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ऑपरेशन सिंदूर में सटीक रणनीति, वैज्ञानिक गणना और तकनीकी कौशल का रहा समन्वयः सीडीएस

  • हम गैर आतंकी नागरिक को नहीं मारना चाहते थे
  • सेना में प्रवेश भाई-भतीजावाद से नहीं होता
  • देश की असली विविधता व संस्कृतियों को समझना चाहता है, तो सेना से समझा सकता है

 

Ranchi : देश के प्रमुख रक्षा अध्यक्ष झारखंड दौरे पर हैं. गुरुवार को राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में सीडीएस (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए दिल खोलकर कर अपनी बात रखी. कहा कि ऑपरेशन सिंदूर’ अभियान की योजना और क्रियान्वयन में हमारी सटीक रणनीति, वैज्ञानिक गणना और तकनीकी कौशल का समन्वय रहा.

 

हमारे लिए राजनीतिक लक्ष्य सर्वोपरि होता है. सेना सदैव सुनिश्चित करती है कि किसी भी कार्रवाई में निर्दोष नागरिकों की क्षति न हो. रात के एक से डेढ़ बजे बजे इसलिए किया कि हमें अपनी क्षमता पर भरोसा था.
 

हम गैर आतंकी नागरिक को नहीं मारना चाहते थे

सीडीएस ने कहा कि  हम गैर आतंकी नागरिक को नहीं मारना चाहते थे. इस अभियान में नौसेना सेना के हथियार का भी इस्तेमाल किया गया, नवाचार जरूरी है. इस बार ड्रोन का इस्तेमाल किया.

 

उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि सफलता केवल उच्च आईक्यू से नहीं मिलती, बल्कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता, टीम-वर्क और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति से ही वास्तविक उपलब्धि संभव है. विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए बच्चों को कठोर परिश्रम और अनुशासन के साथ आगे बढ़ना होगा.

 

 मैं एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से आता हूं

स्कूली बच्चों से संवाद के क्रम में कहा कि वे एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं और उनकी प्रारंभिक शिक्षा कोलकाता के केंद्रीय विद्यालय में हुई. उनसे पूर्व उनके परिवार का कोई भी व्यक्ति सेना में नहीं था और न ही उनके बाद. उनकी एक पुत्री है जो सेना में नहीं है. सेना में प्रवेश भाई-भतीजावाद से नहीं होता है.

 

विद्यार्थियों से कहा कि यदि कोई भारत की असली विविधता और संस्कृतियों को समझना चाहता है, तो सेना से समझा सकता है. सेना केवल युद्ध के समय ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं और आपात परिस्थितियों में भी जनता की रक्षा और सेवा करती है.

 

झारखंड की धरती सदैव वीरता और बलिदान की भूमि रहीः राज्यपाल

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि भारतीय सेना केवल हमारी सीमाओं की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि हमारे सपनों और भविष्य की भी सुरक्षा करती है. हमारे वीर जवान विषम से विषम परिस्थितियों में भी देश की सुरक्षा में सदैव तत्पर रहते हैं.

 

बच्चों से आह्वान किया कि वे जीवन में चाहे जिस भी क्षेत्र में आगे बढ़ें, सैनिक, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक या वैज्ञानिक बनें, सबसे पहले अच्छे इंसान और सच्चे देशभक्त नागरिक बनें.

 

‘ऑपरेशन सिंदूर’ को केंद्र में रखकर विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स का उल्लेख करते हुए कहा कि ये केवल चित्र नहीं हैं, बल्कि बच्चों के हृदय में बसे देशप्रेम और वीर जवानों के प्रति सम्मान का सजीव प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जब ये चित्र हमारे वीर सैनिकों तक पहुँचेंगे, तो उन्हें अपार प्रेरणा और ऊर्जा मिलेगी।

 

झारखंड के युवाओं में सेना में जाने की गहरी अभिरुचि रही है

राज्यपाल ने झारखंड की वीरता और बलिदान की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड की धरती सदैव वीरता और बलिदान की भूमि रही है. यह वह भूमि है, जहां से असंख्य स्वतंत्रता सेनानी, बलिदानी और वीर सपूत निकले.

 

यह भूमि ही परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का की भी जन्मभूमि है, जिनका अदम्य साहस सदैव प्रेरित करता है. उन्होंने कहा कि झारखंड के युवाओं में सेना में जाने की गहरी अभिरुचि रही है और यह पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है. राज्यपाल ने विद्यार्थियों को अनुशासन, निरंतर अध्ययन और ऊंचे आदर्श अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि राष्ट्र का भविष्य इन्हीं बच्चों के हाथों में सुरक्षित है।

 

अधिक से अधिक बच्चे प्रेरित होकर भारतीय सेना से जुड़ेः संजय सेठ

रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने कहा कि बच्चे ही विकसित भारत के ब्रांड एम्बेसडर हैं. इस कार्यक्रम में 36 विद्यालयों के विद्यार्थी भाग ले रहे हैं. पिछले 20-25 दिनों में विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स सशस्त्र बलों के साहस और शौर्य को नमन करने का जीवंत प्रतीक हैं.

 

उन्होंने कहा कि वे स्वयं अधिक से अधिक विद्यालयों तक पहुंचे और सभी जगह बच्चों में समान ऊर्जा और देशभक्ति की भावना देखने को मिली. भविष्य में 50,000 बच्चों तक पहुँचने की योजना है. पिछले वर्ष Know Your Armed Forcesअभियान तथा पिछले छह माह में एयर शो का आयोजन भी किया गया था. मेरा उद्देश्य स्पष्ट है, मैं चाहता हूं कि अधिक से अधिक बच्चे प्रेरित होकर भारतीय सेना से जुड़ें और मातृभूमि की सेवा करें. प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान से अनुरोध किया कि बच्चों द्वारा बनाई गई इन पेंटिंग्स को स्वीकार करें और इन्हें सीमाओं पर  तैनात जवानों तक पहुँचाया जाए, ताकि उन्हें बच्चों की ओर से नमन और सम्मान का संदेश मिल सके.

 

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