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हर तरफ पानी के लिए मचा है हाहाकार

Ranchi :    जैसे -जैसे गर्मी बढ़ रही है , पानी की समस्या विकराल होती जा रही है. गांव, कस्बों और शहरों में इन दिनों पानी को लेकर लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है. सुबह उठते ही पानी की चिंता सताने लगती है. नदी, तालाबों का जलस्तर कम होने से कुंए सूख रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में दूर से पानी लाना पड़ता है. शहरों में निगम के टैंकरों से पानी बांटा जा रहा है, जो नाकाफी है. आबादी के लिहाज से ये टैंकर कम पड़ रहे हैं. पानी के लिए सरकारी प्रयास से जो चापानल गाड़े गए या जलमीनार बनाए गए हैं, उनमें ज्यादातर खराब पड़े हैं. इन्हें बनाने का आश्वासन तो मिल रहा है, लेकिन मरम्मत नहीं हो पा रही है. जो चापानल ठीक हैं, उनमें सैंकड़ो दफा पंप चलाने पर चुल्लू भर पानी मिलता है. लोग चिंतित हैं कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो हालात और बिगड़ जाएंगे. शुभम संदेश टीम ने राज्य भर गहराये जलसंकट पर लोगों से बात की है. जानिए पेयजल संकट का हाल...

चाईबासा :

मझगांव में नहीं मिल रहा पीने का पानी बुरूईकुटी की जलमीनार छह माह से खराब पड़ी है

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alt="" width="1152" height="520" /> मझगांव प्रखंड के घोडाबंधा पंचायत अंतर्गत ग्राम बुरुईकुटी मे सोलर आधारित जल मीनार बीते 6 माह से खराब पड़ी है. जिसके कारण ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पानी के लिए जद्दोजहद में ग्रामीण जुटे हैं. बुरईकुटी गांव के प्राथमिक विद्यालय समीप बीते 2 वर्ष पूर्व ही सोलर आधारित जल मीनार लगायी गई थी. उसी जल मीनार से गांव के सैकड़ों परिवार सहित विद्यालय के बच्चों का एमडीएम एवं अन्य काम चलता था. लेकिन लगभग 6 माह पूर्व से ही सोलर आधारित जल मीनार खराब पड़ी हुई है. नलकूप से एक घंटा इंतजार करने के पश्चात ही मुश्किल से लोगों को एक बल्टी पानी मिलता है. गांव की महिलाओं ने बताया कि कई बार पानी लेने के लिये आपस में तू तू मैं मैं हो जाती है. आखिर मजबूरी में गांव के सैकड़ों परिवार डेढ़ किलोमीटर दूर तालाब जाने को विवश हो रहे हैं. वहां से जरूरत का पानी लाकर परिवार चला रहे हैं. अप्रैल माह की प्रचंड गर्मी में लोगों को पानी के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है.

