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अदालतों की चुप्पी साबित करेगी कि देश में कोई लोकतंत्र नहीं है
पूर्व पीएम इमरान खान ने पीएमएल-एन के नेतृत्व वाली शहबाज शरीफ सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह शरीफ परिवार को वही रणनीति अपनाते हुए देख रहे हैं जैसी 1985 से सैन्य तानाशाहों ने अपनाई थी. उन्होंने कहा, सत्ता छोड़ते ही उन्हें लोकतंत्र की याद आती है. जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इमरान ने पूछा कि क्या पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी और जेयूआई-एफ के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान द्वारा इस्लामाबाद की ओर मार्च करने पर पीटीआई सरकार ने कोई गिरफ्तारी की थी. इसे भी पढ़ें : टेरर">https://lagatar.in/yasin-malik-may-be-sentenced-today-in-terror-funding-case-likely-to-get-death-penalty-or-life-imprisonment/">टेररफंडिंग केस में यासीन मलिक को आज हो सकती है सजा, मृत्युदंड या उम्रकैद मिलने की संभावना
इमरान का नौकरशाही को संदेश, अवैध आदेशों का पालन न करें
पीटीआई नेता ने पाकिस्तान की न्यायपालिका का आह्वान करते हुए कहा कि अगर अदालतों ने देश में जो कुछ हो रहा है, उसे अनुमति दी तो अदालतों की प्रतिष्ठा धूमिल होगी और इसकी चुप्पी साबित करेगी कि देश में कोई लोकतंत्र नहीं है. इमरान ने कहा, हम अधिकारियों और नौकरशाहों के नाम नोट कर रहे हैं. नौकरशाही को हमारा संदेश है कि अगर वे अवैध आदेशों का पालन करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. इस क्रम में इमरान ने अपने समर्थकों से कहा कि वे डर की जंजीरों को तोड़ें. उदाहरण दिया कि अफगानों ने विदेशी शक्तियों से कैसे लड़ाई की. खान ने कहा कि सरकार ऐसे लोगों को जेल में नहीं डाल सकती, जो उनके समर्थन में इस्लामाबाद जाने को तैयार हैं. इसे भी पढ़ें : मशहूर">https://lagatar.in/famous-poet-munavwar-ranas-health-deteriorated-doctors-told-the-situation-was-serious-preparation-for-operation/">मशहूरशायर मुनव्वर राणा की तबीयत बिगड़ी, डॉक्टरों ने बतायी स्थिति गंभीर, ऑपरेशन की तैयारी

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