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झारखंड ऊर्जा विकास निगम के कर्मचारियों का प्रमोशन रद्द करने का आदेश निरस्त, पढ़ें हाईकोर्ट ने क्या कहा

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस सुभाष चांद की खंडपीठ ने झारखंड ऊर्जा विकास निगम के कर्मियों की प्रोन्नति को निरस्त करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई की. अदालत ने बिजली बोर्ड के प्रोन्नति रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया है. इसके साथ ही अदालत ने कहा कि ऐसा करने में नियमों का पालन नहीं किया गया है. हालांकि अदालत ने कहा कि बोर्ड चाहे तो सभी कर्मियों का पक्ष जानने के बाद भी नियमानुसार कोई निर्णय ले सकता है. पूर्व में बोर्ड ने प्रोन्नति रद्द करने के बाद मिले अधिक वेतन वसूलने का भी आदेश दिया था. लेकिन अदालत ने उक्त आदेश को निरस्त कर दिया था.

सभी कर्मियों को वर्ष 2013-14 में प्रोन्नति दी गई थी

इस संबंध में राम नंदन प्रसाद अंबष्ठ और चंद्र भूषण प्रसाद वर्मा सहित 138 कर्मचारियों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता नवीन कुमार, प्रभात कुमार और श्वेता कुमारी ने पक्ष रखा. उन्होंने अदालत को बताया कि उक्त सभी कर्मियों को वर्ष 2013-14 में प्रोन्नति दी गई थी. लेकिन वर्ष 2020 में बिजली बोर्ड ने इनकी प्रोन्नति को रद्द करते हुए अधिक भुगतान की वसूली का आदेश पारित किया. इस बीच सभी कर्मी सेवानिवृत्त भी हो गए. इनका पेंशन भी रिवाइज कर दिया गया. एकल पीठ ने वसूली पर रोक लगा दी थी. लेकिन बिजली बोर्ड के प्रोन्नति रद करने के आदेश को सही ठहराया था. जिसके खिलाफ अपील दाखिल की गई थी.
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