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बेटे की सगाई से पहले बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई का आदेश जारी

Patna : डीएम जी कृष्णैया हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बाहुबली नेता व पूर्व सांसद आनंद मोहन को बिहार सरकार ने रिहाई के आदेश दे दिए हैं. सोमवार शाम आनंद मोहन के रिहाई का नोटिफिकेशन जारी किया गया. इसके साथ ही 27 कैदियों की भी रिहाई के आदेश दिए गए हैं. सोमवार को आनंद मोहन के बड़े बेटे चेतन आनंद की पटना में सगाई है. इसके पहले आनंद मोहन को रिहाई का आदेश दिया गया है. आनंद मोहन सहरसा मंडल कारा में बंद थे. फिलहाल वह 15 दिनों की पैरोल पर जेल से बाहर हैं.

जेल मैनुअल में किया गया है बदलाव

चौदह साल की जेल की सजा पूरी होने के बावजूद आनंद मोहन को सरकारी सेवक की हत्या का दोषी होने के कारण रिहाई नहीं मिल पा रही थी. राज्य सरकार ने इसी माह 10 अप्रैल को जेल मैनुअल के परिहार नियमों में बदलाव को कैबिनेट की स्वीकृति दी थी. बदलाव के बाद काम के दौरान सरकारी सेवकों की हत्या करने वाले बंदियों को भी स्थाई परिहार मिलने का रास्ता साफ हो गया था. शर्त यह भी रखी गई है कि रिहा होने वाले बंदी कारावास अवधि के दौरान अच्छा आचरण रखते हों.

27 कैदियों को मुक्त करने का निर्णय

विधि विभाग के आदेश के अनुसार, 20 अप्रैल को राज्य दंडादेश परिहार पर्षद की बैठक में 14 वर्षों तक जेल में समय गुजारने वाले आजीवन कारावास प्राप्त कैदियों को मुक्त किए जाने की अनुशंसा राज्य सरकार से की गई थी. इसके बाद 27 कैदियों को मुक्त करने का निर्णय लिया गया है. इनमें सबसे अधिक छह कैदी विशेष केंद्रीय कारा भागलपुर में बंद हैं. इसके अलावा मुक्त कारागार बक्सर के पांच, केंद्रीय कारा गया के तीन, आदर्श केंद्रीय कारा बेउर के दो समेत मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, भागलपुर, आरा, सहरसा, अररिया, बिहारशरीफ और कटिहार जेलों में बंद कैदियों के नाम भी सूची में हैं.

पांच मानकों पर बंदियों को परखेंगे कारा अधीक्षक

विधि विभाग ने अपने आदेश में संबंधित कारा अधीक्षकों को बंदियों की सूची सौंपते रिहाई से पहले पांच मानकों के तहत आश्वस्त होने को कहा है. इसमें बंदी द्वारा 14 साल की वास्तविक संसीमन अवधि और परिहार सहित 20 वर्ष की अवधि पूरी की जा चुकी हो. इसके अलावा यह भी जांच करने को कहा गया है कि आजीवन कारावास के जस वाद में रिहाई का प्रस्ताव दिया गया है, उसके अलावा बंदी किसी अन्य मामले में सजायाफ्ता न हो. अगर ऐसा है, तो उसे रिहा नहीं किया जाएगा. इसके अलावा कारा अधीक्षक को यह भी पुन: आश्वस्त होने को कहा गया है कि अनुशंसित बंदी वास्तव में कारा मुक्ति योग्य है या नहीं.
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