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आउटसोर्सिंग कंपनी ने शिक्षकों को हटाया, राजभवन के समक्ष दिया अनिश्तिकालीन धरना

Ranchi: झारखंड राज्य साक्षरता कर्मी महासंघ के तत्वाधान में सैकड़ों साक्षरता कर्मियों ने राजभवन के समक्ष दिया धरना. प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के आधार पर हजारों शिक्षकों का 2012 में नियुक्ति हुआ था. राज्य के गिरीडीह, खूंटी, सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम को छोड़कर 19 जिलों में शिक्षकों की बहाली हुई थी. गुमला जिला के अलख नारायण सिंह ने कहा कि 15 साल से अधिक उम्र के निरक्षर लोगों को साक्षर करने का काम किया. अब ये काम को आउटसोर्सिंग कंपनी को ठेका दे दिया और 2018 में सभी शिक्षकों को हटा दिया. इससे राज्य के सभी शिक्षक बेरोजगार हो गये. सभी शिक्षक ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ाते थे. निरक्षर लोगों को साक्षर बनाया. जिला से प्रखंड स्तर तक जनजागरूकता लाई गई. इसमें जिला कार्यक्रम प्रबंधक डीपीएम में 96 शिक्षक को ऱखा गया था. प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक (बीपीएम) में छह हजार शिक्षक को शामिल किया गया. प्रेरक के रूप में एक महिला और पुरूष को प्रोत्साहन के लिेए नियुक्त किया गया था. इसे भी पढ़ें -झारखंड">https://lagatar.in/it-is-collective-responsibility-to-drive-out-bjp-in-the-silver-jubilee-year-of-formation-of-jharkhand-bandhu-tirkey/">झारखंड

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ये है इनकी मांगें

-साक्षरता कर्मियों की योग्यता,अनुभव का आकलन कर सरकार के विभिन्न विभागों में रिक्त पदों का समायोजन किया जाए. - साक्षर भारत कार्यक्रम के बकाये मानदेय का भुगतान किया जाए. - दस सालों से काम कर रहे संविदा कर्मियों को स्थायी किया जाए. - 1994 -1995 से 31 मार्च 2018 तक में जो अनुबंध शिक्षक थे..उसके आश्रितों को नौकरी में रखा जाए. इसे भी पढ़ें -चुनावी">https://lagatar.in/election-joke-aji-oji-loji-listen-i-do-whatever-i-do-you-also-do/">चुनावी

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