Ranchi : झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा बलों को एक और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है. विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े 18 से अधिक उग्रवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है.
इन उग्रवादियों में अधिकांश नक्सली कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय थे, जबकि कुछ अन्य राज्य के दूसरे इलाकों में काम कर रहे थे. हालांकि, पुलिस की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
बताया जा रहा है कि सभी नक्सलियों ने सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी कर ली है. अगले दो-तीन दिनों में रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में एक औपचारिक कार्यक्रम आयोजित कर इनके सरेंडर की घोषणा की जा सकती है.
पिछले कुछ महीनों से झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई लगातार तेज हुई है. जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में चल रहे विशेष अभियान के कारण माओवादी संगठन पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर अब आत्मसमर्पण की बढ़ती संख्या के रूप में सामने आ रहा है. इसके बावजूद पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार राज्य में करीब 30 इनामी नक्सली अब भी सक्रिय हैं, जिनकी तलाश जारी है.
हाल ही में सुरक्षाबलों ने एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा के करीबी सहयोगी अजय महतो उर्फ टाइगर को गिरिडीह-बोकारो सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया था. इस कार्रवाई को माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. वहीं, मिसिर बेसरा अभी भी सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर है और उसकी तलाश में अभियान लगातार जारी है.
झारखंड पुलिस की पुनर्वास पहल 'ऑपरेशन नवजीवन' का असर भी अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है. इससे पहले 21 मई को भाकपा (माओवादी) के 25 और जेजेएमपी के दो उग्रवादियों समेत कुल 27 लोगों ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण किया था.
उस दौरान नक्सलियों ने 16 आधुनिक हथियार और 2,857 कारतूस भी पुलिस को सौंपे थे. लगातार हो रहे सरेंडर और गिरफ्तारियों से राज्य में माओवादी नेटवर्क कमजोर पड़ता नजर आ रहा है.
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