स्थानीय जनप्रतिनधि से जलमीनार मरम्मत का लगा चुके गुहार 

कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित सरकारी कर्मियों से जल मीनार मरम्मत करने की गुहार लगा चुके हैं. लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है. जिसका खामियाजा गांव के 100 से अधिक परिवारों को झेलना पड़ रहा है. स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों को भी प्यास बुझाने के लिये पानी नहीं मिल पा रही है. पूरे गांव में मात्र दो नलकूप हैं. उसमें से एक पूर्व से ही खराब पड़े हुए हैं और एक में सोलर आधारित जल मीनार लगाई गई थी. लेकिन वह भी खराब है. गांव की महिलाओं ने कहा कि सरकार घर-घर पानी पहुंचाने का प्रचार प्रसार कर रही है. लेकिन हमारे गांव की हकीकत कुछ और है. लोग पानी के लिए तरस रहे हैं. अगर पानी नहीं मिला तो गांव के सभी परिवार के लोग पैदल मार्च करते हुए प्रखंड कार्यालय में धरना प्रदर्शन करेंगे. स्थानीय महिला पदमनी देवी ने कहा कि बीते 6 माह पूर्व से सोलर आधारित जल मीनार खराब है. कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों को मरम्मत करवाने का गुहार लगाई जा चुकी है. स्थानीय महिला श्रीमती कुई ने कहा कि एक घंटा इंतजार करने पर मात्र एक बाल्टी पानी मिल पाता है. लोगों को पानी के लिये काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सरकार पानी की व्यवस्था करें. स्थानीय ग्रामीण सीता देवी ने कहा कि जल मीनार खराब रहने से रात को भी लाइन लगकर पानी लेना पड़ता है, सरकारी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधि मौन धारण किए हुए हैं. महिला दशमा बैंगरा ने कहा कि अप्रैल माह की चिलचिलाती धूप में डेढ़ किलोमीटर दूर से पानी लाकर जरूरत पूरा कर रहे हैं. पेयजल का संकट होने से काफी परेशानी है. ग्रामीण मंजू गोप ने कहा कि जल मीनार खराब होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चों को उठाने पड़ रही है. स्कूली बच्चे भी परेशानी होते हैं. जलमीनार के पास ही स्कूल है.

लातेहार :

एक कुआं के भरोसे हैं रजवार ग्राम वासी

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alt="" width="1200" height="776" /> बालुमाथ प्रखंड के रजवार ग्राम के वासी एक मात्र कुंआ के भरोसे हैं. ग्राम में तकरीबन 60 घर हैं और इसकी आबादी तकरीबन 200 है. जैसे जैसे गरमी बढ़ती जा रही है रजवार ग्राम वासियों की परेशानियां बढ़ती जा रही है. गांव का एक मात्र कुंआ भी अब सूखते जा रहा है. ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि कुंए का पानी तकरीबन 20 फीट नीचे चला गया है. पानी अधिक नीचे चले जाने के कारण दूषित और मटमैला हो गया है. ऐसे में रजवार गांव की महिलाएं तकरीबन एक किलोमीटर दूर जाकर नदी से पानी भरती हैं. नदी में अभी कुछ पानी है, लेकिन अगर ऐसी ही गर्मी रही और बारिश नहीं हुई तो इस नदी का भी पानी सूख जायेगा. महिलाओं ने बताया कि नदी का पानी जब सूख जाता है तो नदी के बालू में चुंआड़ी खोद कर पानी निकालते हैं. लेकिन इसके लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है. सबेरे नदी पहुंच कर चुंआड़ी खोदती है. शुरू में चुआंड़ी का पानी गंदा रहता है. तकरीबन एक से डेढ़ घंटा बाद चुआंड़ी का पानी साफ होता है. उसके बाद वे उसे बर्तन में भरती हैं. ग्रामीण महिला पार्वती कुंवर ने बताया कि गांव में मात्र एक छोटा सा कुंआ अब सूख चुका है. कई बार गांव के मुखिया और संबंधित अधिकारियों को गांव में पेयजल की समस्या से अवगत कराया, लेकिन आज तक पानी की समस्या दूर नहीं हो सकी. उीन्होंने बताया कि पास के गांव में हर घर नल योजना के तहत सोलर टंकी लगा कर पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन रजवार ग्राम में अभी तक न तो सोलर टंकी लगायी गयी है और न ही हर घर नल योजना चालू की गयी है.

रांची

मोरहाबादी स्थित वार्ड 3 के सिंदवार में जलस्रोत सूख चुके हैं.बड़ी तादाद में लोगों के घरों की बोरिंग सूख गई है. वार्ड 3 की वार्ड पार्षद बसंती लकड़ा बताती है कि इनके वार्ड में कई जगह पानी की सप्लाई नहीं आती है. सिंदवार से मोरहाबादी स्थित जल मीनार की दूरी सिर्फ 1.5 किमी है,लेकिन सिंदवार को पानी की सप्लाई नहीं की जाती है. इसके साथ सटे हुए टैगोर हिल में भी पानी की भारी किल्लत हो रही है. वार्ड 3 में 5 मिनी एचवाईडीटी हैं और 4 बड़े वाले एचवाईडीटी हैं. 5 चापकल पूरी तरह से ड्राई हो चुके हैं. स्थानीय निवासियों का कहना है कि सिंदवार में जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है. सप्लाई वाटर भी इस श्रेत्र में नहीं आता है. लोग पानी के लिए पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर हैं. इतनी बडी आबादी के लिए दिन में दो बार टैंकर आता है. उसी में सबको पूरे दिन के लिए पानी इक्कठा कर रखना पडता है. गर्मी बढते ही लोग नगर निगम के टैंकर के भरोसे रहते हैं. लेकिन वह भी भी कम पड़ रहा है.

