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दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर खाली करने का आदेश मनमाना, केंद्र सरकार के खिलाफ HC में याचिका

केंद्र सरकार द्वारा  दिल्ली का प्रतिष्ठित 27.3 एकड़ में फैला दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर खाली करने के आदेश का मामला तूल पकड़ता जा रहा है.  जिमखाना क्लब ने इस मामले में  दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में केंद्र सरकार के आदेश  को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और संविधान के खिलाफ करार दिया गया है.
 

NewDelhi : केंद्र सरकार द्वारा  दिल्ली का प्रतिष्ठित 27.3 एकड़ में फैला दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर खाली करने के आदेश का मामला तूल पकड़ता जा रहा है.  

 

जिमखाना क्लब ने इस मामले में  दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में केंद्र सरकार के आदेश  को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और संविधान के खिलाफ करार दिया गया है. 

 

क्लब ने कोर्ट में गुहार लगाते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ने क्लब परिसर को अपने कब्जे में लेने के लिए  ऱक्षा बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सुरक्षा और गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बेहद सामान्य और अस्पष्ट कारण गिनाये  हैं.

 

याचिका के अनुसार सरकार(मोदी) ने इन दावों के समर्थन में कोई ठोस विवरण या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया. क्लब का आरोप है कि यह कार्रवाई केवल दिखावटी  है. 

 

याचिका में  केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार ने संपत्ति, प्रीमियम राशि, भवनों और परिसर में मौजूद अन्य ढांचों के नुकसान के बदले किसी भी प्रकार के मुआवजे का प्रावधान नहीं किया है.

 

दावा किया है कि दशकों में इस परिसर के विकास और रखरखाव पर भारी निवेश किया गया है, लेकिन सरकार ने अधिग्रहण से पूर्व किसी मुआवजे या पुनर्वास की बात नहीं की.

 

याचिका में संविधान के आर्टिकल 300A का हवाला दिया गया है. कहा है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता.

 

दावा किया कि केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने पूर्व में 18 दिसंबर 2009 के एक पत्र में स्वीकार किया था कि क्लब के मालिकाना अधिकार और टाइटल बहाल'हैं. ऐसे में सरकार अब बिना अधिग्रहण प्रक्रिया और कानूनी सुरक्षा उपायों के क्लब के अधिकार समाप्त नहीं कर सकती. 

 

क्लब ने अपनी याचिका में  केंद्र सरकारकी कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण करार दिया है. कहा कि यह कलरेबल एक्सरसाइज ऑफ पावर है. क्लब का आरोप हैकि  पिछले कुछ वर्षों से सरकार संस्था पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश में लगी हुई है.

 

क्लब ने अदालत से कहा है कि  सरकार प्रशासनिक आदेश, पुलिस शक्ति और कार्यपालिका के दबाव के जरिए जबरन बेदखल करने की  कोशिश कर रही है.

 

याचिका के अनुसार सरकार का यह कदम  फोर्स्ड एविक्शन की श्रेणी में आता है. क्लब ने हाईकोर्ट से मांग की है कि  केंद्र सरकार के आदेश पर तत्काल रोक लगाये. इस याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में 26 मई को सुनवाई होगी.  

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