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पद्मश्री डॉ रामदयाल मुंडा ने आदिवासी दर्शन को स्थापित किया : रणेंद्र

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Ranchi : डॉ रामदयाल मुंडा की 83वीं जयंती के मौके पर पर डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय शोध संस्थान में ‘आदिवासी आर्थिकी, आदि धर्म एवं मुंडारी साहित्य’ पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस मौके पर संस्थान के निदेशक रणेंद्र ने कहा कि आदिवासी समुदाय में लेन-देन एक स्वस्थ परंपरा है, जो आज भी जीवित है. जिसे कई संदर्भों में मूल अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ कर भी देखा जा सकता है. डॉ मुंडा ने जीवन शैली के द्वारा आदिवासी दर्शन को स्थापित किया.

डॉ मुंडा ने आदि दर्शन को स्थापित किया

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सोमा सिंह मुंडा ने कहा कि डॉ मुंडा का समग्र साहित्य सौंदर्य एवं संघर्ष पर आधारित है. उन्होंने कहा था कि कला और सौंदर्य के बिना जीवन पतझड़ जैसा है. डॉ जिंदर सिंह मुंडा ने कहा कि उनकी कविताओं में एक तरफ देशभक्ति है तो दूसरी तरफ प्रेम का अथाह संसार है. विस्थापन का भी दर्द झलकता है. महादेव टोप्पो ने कहा कि रामदयाल मुंडा का संपूर्ण साहित्य शोधपरक और आज भी युवाओं के लिए उपयोगी है. डॉ मीनाक्षी मुंडा ने कहा कि धान की बाली का आदिवासी जीवन में एक अलग महत्व है. इससे नवसृजन का प्रतीक माना जाता है. रामदयाल मुंडा के सुपुत्र डॉ गुंजल मुंडा ने कहा कि पिताजी कहा करते थे कि आदिवासी 1000 वर्षों तक व्यावसायिक बुद्धि नहीं ले सकते हैं. मगर आज समय तेजी से बदल रहा है. डॉक्टर संतोष ने आदि दर्शन पर कहा कि डॉ मुंडा ने अपने साहित्य सृजन के द्वारा आदि दर्शन को स्थापित किया है. इस मौके पर गांधी नगर गुजरात से आए डॉक्टर निशांत, नेहा प्रसाद, मोनिका टूटी आदि ने अपने-अपने विचार रखे.
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डॉ मुंडा के ओपन थियेटर का सपना साकार हो रहा है : निर्मला भगत

झारखंड आदिवासी विकास समिति ने मोरहाबादी के ओपन स्पेस थिएटर में पद्मश्री डॉ रामदयाल मुंडा की जयंती धूमधाम के साथ मनाया. सांस्कृतिक महासचिव सुखराम पाहन के नेतृत्व में मुंडारी लोक नृत्य, मुंडारी पाईका नृत्य एवं विलुप्त प्राय मुंडारी सिंबुआ छऊ नृत्य का रंगारंग प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में सरना रतन वीरेंद्र भगत की पत्नी निर्मला भगत ने कहा कि झारखंड के सबसे बड़े सांस्कृतिक पुरोधा पद्मश्री डॉ रामदयाल मुंडा की जयंती एक सौ नगाड़ों के साथ मनाया गया. डॉ रामदयाल मुंडा का सपना ओपन स्पेस थिएटर में अब धीरे-धीरे साकार हो रहा है. झारखंड आदिवासी विकास समिति के अध्यक्ष प्रभाकर नाग ने कहा कि पूरे झारखंड में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की आवश्यकता है. सभी 32 जनजातियों के बीच अपनी भाषा, पहनावा, सांस्कृतिक विशेषता का आदान-प्रदान करने के लिए ओपन स्पेस थिएटर एक बेहतरीन स्थल है. आने वाले समय में समिति द्वारा और भी अलहदा सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाएंगे. इस मौके पर अमित मुंडा, अजय मुंडा, अशोक मुंडा, रिंकी नायक, सिकंदर मुंडा, विक्की कुमार बबलू सहित कई उपस्थित थे.

अखड़ा संस्कृति बचाए रखना आवश्यक- सरस्वती गागराई

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में डॉ रामदयाल मुंडा की 83वीं जयंती मनायी गई. हो भाषा की सहायक प्राध्यापिका डॉ सरस्वती गागराई “जे नाचीं से बांची” की प्रसिद्ध उक्ति से शुरू करते हुए कहा कि झारखंडी भाषा और संस्कृति को एक सूत्र में बांधने के लिए अखड़ा संस्कृति बचाए रखना आवश्यक है. विशिष्ट अतिथि डीएसडब्ल्यू डॉ अनिल कुमार ने कहा कि डॉ. रामदयाल मुंडा ने विदेश में शिक्षा ग्रहण करते हुए भी झारखंड के आदिवासियों के अस्तित्व की लड़ाई लड़ी. आदिवासी-मूलवासी जनाधिकार मंच ने डॉ रामदयाल मुंडा पार्क मोरहाबादी में डॉ रामदयाल मुंडा का प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इस मौके पर डॉ रामदयाल मुंडा के सुपुत्र गुंजन मुंडा, प्रवीण प्रभाकर, विनीता खलखो सहित कई उपस्थित थे.
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