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Opinion : पेट्रोल-डीजल की जो किल्लत है, वह इस सरकार के नकारेपन के सबूत हैं

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच दो महीने से युद्ध चल रहा है. युद्ध के पहले दिन से ही क्रूड ऑयल (जिससे पेट्रोल-डीजल बनता है) सप्लाई की समस्या है. दो माह तक देश से छिपाने के बाद अब प्रधानमंत्री से लेकर उनके वित्तीय सलाहकार, पेट्रोलियम मंत्री समेत तमाम जिम्मेदार अब बता रहे हैं कि संकट है. तेल ना खरीदे.
 

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच दो महीने से युद्ध चल रहा है. युद्ध के पहले दिन से ही क्रूड ऑयल (जिससे पेट्रोल-डीजल बनता है) सप्लाई की समस्या है. दो माह तक देश से छिपाने के बाद अब प्रधानमंत्री से लेकर उनके वित्तीय सलाहकार, पेट्रोलियम मंत्री समेत तमाम जिम्मेदार बता रहे हैं कि संकट है. तेल ना खरीदें. 

 

केंद्र की मोदी सरकार को बताना चाहिए कि पिछले 12 सालों में तेल स्टॉक (स्टैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व) को बढ़ाने के लिए क्या किया? तो जवाब मिलेगा, कुछ नहीं किया गया. जो है, वह पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सरकार के समय शुरू हुई योजनाएं हैं. जिन्हें ये लोग "मौन मोहन" कहा करते थे. जिनके कार्यकाल को पैरालाइज्ड सरकार कहा करते थे. 

 


दरअसल, साल 2005 में भारत में केंद्र सरकार ने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व बनाने की पहल की थी. इसके बाद साल 2006 में Indian Strategic Petroleum Reserves Limited (ISPRL) का गठन किया गया. 10  सालों तक इस पर काम चलता रहा. जिस कारण वर्ष 2015 से 2018 तक तीन स्ट्रैटेजिक फैसिलिटीज तैयार की गई. 

 


पहला स्ट्रैटेजिक फैसिलिटीज विशाखापत्तनम स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व वर्ष 2015 में तैयार हुआ. इसके बाद वर्ष 2016 व 2018 में क्रमशः मैंगलोर स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व व पादुड़ स्ट्रैटेजिक रिजर्व तैयार हुआ. मोदी सरकार ने इसके शुरू होने को अपनी उपलब्धि जरूर बतायी. लेकिन इसके आगे कुछ नहीं किया.

 

वर्ष 2018 में केंद्र की मोदी सरकार ने दूसरे चरण में दो नई स्ट्रैटेजिक फैसिलिटी तैयार करने को मंजूरी जरूर दी. ओड़िशा के चांदीखोली परियोजना और कर्नाटक की पादुर फेज-दो परियोजना. लेकिन आज तक इसे शुरू नहीं किया जा सका है.

 

हालात यह कि आज जो 60-70 दिनों का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व देश में है, जिस पर देश के पेट्रोलियम मंत्रालय इतरा रहा है, वह मनमोहन सिंह सरकार में तैयार किये गये स्ट्रैटेजिक फैसलिटीज का ही है. इस तरह देखें, तो आज जो लोगों से पेट्रोल-डीजल कम खरीदने की अपील की जा रही है, दरअसल यह देशभक्ति के नाम पर सरकार के नकारेपन को छिपाने की कोशिश है.

 

 

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