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alt="" width="150" height="150" />गर्मी में पानी की समस्या होती है : संदीप तिग्गा

सिंदवार निवासी संदीप तिग्गा ने कहा कि यहां हर साल गर्मी में पानी की समस्या होती है. इस एरिया में पानी की सप्लाई भी नहीं आती है.टैंकर के इंतजार में पूरे दिन सड़क पर बीत जाता है. बच्चे सुबह से ही पानी खोजने के लिए आसपड़ोस में घूमने लगते हैं. टैंकर के पानी से कई बार बदबूआती है. पीने का पानी खरीद कर पीना पड़ता है. गरीब आदमी रोज पानी के लिए 30 रूपया खर्च कर पानी पीएगा तो क्या बचत करेगा. सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरुरत है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/rajesh-150x150.jpg"

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पानी के लिए झगड़ा करते हैं लोग : राजेश

राजेश तिग्गा ने कहा कि पानी के लिए यहां अक्सर झगड़े होते रहते हैं. लोग घरों के बाहर रखे ड्रम से पानी उठा कर ले जाते हैं. नहाना धोना तक मुश्किल होते जा रहा है. पानी की सप्लाई शुरू करने के लिए लोगों ने कई बार आवाज उठायी , लेकिन कोई सुनता कहा है. वार्ड पार्षद किसी भी तरह से पानी के टैंकर व्यवस्था करवा दे रही है. पानी के बिना लोगों को काफी तकलीफ हो रही है. लोग पानी के तलाश में इधर-उधर भटकते रहते हैं. पीने के पानी के लिए तो पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.

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alt="" width="150" height="150" />सुबह बहुत दूर जाना पडता है : रविन्द्र मुंडा

रविन्द्र मुंडा ने कहा कि पानी के लिए सुबह साइकल लेकर बहुत दूर जाना पड़ रहा है. हर साल गर्मी में उन्हें पानी के लिए घूमना पडता है. बच्चों को पानी के बिना सबसे ज्यादा दिक्कत का समना करना पड़ता है. कुछ दिन पहले ही मेरे घर में एक बच्चे ने जन्म लिया है,घर में मेरे सिवाय काम करने वाला कोई नहीं है . काम पर जाए या पानी का जुगाड़ करे समझ में नहीं आता है. टैंकर आते हैं तो लोगों की भीड़ लग जाती है. किसी को ठीक से पानी नहीं मिल पाता है. हर साल इस श्रेत्र में गर्मी के दिनों मे पानी की किल्लत हो जाती है.

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alt="" width="150" height="150" />हर रोज 50 रुपये खर्च करने पड़ते हैं : रमेश राम

रमेश राम ने कहा कि दिन की 300 रूपय कमाई है और रोज पानी खरीदने में 50 रूपए खर्च करने पड़ते हैं. पानी की पाइप तो है लेकिन उसमें पानी नहीं आता है. अब सुबह उठकर काम ढ़ूंढ़ने जाये या पानी.दोपहर में टैंकर आता है पर मेरे घर में मेरे अलावा कोई नहीं है. बड़ी बिल्डिंग वाले डिप बोरिंग करवा लिए हैं. जिसके कारण हम लोग की बोरिंग सूख गई है. बड़ी बिल्डिंग वालों के आसानी से पानी मिल जाता है. पर हमलोगों को पानी की काफी दिक्कत होती है. सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए.  

