा है. यह खुशी का दिन है, लेकिन साथ ही उन जवानों के बलिदान को याद करने का भी दिन है, जिन्होंने नक्सल विरोधी अभियान में अपनी जान दी. 

 

उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले 27 नक्सलियों और उनके परिवारों का स्वागत करते हुए कहा कि झारखंड पुलिस आगे भी उनका पूरा ख्याल रखेगी. सरकार की पुनर्वास नीति के तहत जो भी सुविधाएं और सहायता देनी होगी, उसे सुनियोजित तरीके से पूरा किया जाएगा. 

 

डीजीपी ने कहा कि झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, झारखंड जगुआर और सभी खुफिया एजेंसियों ने मिलकर लगातार अभियान चलाया, जिसका परिणाम आज देखने को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि आगे भी इसी तरह संयुक्त और व्यापक अभियान जारी रहेगा, ताकि झारखंड पूरी तरह नक्सल मुक्त बन सके.

 

इन पुलिस अधिकारियों की रही उपस्थिति

आईजी पंकज कंबोज, आईजी प्रभात कुमार, आईजी सुनील बंसल, आईजी असीम विक्रांत मिंज, आईजी अनूप बिरथरे, आईजी मयूर पटेल कन्हैयालाल, डीआईजी, इन्द्रजीत महथा, डीआईजी मनोज रतन चौथे, डीआईजी कार्तिक एस, शैलेंद्र वर्णवाल, एसएसपी राकेश रंजन, एसपी हरिश बिन जमा, एसपी श्री सौरभ समेत कई अधिकारी उपस्थित थे.

 

 

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