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मौखिक भाषा पढ़ने, लिखने व सीखने का आधार होता है: डीईओ

Latehar : जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार ने कहा कि बच्चों में मौखिक भाषा पढ़ने, लिखने व सीखने का आधार होता है. बच्चा लिखित भाषा सीखने से पहले बोलना व सुनना सीखता है. बच्चों के मौखिक भाषा का विकास जितना बेहतर होगा, बच्चों के लिए पढ़ना, लिखना व सीखना उतना ही सरल व गुणवत्तापूर्ण होगा. डीईओ शहर के केंद्रीय विद्यालय, लातेहार में बुधवार को मिश्रित अधिगम के तहत आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत निपुण भारत अभियान में कक्षा एक से तीन तक छात्र व छात्राओं को बुनियादी साक्षरता व संख्या ज्ञान दिया जाना है, ताकि वे आसानी से बोलचाल की भाषा में वाक्य एवं संख्याओं को लिख सकें. इससे पहले डीईओ, जिला परिषद सदस्य विनोद उरांव, एडीपीओ अनूप माइकल केरकेट्टा व प्राचार्या देवनिसिया तिर्की ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. प्राचार्या डी तिर्की ने कार्यशाला की महत्ता व उपयोगिता पर प्रकाश डाला. कहा कि बच्चों की बुनियादी शिक्षा प्राथमिक कक्षाओं से ही शुरू होती है. जो बच्चे कक्षा तीन तक बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान का कौशल प्राप्त करने में सफल होते हैं, उन बच्चों को आगामी कक्षाओं के पाठ्यक्रम को समझने व सीखने में आसानी होती है. तीन सत्रों में चलने वाले इस कार्यशाला में संसाधक कुलदीप तिवारी, प्रकाश कुमार पासवान, आभा एक्का, अवीश कुमार, राजकुमार व अर्चना कुमारी ने नई शिक्षा नीति, बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता विषय पर विस्तार से जानकारी उपस्थित अभिभावकों को दी. धन्यवाद ज्ञापन वरीय शिक्षिका कुसुम कुमारी ने दी. मौके पर जेएनवी के प्राचार्य, प्रगतिशील शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष हीरा प्रसाद यादव, एकीकृत सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा के जिला महासचिव अनूप कुमार, पवन कुमार, अभिनय मिश्र व ज्ञानशंकर आदि उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें : रांची:">https://lagatar.in/ranchi-part-of-rus-central-library-building-collapsed-one-student-died/">रांची:

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