3.86 लाख की जलमीनार बेकार, आफत में बेलकप्पी की 5000 की आबादी

बरकट्ठा के एशिया प्रसिद्ध सूर्यकुंड के इलाके में जलसंकट गहराने लगा है. यह इलाका प्रखंड मुख्यालय से महत तीन किमी दूर बेलकप्पी पंचायत में आता है. इस पंचायत की आबादी करीब 5000 की है. यहां वर्ष 2018 में बनी 3.86 लाख की जलमीनार बेकार पड़ी है. वहीं करीब डेढ़ सौ चापाकलों में एक तिहाई की धार भी कमजोर पड़ने लगी है. खुद पंचायत प्रतिनिधि पानी की किल्लत झेल रहे हैं और शिकायत करने पर सुनवाई भी नहीं हो रही है. यहां के किसानों के लिए भी परेशानी बढ़नेवाली है. उन्हें मवेशियों के लिए पीने का पानी नहीं मिल रहा है. यहां बगल की नदी और गांव के तालाब भी सूखने के कगार पर हैं. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/dilip-panday_659-150x150.jpg"

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मुश्किल से हो रहा पानी का जुगाड़ : दिलीप पांडेय

बेलकप्पी के दिलीप पांडेय कहते हैं कि पानी की परेशानी शुरू हो गई है. बड़ी मुश्किल से पानी का जुगाड़ कर रहे हैं. सुबह से ही पानी के लिए चापाकलों पर भीड़ लगनी शुरू हो जाती है. ऐसे में पीने के पानी के लिए खासा वक्त बर्बाद करना पड़ रहा है. अगर सभी चापाकल ठीक रहते, तो यह परेशानी नहीं झेलनी पड़ती. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/kaushal-panday_449-150x150.jpg"

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चापाकलों को दुरुस्त कराने की जरूरत : कौशल पांडेय

राजेश राणा कहते हैं कि घरों में बोरिंग होने से जलस्रोत नीचे चले गए हैं. लेकिन ग्रामीण भी क्या करें. अगर कुएं और चापाकल दम तोड़ रहे हैं, तो लोगों को बोरिंग कराना ही विकल्प के तौर पर बचा है. ऐसे में कई लोगों ने बोरिंग करा ली है. लेकिन कुओं का जीर्णोद्धार और चापाकलों की मरम्मत प्राथमिकता के तौर पर होनी चाहिए, अन्यथा बेलकप्पी के लोग भीषण जलसंकट का सामना करेंगे. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/vakil-prajapati_229-150x150.jpg"

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जलमीनार से फायदा नहीं : वकील प्रजापति

वकील प्रजापति कहते हैं कि जलमीनार सिर्फ दिखावा है. यह अगर चालू हालत में होती, तो कम-से कम 60 घरों में जलापूर्ति होती. लेकिन इस योजना की खराब मीनारों की मरम्मत कराने वाला कोई नहीं है. चापाकल भी दम तोड़ते नजर आ रहे हैं. अगर यही हाल रहा, तो पीने के पानी के लिए भी ग्रामीणों को भटकना पड़ेगा. अभी तो गर्मी शुरू हुई है. ताल-तलैया और नदियां भी सूखने के कगार पर है.

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alt="" width="150" height="150" />बोरिंग होने से जलस्रोत नीचे गए : राजेश राणा

राजेश राणा कहते हैं कि घरों में बोरिंग होने से जलस्रोत नीचे चले गए हैं. लेकिन ग्रामीण भी क्या करें. अगर कुएं और चापाकल दम तोड़ रहे हैं, तो लोगों को बोरिंग कराना ही विकल्प के तौर पर बचा है. ऐसे में कई लोगों ने बोरिंग करा ली है. लेकिन कुओं का जीर्णोद्धार और चापाकलों की मरम्मत प्राथमिकता के तौर पर होनी चाहिए, अन्यथा बेलकप्पी के लोग भीषण जलसंकट का सामना करेंगे. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/upmukhiya-chhatradhari-thakur_849-150x150.jpg"

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शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं : उपमुखिया

बेलकप्पी के उपमुखिया छत्रधारी ठाकुर कहते हैं कि उनके घर के पास भी दो-तीन चापाकल खराब हैं. उन्होंने इसकी शिकायत पंचायत सचिव से कुछ दिनों पहले की थी. एक बार चापाकलों की मरम्मत की गई, लेकिन फिर खराब हो गए. अब नहीं बन रहे हैं. शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है.

आदित्यपुर

आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड 16 के दिंदली बस्ती, कोचाकुली और दासपाड़ा में जल संकट गहराता जा रहा है. वार्ड पार्षद राजरानी महतो ने पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता जेसन होरो से मिलकर ज्ञापन सौंपा है. उन्होंने कार्यपालक अभियंता से पाइप लाइन से हो रही अनियमित जलापूर्ति को दुरुस्त करने की मांग की है. पार्षद ने कहा है कि उनके वार्ड के दिंदली बस्ती, कोचाकुली और दासपाड़ा के करीब ढाई सौ घरों में नियमित रूप से जलापूर्ति नहीं हो रही है, जिससे लोगों को प्रतिदिन पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है. साथ ही सक्षम लोगों को भाड़े का टैंकर मंगाकर अपनी जरूरतों को पूरा करना पड़ रहा है. जबकि सारे लोग हर माह नियमित रूप से पानी के बिल का भुगतान करते हैं. पार्षद ने बताया कि यह समस्या पिछले 6 वर्षों से है. फरवरी माह के बाद अचानक से जलापूर्ति अनियमित हो जाती है, जो अगस्त महीने तक बरकरार रहती है.

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alt="" width="150" height="150" />महीने में होती है चार बार जलापूर्ति : पार्वती

आदित्यपुर के कोचाकुली बस्ती निवासी पार्वती गोप कहती हैं कि वे 70 वर्ष की वृद्ध हैं, लेकिन सुबह से लेकर शाम तक पानी के लिए भटकती रहती हैं. पिछले 2 महीने से नल में पानी नहीं आ रहा है. महीने में 4 बार टैंकर आता है. बाकी दिन इधर-उधर से पानी की खोज में लगी रहती हैं. पूरी बस्ती के लोग पानी के लिए परेशान रहते हैं.

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alt="" width="150" height="150" />पानी बिना जीवन नरक हो गया है : बुद्धेश्वर गोप

आदित्यपुर के कोचाकुली बस्ती के बुद्धेश्वर गोप कहते हैं कि पानी के बिना जीवन नरक हो गया है. एक सप्ताह से नहीं नहाये हैं, किसी तरह इधर-उधर से पीने का पानी जुगाड़ कर गुजारा कर रहा हूं. मेरे घर में 5 परिवार है किसी तरह से पीने और खाना पकाने लायक पानी का जुगाड़ हो पाता है. पार्षद भी ध्यान नहीं देती हैं. कभी-कभार टैंकर आता है. उससे पानी भरकर एक सप्ताह तक काम चलाते हैं. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/गौतम-गोप-कोचाकुली-बस्ती-आदित्यपुर-150x150.jpg"

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नारकीय जीवन जी रहे हैं : गौतम गोप

आदित्यपुर के कोचाकुली बस्ती निवासी गौतम गोप कहते हैं कि गर्मी पड़ रही है. घर में पानी नहीं है. दो महीने से सप्लाई का पानी आना बंद हो गया है. हमलोग पार्षद के साथ पीएचईडी कार्यालय भी गए थे, लेकिन वहां भी केवल आश्वासन मिला है. हमलोग नारकीय जीवन जी रहे हैं. मेरे लिए कुछ करिए, ताकि हमारी प्यास बुझ सके.

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alt="" width="150" height="150" />पानी का बिल भेजता है लेकिन पानी नहीं : राजीव

आदित्यपुर के दिंदली बस्ती निवासी राजीव रंजन प्रसाद कहते हैं कि वे दिंदली बस्ती में दो साल से रहते हैं. यहां पानी की समस्या विकराल है. रोज पानी खरीदकर काम चला रहा हूं. स्थानीय पार्षद कभी कभी टैंकर मंगाती हैं तो एक सप्ताह तक राहत रहती है. नगर निगम भी पानी का बिल बराबर भेजता है, लेकिन 2 महीने से पानी नहीं आ रहा है. इस बस्ती पानी की भारी समस्या है.

रामगढ़ : 

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पानी की किल्लत से परेशानी : तबरेज आलम

तबरेज आलम कहते हैं कि वार्ड नंबर 24 में पानी की घोर समस्या है घर में एक कुआं है. वह भी इन दिनों पूरी तरह सूख चुका है .घर के सामने चापाकल है. पर उसकी भी हालत जर्जर है.बहुत चलाने के बाद उस चापाकल से पानी निकलता है. पूरे मोहल्ले के लोग उसी चापाकल पर डिपेंड हैं. इसके अलावा पीने के लिए जार का पानी खरीद कर पीते हैं.

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alt="" width="150" height="150" />ग्रामीणों की स्थिति खराब: गणेश प्रजापति

गणेश प्रजापति कहते हैं कि नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 23 में पानी को लेकर गर्मी के दिनों में ग्रामीणों की स्थिति काफी खराब हो जाती है . ग्रामीणों के लिए कुएं और चापाकल पेयजल का साधन हैं. घर के कुंए तो सूख जाते हैं . चापाकल है उसकी भी स्थिति काफी जर्जर है. पुराना चापाकल होने की वजह से चापाकल में बहुत देर से पानी आता है. वह भी गंदा रहता है. विवश होकर ग्रामीण इसी पानी का उपयोग करते हैं.

पाकुड़

वार्ड नं 1 ड्राई जोन, पानी के लिए भटकते हैं लोग

पाकुड़ शहरी क्षेत्र का वार्ड नंबर 01 ड्राई जॉन इलाका है. गर्मी के दिनों में यहां लोगों को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ता है. इलाके के लोग पेयजल के लिए चापाकल, डीप बोरिंग और सप्लाई वाटर पर आश्रित हैं. सप्लाई वाटर में पानी की रफ्तार धीमी होने के कारण लोगो को परेशानी होती है. लोगों ने वार्ड पार्षद रतन सरदार और नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कौशलेश यादव से कई बार गुहार लगाई, लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं की गई. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/usha-pahadia_181-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> वार्ड नंबर 1 की निवासी उषा पहाड़िया ने कहा कि गर्मी के दिनों में पानी के लिए सुबह 4 बजे से ही चापाकल पर नंबर लगाना पड़ता है. डीप बोरिंग में पानी नही निकलता है. जिसके कारण समस्या और विकट हो जाती है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/pyasi-sardar_666-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" />पायल सरदार ने कहा कि हमारा मोहल्ला ड्राई जोन में आता है. पानी की समस्या को दूर करने के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई. लिहाजा हर साल गर्मी के दिनों में पानी के लिए लोगों की परेशानी बढ़ जाती है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/payal-sardar_950-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" />प्यासी सरदार ने कहा कि पानी के लिए सुबह 8 बजे से नंबर लगाना पड़ता है. ज़रूरत भर पानी भरने में ही घंटों लग जाते हैं. दूसरों के घरों में चौका बरतन और मजदूरी कर गुज़ारा करते हैं. ऐसे में कई बार काम पर जाने में देर हो जाती है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/neeraj-raut_113-150x150.jpg"

alt="" width="150" height="150" /> नीरज राउत ने कहा कि इलाके में एक चापाकल पर सौ परिवार निर्भर हैं. जिस तरह गर्मी परवान चढ़ रही है हालात और भयावह होंगे. नगर परिषद को समय रहते कुछ ठोस और कारगर कदम उठाने होंगे, नहीं तो गर्मी बढ़ने के साथ परेशानी और बढ़ेगी.

धाधिका में जलमीनार खराब, ग्रामीण परेशान

बहरागोड़ा प्रखंड की साकरा पंचायत अंतर्गत धाधिका गांव में सड़क किनारे स्थित सोलर जल मीनार छह माह से बंद पड़ी हुई है. इससे ग्रामीणों को बढ़ती गर्मी में पेयजल के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार के खराब होने की सूचना कई बार जल एवं स्वच्छता विभाग के पदाधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों को दी गई. परंतु मरम्मत की दिशा में आज तक कोई पहल नहीं की गई. ग्रामीणों को दूसरे टोला से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है. ग्रामीण देवदत्त मुंडा, सुभाष बारिक, बाबू बारिक, उत्तम मुंडा, मंगल मुंडा, मोति बारिक, बाटु बारिक, छोटू बारिक ने कहा कि भीषण गर्मी के समय में हमें पेयजल के लिए तरसना पड़ेगा. जनप्रतिनिधि और विभागीय पदाधिकारी शीघ्र ही इस जलमीनार की मरम्मत कराएं. ताकि यहां की पेयजल समस्या का समाधान हो सके.

चक्रधरपुर

इंदकाटा कैंपस की जलमीनार पांच साल से पड़ी है खराब

चक्रधरपुर के आसनतलिया पंचायत के इंदकाटा गांव स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय इंदकाटा परिसर में लगी सोलर जल मीनार करीब पांच साल से खराब पड़ी है, निर्माण के बाद से ही इस सोलर जलमीनार से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है, इससे ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चों को पानी के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है. स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि विभागीय लापरवाही बरते जाने के कारण सोलर जलमीनार खराब पड़ी है, जबकि इसे लेकर गांव में कई बार बैठकें भी आयोजित हो चुकी है. सोलर जलमीनार के बगल में एक चापकल है. उसी से मध्य विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे और ग्रामीण पानी का उपयोग करते हैं, चापाकल खराब हो जाने से परेशानी बढ़ जाती है, इसके बाद दूसरे टोला में जाकर पानी लाना पड़ता है. ग्रामीणों ने बताया कि इंदकाटा गांव में के उत्क्रमित मध्य विद्यालय के समीप लगभग ढाई सौ परिवार रहते हैं. जिस स्थान पर सोलर जल मीनार का निर्माण पांच साल पूर्व कराया गया था.

गर्मी में पानी के लिए होती है दिक्कत, जलमीनार को ठीक कराने की जरुरत: सुनीता कुमारी

उत्क्रमित मध्य विद्यालय इंदकाटा की पारा शिक्षिका सुनीता कुमारी ने कहा कि गर्मी के दिनों में पानी के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है. विद्यालय के समीप एक चापाकल लगा है, लेकिन सोलर जलमीनार बरसों से खराब पड़ा है. जलमीनार दुरुस्त हो जाने से पानी की समस्या दूर हो सकती है.

गर्मी से पहले क्षेत्र में खराब पड़े चापाकलों की होनी चाहिए थी मरम्मत: राजेंद्र महतो

इंदकाटा गांव निवासी राजेंद्र महतो ने कहा कि गर्मी से पहले क्षेत्र में खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत कराई जानी चाहिए थी. लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण क्षेत्र में अधिकतर चापाकल खराब पड़े हैं. वहीं भीषण गर्मी के कारण नदी तालाब भी सूखने लगे हैं, इन दिनों पानी की समस्या बढ़ गई है.

नल जल योजना का ग्रामीणों को नहीं मिल रहा लाभ,खराब पड़े हैं चापानल : दीपक

दीपक कुमार ने कहा कि उनके क्षेत्र में अधिकतर ग्रामीणों को जल जीवन मिशन के तहत चलाए जा रहे हैं नल जल योजना का लाभ नहीं मिल पाया है.पंचायत के फंड से ही कुछ ग्रामीणों के यहां पाइप लाइन से पानी पहुंचाई गई है जबकि अधिकतर ग्रामीण इससे वंचित है. वहीं कई स्थानों पर चापाकल, सोलर जलमीनार खराब पड़े हुए हैं.

खराब पड़े चापाकल और जल मीनारों को ठीक करने की जरुरत है: शिव चरण महतो

इंदकाटा गांव निवासी शिव चरण महतो ने कहा कि हमारे गांव में कई चापाकल खराब है, जिसकी मरम्मत होनी चाहिए. साथ ही नए स्तर से कई जगहों पर सोलर मीनार लगाने की आवश्यकता है ताकि भीषण गर्मी में ग्रामीणों को परेशानियों का सामना ना करना पड़े.

जमशेदपुर के बागबेड़ा, किताडीह, करनडीह में रतजगा कर पानी ढोने की मजबूरी

गर्मी के मौसम में जलस्तर नीचे चला जाता है. जिसके कारण कई क्षेत्रों में पानी की किल्लत शुरु हो जाती है. शहरी क्षेत्र में टाटा स्टील, निकाय एवं अन्य कंपनियों की ओर से पानी की सप्लाई की जाती है. जिसके कारण वहां हाहाकार की स्थिति नहीं है. लेकिन शहर से सटे ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्र में पानी की घोर किल्लत हैं. बागबेड़ा, हरहरगुटू, किताडीह, करनडीह आदि क्षेत्रों में गर्मी के सीजन में पानी के लिए लोगों की भागम भाग शुरु हो जाती है. रातजग्गा कर लोग पानी ढोने को मजबूर होते हैं.

दो तलाबों से ही चल रहा है हमारा काम: सोमवारी

हरहरगुटू बड़ा तालाब की रहने वाली सोमवारी बेसरा ने बताया कि गर्मी शुरु होते ही मुहल्ले में जल संकट शुरु हो जाता है. पानी का लेयर काफी नीचे चले जाने के कारण सार्वजनिक चापानल सूख जाते हैं. जिसके कारण लोगों को तालाब के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है. उन्होंने बताया कि हरहरगुटू क्षेत्र में कभी आठ-दस तालाब हुआ करते थे. लेकिन इन दिनों केवल दो तालाब ही बच गए हैं. जिसपर लोग निर्भर हैं.

बाहर से लाना पड़ता है पानी : पिंकु कुमार लोधी

हरहरगुटू देवता भवन के समीप रहने वाले पिंकु कुमार लोधी ने बताया कि गर्मी शुरु होने के बाद मुहल्ले के लोगों की डबल ड्यूटी शुरु हो जाती है. अपने काम-धंधा के अलावे लोगों को पानी के लिए अलग से मेहनत करनी पड़ती है. तड़के उठकर साइकिल अथवा मोटरसाइकिल से जुगसलाई अथवा बर्मामाइंस से पानी लाना पड़ता है. जुगसलाई क्षेत्र में नगर परिषद की ओर से पानी की सप्लाई की जाती है.

पानी सप्लाई में भेदभाव होता है : विजय कुमार

हरहरगुटू देवताभवन के समीप रहने वाले विजय कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि फरवरी से लेकर मई-जून माह तक लोगों को पानी की ज्यादा किल्लत होती है. इन महीनों में जुस्को (अब टीएसयूआईएसएल), तारापोर एंड कंपनी, विधायक एवं पार्षदों के निजी टैंकर से क्षेत्र में जलापूर्ति होती है. उन्होंने कहा कि मुहल्लों में पानी का टैंकर भिजवाने में भेदभाव किया जाता है.

पानी का लेयर नीचे चला गया : कमल नामता

हरहरगुट्टू निवासी कमल नामता के अनुसार गर्मी के सीजन में पानी की काफी किल्लत हो जाती है. घर में बोरिंग है. लेकिन पानी का लेयर काफी नीचे चले जाने के कारण टंकी में पानी नहीं चढ़ पाता है. इस कारण दूसरे मुहल्ले से पानी लाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि बागबेड़ा जलापूर्ति योजना शुरु होने से पानी की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद जगी थी. लेकिन यह योजना आठ वर्षों से अधर में है. [wpse_comments_template]  

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